'फोन उठाने ही एक शख्स सामने से गाली देने लगा. इससे पहले की मैं कुछ समझ पाता वो मुझे एक दर्जन से ज्यादा बार गाली दे चुका था. गाली की वजह पूछने पर कॉलर ने बताया कि तुम लोग लोन लेकर गायब हो गए हो.' ये कहानी आपको सुनी सुनी लग रही होगी. ये हालिया एक्सपीरियंस हमारे साथी संदीप का है.
उन्होंने बताया कि फोन उठाते ही गाली सुननी पड़ेगी, ऐसा मैंने सपने में भी नहीं सोचा था. गाली देने वाला संदीप पर लगाता दबाव बना रहा था और मकसद था उन्हें एक जाल में फंसाने का. ऐसे फोन आए दिन हमारी और आपकी लाइफ का हिस्सा बन चुके हैं.
संदीप ने बताया, 'बात पिछले शनिवार की है. मैं छुट्टी के मूड में था, हाथ में अखबार लिए मैं उसकी कहानियों में खोया हुआ था. सुबह के लगभग 10 बज रहे थे, तभी फोन की घंटी बजी. एक अनजान नंबर देखकर लगा कि कोई स्पैम कॉल होगी.'
'मन कॉल उठाने का नहीं था, लेकिन फिर न जाने कैसे उठा लिया. फोन उठाने की देरी थी. सामने से गालियों की बौछार होती चली गई. इससे पहले कि मैं कुछ समझता कि सामने कौन है, क्या चाहता है, सामने वाला शख्स लगातार गालियां देता चला जा रहा था. मैंने शांत होकर पूछा कौन हो और किससे बात करनी है?'
'सामने से आवाज आई कहां गायब हो गए तो तुम लोग लोन लेकर. मैंने पूछा, कौन-सा लोन. सोनीपत के किसी कारोबारी का नाम लेते हुए उसने कहा कि लोन लिया है 40 लाख का और गायब हो गया. तुम गारंटर हो और तुम भी गायब हो. लोन कौन चुकाएगा.'
'मैंने कहा कि मैं इस शख्स को नहीं जानता और मैं कभी सोनीपत आया भी नहीं हूं. सामने वाले का सीधा जवाब था कि झूठ बोलना बंद करो. लोन गारंटर में तुम्हारा नाम है और अब तुम बहाने बना रहे हो. फॉर्म भरकर अप्लाई करो तुरंत कि तुम नहीं हो गारंटर, नहीं तो पुलिस पहुंचती ही होगी तुम्हारे यहां.'
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'सच कहूं तो एक बार को मैं दबाव में आ गया था. करीब 10 सेकंड मैं कुछ बोल नहीं पाया. लेकिन तभी याद आया कि साइबर ठग भी तो हो सकता है जो फंसाकर किसी फॉर्म के नाम पर अनजान लिंक पर क्लिक कराना चाहता है. बचने के लिए मैंने फोन काट दिया.'
'लेकिन एक सेकंड के अंदर फिर फोन आ गया और सामने वाला शख्स और भी अग्रेसिव हो गया. अब तक मैं संभल चुका था और मान चुका था कि ये साइबर ठग ही है. मेरा ध्यान गया कि इसे सिर्फ मेरा फोन नंबर पता है, नाम नहीं पता है. मैंने पूछा तो नाम बताने की बजाय वह इधर-उधर की बात करने लगा.'
'बस यहीं से मेरी साइकोलॉजी चेंज हुई. मैं हावी हुआ. मैंने कहा कि कहीं भी क्लिक नहीं करूंगा मैं, कोई वेरिफिकेशन नहीं करूंगा मैं. अगर मैं गारंटर बना था तो मेरा एड्रेस भी होगा फॉर्म में, उस जगह पुलिस लेकर आओ. मैं कार्रवाई का सामना करने को तैयार हूं.'
'अब वो थोड़ा शांत हुआ. मैंने पूछा कि किस बैंक से हो, उसने HDFC के लोन रिकवरी ब्रांच का खुद को बताया. मैंने कहा कि सोनीपत में ब्रांच कहा है तुम्हारी, कहां बैठते हो, नाम बताओ, ब्रांच मैनेजर का नाम बताओ. मेरे लोग पहुंच रहे कुछ देर में.'
'बस यही से बैकफुट पर आने लगा वो. मैं एक कदम और आगे बढ़ा और मैंने कहा कि देखो यहां तुम्हारी दाल नहीं गलने वाली. ठगी के लिए कोई और ग्राहक ट्राई करो. फिर उसने फोन काटा और गायब हो गया.'
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साइबर क्राइम को लेकर हमें पूरे दिन में कई ऐड्स दिखते हैं. कभी गूगल तो कभी RBI का विज्ञापन आता है. लेकिन इन सब के बाद भी हर दिन कई लोग ऐसी ठगी का शिकार हो जाते हैं. ऐसे में किसी भी अनजान कॉल के आने पर आपको सचेत हो जाना चाहिए. साइबर ठग का पहला काम होता है आप पर दबाव बनाना. अगर वो इसमें कामयाब हो गया, तो आपको आगे भी फंसा ले जाएगा.
शुरुआत के एक से दो मिनट अगर आपने खुद को शांत रखा, तो साइबर अपराधी आपको छोड़ देंगे. हमेशा याद रखें कि पुलिस या कोर्ट की कार्रवाई फोन पर नहीं होती है. इसके अलावा अगर कोई आपसे लिंक क्लिक करने के लिए कहे, तो कभी भी ना करें. अनजान लिंक पर क्लिक करना आपको फंसा सकता है.
साथ ही कितना भी दबाव हो आपको अपनी पर्सनल डिटेल्स शेयर नहीं करनी चाहिए. अगर आपने शुरुआती कुछ वक्त में खुद को संभाल लिया, तो स्कैमर वैसे ही आपको छोड़कर किसी दूसरे शख्स तक बढ़ जाएगा. स्कैमर्स का सबसे आसान शिकार बुजुर्ग होते हैं. इसलिए घर के बुजुर्गों को जरूर जागरूक करें.