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बेजोड़, बेमिसाल हैं विराट... फाइनल में हालात पढ़े, जोखिम घटाया और ट्रॉफी ले गए

विराट कोहली को क्रिकेट का 'चेज मास्टर' कहा जाता है और आईपीएल के फाइनल मुकाबले में उन्होंने यह साबित भी कर दिया. गुजरात टाइटन्स के खिलाफ लक्ष्य भले ही छोटा था, लेकिन उसे हासिल करने के लिए जिस धैर्य और जज्बे की जरूरत थी, कोहली ने मैदान पर उसका बखूबी प्रदर्शन करके दिखाया है.

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विराट के शानदार प्रदर्शन ने RCB को दूसरा आईपीएल खिताब जिताया
विराट के शानदार प्रदर्शन ने RCB को दूसरा आईपीएल खिताब जिताया

मंच बड़ा था, मैदान बड़ा था और मुकाबला उससे कहीं ज्यादा बड़ा. लेकिन सामने खड़े खिलाड़ी का कद भी कम बड़ा नहीं था. नाम है विराट कोहली. रविवार को गुजरात टाइटन्स के खिलाफ IPL फाइनल में कोहली की 75 रनों की नाबाद पारी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अनुभव बोलता है. कोहली ने 178 के स्ट्राइक रेट से अर्धशतकीय पारी खेली, जिसमें नौ चौके और तीन छक्के शामिल थे. विराट ने अपने IPL करियर का सबसे तेज पचासा (25 गेंद) भी इसी पारी में जड़ा, मतलब कि सबसे बेहतर को इस खास मौके के लिए बचाकर रखा था.

विराट की दमदार पारी की बदौलत रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने लगातार दूसरी बार IPL का खिताब अपने नाम किया. CSK और MI के बाद आरसीबी ऐसा करने वाली तीसरी टीम बन गई है. कोहली को इस बेजोड़ पारी के लिए 'प्लेयर ऑफ द मैच' से नवाजा गया.  लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि मैदान पर आक्रामकता दिखाने वाले कोहली जब छोटे से लक्ष्य का पीछा करने उतरे तो उन्होंने मैदान पर अपार धैर्य का परिचय दिया.

समझदारी से किया लक्ष्य का पीछा

यह पारी वैभव सूर्यवंशी के 200-300 के स्ट्राइक रेट जैसी नहीं थी, जिसमें हवाई शॉट्स की बौछार हो और गेंदबाजों में हाहाकार हो. लेकिन इस पारी में कोहली ने गजब की टैक्निक और जज्बा दिखाया. गुजरात के 156 रनों का पीछा करने उतरे कोहली ने पावरप्ले का पूरा इस्तेमाल किया और शुरुआत में ओपनर वेंकटेश अय्यर के साथ मिलकर तेजी से रन जोड़े. लेकिन फिर मिडिल ऑर्डर में देवदत्त पडिक्कल, कप्तान रजत पाटीदार, क्रुणाल पंड्या के विकेट जल्दी गिरते ही अपनी बैटिंग का गियर भी बदल लिया.

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कोहली ने पूरे रनचेज के दौरान एक छोर को मजबूती से संभाले रखा. बीच में एक मौका आया, जब गुजरात के कप्तान शुभमन गिल ने उनका कैच लपका, लेकिन गेंद जमीन को छू गई थी. आखिरकार छक्का जड़कर विराट ने अपनी टीम को जीत दिलाई और लक्ष्य को 18 ओवरों में ही हासिल कर लिया. फाइनल के हाई प्रेशर मैच में यह छोटा लक्ष्य भी मुश्किल हो सकता था, अगर मैदान पर कोहली जैसा बड़ा प्लेयर नहीं होता.

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ट्रॉफी जीतने के बाद RCB के हेड कोच एंडी फ्लावर के साथ किंग कोहली (Photo: PTI)

आईपीएल 2026 की बात करें तो साल 2016 के बाद रनों के लिहाज से यह कोहली के लिए तीसरा सबसे बेहतरीन सीजन रहा. इस बार उन्होंने 56 की औसत से 675 रन बनाए. जबकि पिछले चार सीजन से वह लगातार 600 प्लस स्कोर कर रहे हैं. साल 2016 के आईपीएल सीजन में उन्होंने बल्ले से आग उगली थी और 81 की औसत से 973 रन बनाए थे, जिसमें चार शतक भी शामिल थे. हालांकि तब RCB को सनराइजर्स हैदराबाद ने फाइनल में आठ रनों से फाइलन में शिकस्त दी थी. लेकिन पिछले दो सीजन से कोहली का बल्ला भी चला और आरसीबी को विजेता बनाने में भी उनकी सबसे बड़ी भूमिका रही.

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पावर हिटिंग नहीं, टेक्निक का खेल

कोहली के व्यक्तिगत प्रदर्शन से इतर उनकी टीम का लगातार दो टाइटल जीतना इस सफलता की कहानी को आगे बढ़ाता है. पहले आरसीबी ने 18 सीजन तक अपना पहला खिताब जीतने का इंतजार किया. हालांकि फिर उसे बचाए रखना और भी मुश्किल था. लेकिन कोहली जैसे बेमिसाल खिलाड़ी की बदौलत आरसीबी इतिहास रचने में कामयाब रही. और अब आईपीएल की सबसे फेवरेट टीम बन चुकी है.

विराट की मौजूदा फॉर्म और फाइनल में उनके प्रदर्शन की सराहना करते हुए उनके पूर्व कोच राजकुमार शर्मा ने कहा कि विराट युवाओं के लिए एक प्रेरणा है. कोहली की पारी से युवाओं को सीखना चाहिए कि क्रिकेट सिर्फ पावर हिटिंग और चौके-छक्के का खेल नहीं है, बल्कि अगर आप अच्छी टैक्निक के साथ बल्लेबाजी करते हैं तो बड़े स्कोर बना सकते हैं. विराट ने भी आईपीएल फाइलन में वही किया है. 

खास बात यह है कि आईपीएल में कोहली की फॉर्म शानदार रही. अब घरेलू वनडे सीरीज में अफगानिस्तान के खिलाफ कोहली के बल्ले से कुछ दमदार पारियां देखने को मिलेंगी. सैंतीस साल की उम्र पार कर चुके कोहली अपनी फिटनेस और जज्बे से किसी भी टीम को पस्त करने की हिम्मत रखते हैं. इसी वजह से उन्हें क्रिकेट इतिहास के महानतम खिलाड़ियों की फेहरिस्त में टॉप पर गिना जाता है.

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