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लाखों ड्रोन्स एक साथ कंट्रोल करने की तैयारी में थी Anthropic, अमेरिकी सरकार से टूटी डील

वॉर में टेक कैसे यूज हो सकता है इसका उदाहरण मिडिल ईस्ट के महाजंग से साबित हो सकता है. अमेरिका लगातार AI कंपनियों के साथ करार कर रहा है ताकि जंग में AI की मदद ली जा सके. एंथ्रॉपिक ने भी स्वॉर्म ड्रोन का प्रस्ताव दिया था जिसके तहत एक साथ 10 हजार से ज्यादा ड्रोन्स को वॉर में कंट्रोल AI के जरिए किया जा सकता है.

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Anthropic ने अमेरिकी सरकार को दिया था ड्रोन स्वॉर्म का प्रोपोजल
Anthropic ने अमेरिकी सरकार को दिया था ड्रोन स्वॉर्म का प्रोपोजल

एआई की दुनिया में Anthropic और OpenAI के बीच चल रही खींचतान के बीच एक नई जानकारी सामने आई है. जिस कंपनी को अब तक सेफ और जिम्मेदार एआई के तौर पर देखा जा रहा था, उसी Anthropic ने अमेरिकी डिफेंस डिपार्टमेंट के एक बड़े ड्रोन प्रोजेक्ट में हिस्सा लिया था.

रिपोर्ट्स के मुताबिक यह करीब 100 मिलियन डॉलर का ड्रोन स्वॉर्म कॉन्टेस्ट था. मकसद था ऐसा सिस्टम बनाना जो दर्जनों या सैकड़ों ड्रोन को एक साथ कंट्रोल कर सके. Anthropic ने इसमें वॉइस कंट्रोल ड्रोन स्वॉर्म टेक्नोलॉजी का प्रस्ताव रखा. यानी एक इंसान आवाज से पूरे ड्रोन ग्रुप्स को निर्देश दे सके. 

ड्रोन स्वॉर्म (Drone Swarm) क्या है और क्यों अहम है?

आज की जंग ट्रेडिशनल नहीं रही. छोटे, सस्ते लेकिन स्मार्ट ड्रोन वॉर की स्ट्रैटिजी वना और बदल रहे हैं. ड्रोन स्वॉर्म का मतलब है कई ड्रोन एक नेटवर्क की तरह काम करें. वे आपस में डेटा शेयर करें. रियल टाइम में दिशा बदलें. टारगेट पहचानें. और जरूरत पड़ने पर मिशन पूरा करें.

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यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका, चीन और कई अन्य देश स्वॉर्म टेक्नोलॉजी पर तेजी से काम कर रहे हैं. यह कम लागत में ज्यादा असर डालने वाला सिस्टम माना जाता है. अगर एआई इन ड्रोन को तुरंत निर्णय लेने की क्षमता दे, तो यह ट्रेडिशनल रक्षा सिस्टम को चुनौती दे सकता है.

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Anthropic का प्रस्ताव क्यों अहम है?

Anthropic खुद को एआई सेफ्टी पर फोकस करने वाली कंपनी बताता है. Claude मॉडल को ज्यादा कंट्रोल और सीमाओं के साथ डिजाइन किया गया है. ऐसे में ड्रोन स्वॉर्म जैसे सैन्य प्रोजेक्ट में हिस्सा लेना बताता है कि कंपनी पूरी तरह डिफेंस स्पेस से बाहर नहीं है. वॉयस कंट्रोल सिस्टम का मतलब है कि मानव कमांड के साथ स्वॉर्म को निर्देश दिए जा सकें.

यह पूरी तरह ऑटोमैटिक हथियार प्रणाली से अलग मॉडल है. यहां इंसान नियंत्रण में रहता है और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस असिस्टेंट की तरह काम करता है. संभव है कि Anthropic इसी लिमिडेट रोल के तहत पिच कर रहा हो.

चयन क्यों नहीं हुआ?

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ Anthropic का प्रस्ताव चुना नहीं गया. लेकिन असली बात चयन की नहीं है. असली बात यह है कि AI कंपनियां अब डिफेंस टेक के सेंटर में आ चुकी हैं. पहले टेक कंपनियां सोशल मीडिया और सर्च इंजन तक सीमित थीं. लेकिन अब वो वॉर स्ट्रैटिजी, स्वॉर्म कंट्रोल और ऑटोनॉमस सिस्टम का डायरेक्शन डिसाइड कर रही हैं जो बड़ी बात है. 

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पेंटागन विवाद के नया मोड़

हाल ही में खबर आई थी कि Claude मॉडल को पेंटागन सिस्टम से ब्लैकलिस्ट किया गया था. एथिक्स और कंप्लायंस को लेकर मतभेद की बात सामने आई थी. उसके बाद OpenAI ने डिफेंस डिपार्टमेंट के साथ पार्टनरशिप की है. ऐसे माहौल में Anthropic का ड्रोन कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेना यह दिखाता है कि मामला पूरी तरह सरकार बनाम एथिक्स का नहीं है. यह ज्यादा जटिल है. कंपनियां कुछ इस्तेमाल से दूरी बना सकती हैं, लेकिन पूरी डिफेंस टेक्नोलॉजी से नहीं.

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एआई और वॉर का बदलता चेहरा

चीन जमीन पर रोबोटिक फाइटिंग सिस्टम टेस्ट कर रहा है. अमेरिका स्वॉर्म बेस्ड ड्रोन रणनीति पर काम कर रहा है. अगर भविष्य में जमीन पर युद्ध होता है, तो स्वॉर्म टेक्नोलॉजी और एआई कंट्रोल सिस्टम बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. इससे सैनिकों का जोखिम कम होगा और निर्णय लेने की स्पीड बढ़ेगी. इतना ही नहीं, इससे ऑपरेशन ज्यादा ऑटोमैटिक और सटीक हो सकते हैं. 

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