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गूगल करेगा डीफफेक वीडियो का पर्दाफाशा, AI जेनेरेटेड फोटो भी पहचान लेगा

Google ने अपने I/O 2026 इवेंट में पेश किया SynthID. एक ऐसा AI वेरिफिकेशन टूल जो डीपफेक वीडियो और AI से बने कंटेंट की पहचान करने में मदद करेगा. जानिए यह फीचर कैसे काम करता है और इंटरनेट को सुरक्षित बनाने में क्यों है खास.

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19 मई 2026 को गूगल ने अपने I/O इवेंट में कई बड़े लॉन्च किए, जिनकी मदद से गूगल के प्रोडक्ट्स पहले से भी ज्यादा इनोवेटिव बन गए हैं. इन AI प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करके हम वीडियो और इमेज में अपनी क्रिएटिविटी दिखा सकते हैं.

एग्जांपल के लिए, गूगल के नए Omni मॉडल की मदद से किसी भी साधारण वीडियो को मजेदार और अपनी सोच के हिसाब से बदला जा सकता है. लेकिन अगर इस तरह के AI मॉडल्स का इस्तेमाल डीपफेक कंटेंट बनाने में होने लगे, तो यह खतरनाक साबित हो सकता है. इसी समस्या का समाधान लेकर गूगल  ने पेश किया है SynthID.

जानिए SynthID क्या है और यह डीपफेक कंटेंट से कैसे बचाता है?

SynthID एक डिजिटल सिग्नेचर है, जिसे डिजिटल वॉटरमार्क भी कहा जा सकता है. इसकी मदद से आसानी से पता लगाया जा सकता है कि कोई कंटेंट ओरिजिनल है या AI की मदद से बनाया गया है. गूगल  का यह नया कंटेंट वेरिफिकेशन सिस्टम AI के इस्तेमाल को न सिर्फ आसान बनाता है, बल्कि उसे पहले से ज्यादा सुरक्षित भी बनाता है.

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जानिए यह फीचर काम कैसे करता है?

जब भी गूगल AI कोई इमेज, वीडियो, ऑडियो या टेक्स्ट फाइल बनाता है, तो उसके अंदर एक सीक्रेट डेटा पैटर्न छुपा दिया जाता है. यह एक तरह का डिजिटल वॉटरमार्क होता है, जो दिखाई नहीं देता.

इस वॉटरमार्क को जानबूझकर इनविज़िबल बनाया गया है, क्योंकि सामान्य वॉटरमार्क क्रॉपिंग या री-साइजिंग के दौरान हट सकते हैं. इसी समस्या को हल करने के लिए गूगल  ने SynthID तैयार किया है.

जानिए कैसे चेक करें कि वीडियो या इमेज AI से बनी है या नहीं?

इस फीचर की मदद से यह जानना काफी आसान हो जाता है कि कोई कंटेंट गूगल AI द्वारा बनाया गया है या नहीं. अगर आपको किसी फाइल पर शक है कि वह AI से बनी है या असली है, तो सबसे पहले गूगल जेमिनी ऐप खोलें और उस फाइल को अपलोड करें जिसकी जानकारी आप जानना चाहते हैं.

इसके बाद पूछें क्या यह कंटेंट गूगल  AI ने बनाया है? इसके बाद जेमिनी उस फाइल से जुड़ी जानकारी और उसकी हिस्ट्री आपके सामने दिखा देगा.

फ्यूचर में कैसे काम आ सकता है यह कंटेंट वेरिफिकेशन टूल?

आज के समय में रोज़ लाखों-करोड़ों AI इमेज और वीडियो बन रहे हैं, जो इंटरनेट पर तेजी से फैलते हैं. इनमें से कई फेक कंटेंट लोगों को ठगने या गलत जानकारी फैलाने के लिए बनाए जाते हैं.

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ऐसे में यह फीचर लोगों को डीपफेक और फेक AI कंटेंट से बचाने में बेहद मददगार साबित हो सकता है. इतना ही नहीं, गूगल  के साथ कई बड़ी कंपनियों ने भी पार्टनरशिप की है, ताकि SynthID तकनीक का इस्तेमाल उनके प्रोडक्ट्स में भी किया जा सके.
 

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