scorecardresearch
 

बजट 2026 में बड़ा ऐलान, भारत बनेगा ग्लोबल डेटा सेंटर हब, विदेशी टेक कंपनियों को मिलेगी टैक्स छूट

Budget 2026: बजट के तुरंत बाद पीएम मोदी ने अपनी स्पीच में कहा है कि भारत ग्लोबल डेटा सेंटर हब बनेगा. लेकिन इससे भारत को क्या फायदा होगा और आम यूजर्स पर इसका क्या असर पड़ेगा? आइए जानते हैं.

Advertisement
X
Budget 2026: भारत बनेगा ग्लोबल डेटा सेंटर हब (Photo: ITG)
Budget 2026: भारत बनेगा ग्लोबल डेटा सेंटर हब (Photo: ITG)

बजट 2026 में सरकार ने टेक सेक्टर को लेकर एक बड़ा और साफ मैसेज दिया है. पीएम मोदी ने भी कहा कि आने वाले सालों में भारत सिर्फ ऐप्स और सॉफ्टवेयर बनाने वाला देश नहीं रहेगा बल्कि ग्लोबल डेटा और AI इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा सेंटर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा. 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में कहा कि भारत में डेटा सेंटर्स और AI से जुड़ी कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए लंबी टैक्स राहत दी जाएगी. इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े नियम आसान किए जाएंगे ताकि बड़े निवेश भारत की तरफ आएं.

सरकार का मानना है कि आने वाले समय में AI, क्लाउड और डिजिटल सेवाओं की रीढ़ डेटा सेंटर्स ही होंगे और अगर भारत इसमें पीछे रह गया तो अगली IT ग्रोथ हाथ से निकल सकती है.

डेटा सेंटर्स पर सरकार इतना जोर क्यों दे रही है?

आज मोबाइल ऐप्स, बैंकिंग, AI टूल्स, सोशल मीडिया, वीडियो स्ट्रीमिंग और सरकारी प्लेटफॉर्म तक सब कुछ डेटा पर चलता है. लेकिन अभी इस डेटा का बड़ा हिस्सा अमेरिका, यूरोप या सिंगापुर जैसे देशों में बने सर्वर पर स्टोर होता है. 

सरकार चाहती है कि भारतीय यूजर्स और कंपनियों का डेटा भारत में ही बने डेटा सेंटर्स में रहे जिससे डेटा सिक्योरिटी बेहतर हो और देश का कंट्रोल बना रहे.

Advertisement

इसके साथ ही डेटा सेंटर्स भारी निवेश लाते हैं, एक बड़ा डेटा सेंटर हजारों करोड़ का प्रोजेक्ट होता है जिससे पावर, कूलिंग, नेटवर्क, सिक्योरिटी और मेंटेनेंस जैसे सेक्टर में भी काम बढ़ता है.

टैक्स छूट का ऐलान, असल में मतलब क्या है?

बजट में जो सबसे बड़ा ऐलान हुआ है वह यह कि भारत में डेटा सेंटर लगाने वाली कंपनियों को 2047 तक टैक्स में राहत मिल सकती है.

सरकार ने साफ कहा है कि अगर कोई भारतीय या विदेशी कंपनी भारत में डेटा सेंटर बनाती है या अपनी क्लाउड सर्विस के लिए भारतीय डेटा सेंटर का इस्तेमाल करती है तो उसे लंबी अवधि तक इनकम टैक्स और कुछ दूसरे टैक्स में छूट मिलेगी.

इसका सीधा मतलब यह है कि Google, Microsoft, Amazon, Meta जैसी ग्लोबल कंपनियों को अगर भारत में अपना डेटा स्टोर करना है, तो अब उन्हें आर्थिक फायदा भी मिलेगा और सरकार का सपोर्ट भी मिलेगा.

अगर ग्लोबल क्लाउड कंपनियां भारतीय डेटा सेंटर इस्तेमाल करती हैं तो क्या बदलेगा

आज बड़ी क्लाउड कंपनियां अपनी सर्विसेज के लिए विदेशी डेटा सेंटर्स पर निर्भर हैं जिससे भारत में डेटा रखने की लागत ज्यादा होती है. अगर टैक्स छूट के चलते ये कंपनियां भारत में डेटा सेंटर बनाती हैं या भारतीय डेटा सेंटर का इस्तेमाल करती हैं तो उनकी लागत घटेगी और सर्विस सस्ती और तेज हो सकती है.

Advertisement

इससे भारतीय स्टार्टअप्स और कंपनियों को भी फायदा होगा क्योंकि उन्हें लोकल क्लाउड सर्विस सस्ती मिलेगी और डेटा कानूनों को फॉलो करना आसान होगा.

सरकार के नजरिए से देखें तो इसका मतलब है कि भारत सिर्फ यूजर मार्केट नहीं रहेगा बल्कि डेटा होस्ट करने वाला देश भी बनेगा.

भारतीय टेक कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए क्या बदलेगा?

भारतीय IT कंपनियां और स्टार्टअप्स अब तक ज्यादातर विदेशी क्लाउड सर्विस पर निर्भर थीं.अगर देश में बड़े डेटा सेंटर्स बनते हैं तो लोकल कंपनियों को कम खर्च में स्टोरेज, AI कंप्यूटिंग और हाई स्पीड नेटवर्क मिलेगा

इसके साथ ही डेटा सेंटर से जुड़े सेक्टर जैसे साइबर सिक्योरिटी, नेटवर्किंग, पावर मैनेजमेंट और कूलिंग सिस्टम में भी भारतीय कंपनियों के लिए नए मौके खुलेंगे.

भारत को लंबे समय में क्या फायदा हो सकता है?

अगर यह प्लान सही तरीके से लागू होता है तो भारत को तीन बड़े फायदे मिल सकते हैं पहला, हजारों करोड़ का निवेश और बड़ी संख्या में नई नौकरियां.  दूसरा, डिजिटल इंडिया को मजबूत आधार, तीसरा, AI और डेटा के मामले में भारत का ग्लोबल रोल मजबूत होना.

लेकिन चुनौतियां भी सामने हैं

डेटा सेंटर्स बहुत ज्यादा बिजली और पानी इस्तेमाल करते हैं और भारत में पावर सप्लाई और पानी की उपलब्धता कई जगह पहले से चुनौती है. इसके अलावा अलग-अलग राज्यों के नियम, मंजूरी में देरी और डेटा प्राइवेसी से जुड़े सवाल भी कंपनियों के लिए चिंता का कारण बन सकते हैं. यानी विजन बड़ा है लेकिन इसे जमीन पर उतारने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और नीतियों दोनों पर बराबर काम करना होगा. 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement