भारतीय हॉकी टीम के दिग्गज गोलकीपर और ओलंपिक पदक विजेता पीआर श्रीजेश (PR Sreejesh) ने हॉकी इंडिया पर बड़ा हमला बोला है. भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम के हेड कोच पद से हटाए जाने के बाद श्रीजेश ने सोशल मीडिया पर लंबा पोस्ट लिखकर दावा किया कि उन्हें खराब प्रदर्शन की वजह से नहीं, बल्कि विदेशी कोच को जगह देने के लिए हटाया गया है.
श्रीजेश का यह बयान भारतीय हॉकी में विदेशी कोचों को लगातार प्राथमिकता दिए जाने को लेकर नई बहस छेड़ सकता है. खास बात यह है कि उनके कार्यकाल में जूनियर टीम का प्रदर्शन शानदार रहा था और टीम ने खेले गए सभी टूर्नामेंट में पोडियम फिनिश हासिल की थी.
श्रीजेश ने अपने पोस्ट में लिखा- ऐसा लगता है कि मेरा कोचिंग करियर सिर्फ 1.5 साल में खत्म हो गया. इस दौरान हमने 5 टूर्नामेंट खेले और पांचों में पोडियम फिनिश हासिल की, जिसमें जूनियर वर्ल्ड कप ब्रॉन्ज मेडल भी शामिल है.
उन्होंने आगे कहा- मैंने खराब प्रदर्शन के बाद कोचों को हटाए जाने की बातें सुनी थीं, लेकिन पहली बार ऐसा देख रहा हूं कि विदेशी कोच को जगह देने के लिए हटाया जा रहा है.
It’s seems like My coaching career comes to an end after 1.5 years, during which we played 5 tournaments and secured 5 podium finishes, including a Junior World Cup bronze medal.
— sreejesh p r (@16Sreejesh) May 13, 2026
I have heard about coaches getting fired after bad performances.
But this is the first time I am…
हॉकी इंडिया पर लगाए गंभीर आरोप
पूर्व भारतीय गोलकीपर ने दावा किया कि हॉकी इंडिया के शीर्ष अधिकारियों ने उन्हें बताया कि सीनियर पुरुष टीम के मुख्य कोच जूनियर टीम में भी विदेशी कोच चाहते हैं, ताकि जूनियर से लेकर सीनियर स्तर तक एक जैसी प्रणाली विकसित की जा सके.
श्रीजेश ने कहा- हॉकी इंडिया अध्यक्ष ने कहा कि सीनियर टीम के मुख्य कोच जूनियर टीम के लिए विदेशी हेड कोच चाहते हैं. उनका मानना है कि इससे भारतीय हॉकी को जूनियर स्तर से सीनियर स्तर तक बेहतर तरीके से विकसित किया जा सकेगा.
यहीं पर श्रीजेश ने सबसे बड़ा सवाल दागा. उन्होंने पूछा- क्या भारतीय कोच भारतीय हॉकी को विकसित नहीं कर सकते?
शानदार रहा श्रीजेश का कोचिंग कार्यकाल
श्रीजेश का कार्यकाल भले छोटा रहा हो, लेकिन उपलब्धियां काफी बड़ी थीं. उनके नेतृत्व में भारतीय जूनियर टीम ने लगातार दमदार प्रदर्शन किया.
उनके कार्यकाल जूनियर एशिया कप में गोल्ड मेडल, सुल्तान ऑफ जोहोर कप में ब्रॉन्ज, FIH जूनियर पुरुष वर्ल्ड कप में ब्रॉन्ज मेडल जीता है.
खेले गए सभी 5 टूर्नामेंट में पोडियम फिनिश
भारतीय हॉकी से जुड़े कई लोगों का मानना था कि हाल ही में इंटरनेशनल हॉकी से रिटायर हुए श्रीजेश युवा खिलाड़ियों से बेहतर जुड़ाव रखते थे और भविष्य में भारतीय कोचिंग सेटअप का बड़ा चेहरा बन सकते थे.
खेलमंत्री का भी किया जिक्र
श्रीजेश ने अपने पोस्ट में केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मंडाविया का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि 7 मार्च 2026 को हुई बैठक में खेल मंत्री ने उन्हें भारत के 2036 ओलंपिक विजन के लिए आगे बढ़कर कोचिंग की जिम्मेदारी लेने के लिए प्रेरित किया था.
उन्होंने लिखा- 7 मार्च 2026 को खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने मुझसे कहा था कि 2036 की तैयारी के लिए देश को आप जैसे कोचों की जरूरत है. हालांकि, इसके बाद उन्होंने हॉकी इंडिया पर फिर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय कोचों की बजाय विदेशी कोचों पर ज्यादा भरोसा किया जा रहा है.
भारतीय हॉकी में फिर छिड़ी पुरानी बहस
श्रीजेश के इस बयान के बाद भारतीय हॉकी में एक पुरानी बहस फिर तेज हो गई है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या देश के पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों को पर्याप्त मौके नहीं मिल रहे? भारतीय हॉकी टीम पिछले कई सालों में विदेशी कोचों के साथ काम करती रही है. लेकिन श्रीजेश जैसे सफल और सम्मानित पूर्व खिलाड़ी का इस तरह खुलकर सामने आना हॉकी इंडिया के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है.
भारतीय हॉकी इतिहास के सबसे महान गोलकीपर्स में गिने जाने वाले पीआर श्रीजेश ने भारत को कई ऐतिहासिक जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी. रिटायरमेंट के बाद उनका कोचिंग में आना भारतीय हॉकी के भविष्य के लिए बड़ी उम्मीद माना जा रहा था. ऐसे में उनका अचानक हटना और विदेशी कोचों को लेकर लगाए गए आरोप अब बड़े विवाद का रूप ले सकते हैं.