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मिडिल ओवर्स का सबसे खतरनाक बल्लेबाज! क्या टीम इंडिया ने रजत पाटीदार को हल्के में लिया?

रजत पाटीदार ने गुजरात टाइटन्स के खिलाफ क्वालिफायर-1 में नाबाद 93 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर सिर्फ आरसीबी को फाइनल में नहीं पहुंचाया, बल्कि अपनी खास बल्लेबाजी कला का भी प्रदर्शन किया. गेंद की लेंथ को जल्दी पढ़ने की उनकी क्षमता उन्हें बाकी बल्लेबाजों से अलग बनाती है. यही वजह है कि वह मिडिल ओवर्स में भी पावरप्ले जैसी आक्रामक बल्लेबाजी कर सकते हैं. यह पारी एक बार फिर इस बहस को हवा देती है कि भारतीय क्रिकेट ने अब तक पाटीदार की प्रतिभा का पूरा इस्तेमाल किया है या नहीं.

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33 गेंद, 93 रन और चयनकर्ताओं से सवाल... (Photo, PTI)
33 गेंद, 93 रन और चयनकर्ताओं से सवाल... (Photo, PTI)

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने गुजरात टाइटन् (GT) को 92 रनों से रौंदकर आईपीएल 2026 के फाइनल में जगह बना ली, लेकिन इस जीत की सबसे बड़ी कहानी कप्तान रजत पाटीदार की विस्फोटक बल्लेबाजी रही. पाटीदार ने सिर्फ 33 गेंदों में नाबाद 93 रन ठोकते हुए मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया, 9 छक्कों और 5 चौकों से सजी उनकी पारी सिर्फ आक्रामक बल्लेबाजी का प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि उस खास हुनर की झलक भी थी, जो उन्हें बाकी बल्लेबाजों से अलग बनाता है- गेंद की लेंथ को बेहद जल्दी पढ़ लेने की क्षमता.

32 साल के रजत पाटीदार की प्रतिभा का भारतीय क्रिकेट में अभी तक उतना इस्तेमाल नहीं हुआ है, जितना होना चाहिए था. उनकी खासियत सिर्फ बड़े शॉट लगाना नहीं, बल्कि गेंद की लेंथ को बहुत जल्दी पढ़ लेना है. यही वजह है कि अच्छे से अच्छे गेंदबाज की अच्छी गेंद भी उनके सामने साधारण नजर आने लगती है. गुजरात टाइटन्स के खिलाफ क्वालिफायर-1 में खेली गई पारी इस हुनर का बेहतरीन उदाहरण थी.

आईपीएल 2026 छक्कों का सीजन रहा है. टूर्नामेंट में छक्कों के रिकॉर्ड टूट रहे हैं और लगभग हर मैच में गेंद दर्शकों के बीच पहुंच रही है. ऐसे समय में किसी एक शॉट का अलग पहचान बना लेना आसान नहीं होता. लेकिन धर्मशाला में कगिसो रबाडा की गेंद पर पाटीदार ने जो छक्का लगाया, वह सिर्फ एक शॉट नहीं था, बल्कि उनकी बल्लेबाजी का सार था.

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ऑफ स्टंप के बाहर गुड लेंथ गेंद. अधिकांश बल्लेबाज उसे कवर के रास्ते चौके के लिए खेलते. पाटीदार ने लगभग बिना अतिरिक्त ताकत लगाए, सिर्फ बैलेंस, टाइमिंग और हाथों की गति के दम पर गेंद को कवर के ऊपर से स्टैंड में पहुंचा दिया. विराट कोहली की प्रतिक्रिया बता रही थी कि उन्होंने भी कुछ असाधारण देखा है.

असल में पाटीदार की बल्लेबाजी की खूबसूरती यहीं छिपी है. वह गेंद को दूसरों से पहले पढ़ लेते हैं. बल्लेबाजी में अक्सर कहा जाता है कि महान खिलाड़ियों के पास दूसरों की तुलना में ज्यादा समय होता है. हकीकत में समय सबके पास बराबर होता है, फर्क सिर्फ इतना है कि कुछ खिलाड़ी गेंद की लेंथ और गति को इतनी जल्दी पहचान लेते हैं कि उन्हें निर्णय लेने के लिए अतिरिक्त क्षण मिल जाता है. पाटीदार उसी श्रेणी के बल्लेबाज हैं.

यही कारण है कि उनके कई बड़े शॉट ताकत के नहीं, टाइमिंग के शॉट लगते हैं. देखने वाले को लगता है कि उन्होंने विशेष प्रयास नहीं किया, लेकिन गेंद स्टैंड में पहुंच चुकी होती है. धर्मशाला में रबाडा के खिलाफ लगाया गया छक्का इसी कला का सबसे सुंदर उदाहरण था.

दिलचस्प बात यह है कि उनकी यह पारी शुरुआत से इतनी सहज नहीं थी. धर्मशाला की पिच में दरारें थीं, उछाल असमान था और गेंद कभी रुककर तो कभी फिसलकर आ रही थी. पावरप्ले के बाद आरसीबी की रनगति भी धीमी पड़ गई थी. सातवें से 13वें ओवर के बीच बल्लेबाजों को खुलकर खेलने में मुश्किल हो रही थी.

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पाटीदार भी संघर्ष कर रहे थे. 14वें ओवर में उन्होंने गुजरात टाइटन्स को दो मौके दिए. एक बार गेंद हवा में गई और दूसरी बार डीप स्क्वायर लेग पर कैच का मौका बना. उस समय तक उनकी पारी में लय कम और संघर्ष ज्यादा दिखाई दे रहा था. लेकिन बड़े बल्लेबाजों की पहचान यही होती है कि वे खराब शुरुआत को भी मैच बदलने वाली पारी में बदल देते हैं.

जैसे ही पाटीदार ने परिस्थितियों को पूरी तरह समझा, उन्होंने गियर बदल दिया. अगले कुछ ओवरों में उन्होंने गुजरात के गेंदबाजों पर ऐसा हमला बोला कि मैच का संतुलन पूरी तरह आरसीबी की तरफ झुक गया. उन्होंने सिर्फ रन नहीं बनाए, बल्कि मैच की गति बदल दी.

यहीं से एक बड़ा सवाल पैदा होता है- क्या भारतीय क्रिकेट ने उनकी प्रतिभा का पूरा इस्तेमाल किया है?

2024 में आखिरी बार भारत के लिए खेलने वाले मध्य प्रदेश के रजत पाटीदार का अंतरराष्ट्रीय करियर अब तक सिर्फ तीन टेस्ट और एक वनडे तक सीमित रहा है. इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में उन्हें मौका मिला, जबकि दिसंबर 2023 में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना एकमात्र वनडे खेला था. तब से वह टीम इंडिया से बाहर हैं, जबकि घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में लगातार अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं का ध्यान खींचते रहे हैं.

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टीम इंडिया पिछले कुछ वर्षों से मिडिल ओवर्स में आक्रामक बल्लेबाजी करने वाले खिलाड़ियों की तलाश में रही है. ऐसे बल्लेबाज जो स्पिन और तेज गेंदबाजी दोनों के खिलाफ तुरंत दबाव बना सकें. पाटीदार का खेल इसी भूमिका के लिए बना हुआ दिखता है. वह उन खिलाड़ियों में नहीं हैं जो 40 गेंद खेलकर सेट होते हैं. वह मैच में आते हैं और कुछ ही मिनटों में गेंदबाजों की योजनाएं बदलने पर मजबूर कर देते हैं.

टी20 क्रिकेट में सबसे कठिन काम पावरप्ले के बाद रनरेट को ऊंचा बनाए रखना होता है. फील्ड फैल जाती है, बाउंड्री के विकल्प कम हो जाते हैं और गेंदबाजों को अधिक सुरक्षा मिल जाती है. लेकिनपाटीदार की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि वह पावरप्ले की आक्रामकता को मिडिल ओवर्स तक खींच ले जाते हैं. यही गुण उन्हें आधुनिक टी20 क्रिकेट के लिए बेहद मूल्यवान बनाता है.

भारतीय क्रिकेट ने हमेशा तकनीकी रूप से मजबूत बल्लेबाज पैदा किए हैं. लेकिन आज के टी20 दौर में मैच का रुख बदलने वाले बल्लेबाजों की अहमियत कहीं अधिक है. पाटीदार उसी श्रेणी में आते हैं. उनकी बल्लेबाजी में जोखिम है, लेकिन वही जोखिम विपक्षी टीम के लिए सबसे बड़ा खतरा भी बनता है.

धर्मशाला में खेली गई पारी सिर्फ एक शानदार आईपीएल पारी नहीं थी. यह उस खिलाड़ी की घोषणा थी जो लंबे समय से अपनी क्षमता दिखा रहा है और बार-बार यह याद दिला रहा है कि उसके पास सिर्फ बड़े शॉट नहीं, बल्कि खेल को समझने की दुर्लभ क्षमता भी है.

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क्योंकि आखिरकार रजत पाटीदार की सबसे बड़ी ताकत उनके छक्के नहीं हैं. उनकी सबसे बड़ी ताकत वह अतिरिक्त आधा सेकंड है, जो उन्हें गेंद की लेंथ दूसरों से पहले पढ़ लेने की वजह से मिलता है. और टी20 क्रिकेट में यही आधा सेकंड अक्सर मैच और टूर्नामेंट का अंतर तय कर देता है.

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