भारतीय क्रिकेट टीम के लिए आयरलैंड और इंग्लिश दौरा काफी निराशाजनक रहा है. पहले आयरलैंड दौरे पर टीम इंडिया ने 0-2 से टी20 सीरीज गंवा दी. फिर इंग्लैंड टूर पर भी भारतीय टीम आसानी से टी20 सीरीज गंवा बैठी. दोनों ही टीमों ने श्रेयस अय्यर ब्रिगेड की कमजोरियों का पूरा फायदा उठाया. खराब प्रदर्शन के लिए खिलाड़ी निशाने पर हैं, लेकिन इस सबके बीच भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) की प्लानिंग पर भी सवाल उठने चाहिए.
आईपीएल (इंडियन प्रीमियर लीग) 2026 का फाइनल 31 मई को खेला गया था. इसके बाद भारतीय टीम को यूरोप की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के लिए तैयार होने का मौका मिल सकता था, लेकिन बोर्ड का शेड्यूल कुछ और था. भारत ने अफगानिस्तान के खिलाफ एक टेस्ट और तीन वनडे इंटरनेशनल मुकाबले खेले, जबकि इंडिया-ए ने श्रीलंका में 50 ओवरों के फॉर्मेट वाली ट्राई सीरीज में हिस्सा लिया.
ODI के जरिए टी20 सीरीज की तैयारी
तिलक वर्मा और वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ी श्रीलंका में वनडे क्रिकेट खेलने के बाद टी20 सीरीज के लिए यूरोप पहुंचे. भारत से बिल्कुल अलग मौसम, पिच और परिस्थितियों में उतरने से पहले खिलाड़ियों को खुद को ढालने का पर्याप्त मौका नहीं मिला. सवाल यही है कि एक अहम दौरे से पहले टेस्ट और 50 ओवरों की सीरीज को प्राथमिकता देना कितना सही फैसला था?
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अचानक कप्तानी सौंपना कहां तक सही?
यूरोप दौरे से पहले चयनकर्ताओं ने बड़ा बदलाव करते हुए सूर्यकुमार यादव की जगह श्रेयस अय्यर को टी20 टीम की कमान सौंपी. अय्यर दिसंबर 2023 के बाद से भारत के लिए टी20 इंटरनेशनल नहीं खेले थे और लंबे समय बाद इस फॉर्मेट में वापसी कर रहे थे. ऐसे में नए कप्तान को खिलाड़ियों के साथ समय बिताने और अपनी रणनीति तैयार करने की जरूरत थी. हालांकि व्यस्त शेड्यूल के कारण ऐसा नहीं हो सका. टीम पहले मुकाबले से कुछ दिन पहले आयरलैंड पहुंची और सीधे मैदान पर उतर गई. एक नए कप्तान, बदले हुए टीम कॉम्बिनेशन और मुश्किल विदेशी परिस्थितियों का असर भारत के प्रदर्शन पर साफ दिखाई दिया.
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बुमराह और हार्दिक का बैकअप प्लान क्या?
भारत को इस दौरे पर जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पंड्या की कमी भी खली. दोनों टी20 क्रिकेट में टीम के सबसे अहम खिलाड़ियों में शामिल हैं. बुमराह की गैरमौजूदगी में टीम के पास मुश्किल परिस्थितियों में गेंदबाजी करने वाला अनुभवी चेहरा नहीं था. वहीं हार्दिक के नहीं होने से टीम का संतुलन प्रभावित हुआ. प्रसिद्ध कृष्णा, प्रिंस यादव और हर्षित राणा जैसे गेंदबाजों के लिए पहली बार बड़ी जिम्मेदारी निभाना आसान नहीं रहा.
सिर्फ आक्रामक बैटिंग काफी नहीं
इस दौरे ने 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को इंटरनेशनल क्रिकेट की असली चुनौती से भी रूबरू कराया. आईपीएल में गेंदबाजों की धुनाई कर सुर्खियां बटोरने वाले वैभव से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन इंग्लैंड की परिस्थितियों ने बता दिया कि इंटरनेशनल स्तर पर सफलता के लिए सिर्फ आक्रामक बल्लेबाजी काफी नहीं है. वैभव के पास प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें अलग-अलग परिस्थितियों और फॉर्मेट में अपने खेल को निखारने की जरूरत होगी.
आयरलैंड और इंग्लैंड में लगातार संघर्ष करना टीम इंडिया के लिए बड़ा झटका है. बल्लेबाजों ने अहम मौकों पर निराश किया, गेंदबाज दबाव नहीं बना सके और फील्डिंग में भी गलतियां हुईं. इन कमियों की जिम्मेदारी खिलाड़ियों को लेनी होगी. हालांकि पूरे दौरे को सिर्फ मैदान पर हुए खराब प्रदर्शन तक सीमित नहीं किया जा सकता. गलत समय पर सीरीज का आयोजन, नए कप्तान को तैयारी का मौका नहीं मिलना और प्रमुख खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी जैसे फैसलों ने मुश्किलें बढ़ाईं.