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तेल संकट तो बहाना है! पाकिस्तान को सता रहा है तालिबान के हमले का डर, 2 शहरों में सिमटा PSL

पाकिस्तान सुपर लीग का आगामी सीजन बिना दर्शकों के केवल दो वेन्यू में आयोजित होगा. मोहसिन नकवी ने इसके पीछे तेल-गैस संकट और क्षेत्रीय हालात को वजह बताया है, लेकिन असली चिंता सुरक्षा को लेकर है. बढ़ते तनाव और संभावित हमलों के खतरे के चलते पीसीबी को ऐसा फैसला लेने पर मजबूर होना पड़ा.

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पाकिस्तान सुपर लीग मुश्किलों में घिर गई है. (Photo: Getty)
पाकिस्तान सुपर लीग मुश्किलों में घिर गई है. (Photo: Getty)

पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) 2026 को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है. 26 मार्च से शुरू होने वाले इस टूर्नामेंट को अब सिर्फ दो शहरों लाहौर और कराची तक सीमित कर दिया गया है. इसके साथ ही पीएसएल की ओपनिंग सेरेमनी भी रद्द कर दी गई है और मुकाबले बिना दर्शकों के आयोजित होंगे. इस फैसले की जानकारी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन मोहसिन नकवी ने दी, जिन्होंने इसके पीछे तेल-गैस संकट और क्षेत्रीय हालात को वजह बताया.

अब इस फैसले के पीछे की असली कहानी कुछ और ही है. खुफिया एजेंसी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पीएसएल को सीमित करने की असली वजह कुछ और है. पाकिस्तान को अफगानिस्तान-तालिबान के संभावित हमलों का खौफ सता रहा है. सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तान पर इस समय सीमा पार से बड़े हमले हो सकते हैं और इसी वजह से पीएसएल को सीमित किया गया है.

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पाकिस्तान और तालिबान के बीच ईद के चलते सीजफायर का ऐलान किया गया था. यह सीजफायर 23/24 मार्च की मध्यरात्रि को खत्म हो रहा है. इसके बाद दोनों पक्षों के फिर आमने-सामने आने की आशंका जताई जा रही है. हाल के दिनों में दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ा है और हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं. अफगानिस्तान ने सीजफायर का ऐलान करते हुए कहा था कि अगर पाकिस्तान की तरफ से कोई हमला होता है तो उसे सीजफायर का उल्लंघन माना जाएगा.

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काबुल के अस्पताल पर हुआ था हमला
तालिबान सरकार के प्रवक्ता ने दावा किया था कि पाकिस्तान सीजफायर के ऐलान के बाद भी अफगानिस्तान पर लगातार हमले कर रहा है, रविवार (22 मार्च) को भी PAK आर्मी ने हमला किया था. बीते दिनों जिस तरह से काबुल में अस्पताल पर पाकिस्तान ने एयर स्ट्राइक किया और 400 लोगों को मारा, उसके चलते अफगानी जनता और तालिबान की सरकार बेहद गुस्से में है. अफगानिस्तान की जनता अब बदले की कार्रवाई चाहती है. 

तालिबान फोर्सेज ने बीते दिनों पाकिस्तान के इस्लामाबाद, क्वेटा और रावलपिंडी जैसे शहरों को निशाना बनाया था और दावा किया था कि ड्रोन हमले में PAK आर्मी के कई अहम ठिकाने पर तबाह किए गए. इन घटनाओं ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं और यह चिंता बढ़ाई है कि बड़े आयोजनों के दौरान जोखिम और बढ़ सकता है.

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मतलब साफ है तालिबान फोर्सेज का ड्रोन पाकिस्तान के एयरडिफेंस सिस्टम के चक्रव्यूह को भेद कर पाकिस्तान के मुख्य शहरों में दाखिल होने में कामयाब रहा है, ऐसे में अगर पीएसएल के दौरान विदेशी क्रिकेटरों की मौजूदगी में कोई हमला हुआ तो पाकिस्तान की ना सिर्फ किरकिरी होगी, बल्कि पाकिस्तान क्रिकेट भी ट्रैक से उतर सकता है. पीएसएल के मैच बिना दर्शकों के कराने के फैसले को भी इसी सुरक्षा खतरे से जोड़कर देखा जा रहा है.

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दर्शकों पर फिदायीन हमले का खतरा है?
सूत्रों के मुताबिक, आशंका है कि अगर बड़ी भीड़ जुटती है तो किसी भी तरह का हमला ज्यादा बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसे में दर्शकों की एंट्री रोकना एक एहतियाती कदम माना जा रहा है. ये बात किसी से छिपी नहीं है कि तालिबान के लड़ाकों में बड़े पैमाने पर फिदायीन हमलावर हैं, जो आए दिन पाकिस्तान के शहरों को निशाना बनाते रहे हैं. अगर पीएसएल के दौरान दर्शकों की आड़ में कोई फिदायीन हमलावर स्टेडियम में दाखिल हुआ और धमाका करने में कामयाब रहा तो बड़ी फजीहत हो सकती है

भले ही मोहसिन नकवी पीएसएल को 2 स्टेडियम तक सीमित रखने और दर्शकों की गैर मौजूदगी में मुकाबले कराने के पीछे वजह ईरान युद्ध और गैस तेल की कमी बता रहे हों, लेकिन हकीकत ये है पाकिस्तान फिलहाल अपने मुल्क में शिया समुदा के गुस्से, अफगानिस्तान तालिबान के हमले और बलूची विद्रोहियों के लगातार हो रहे हमलों से डरा, सहमा और खुद घिरा हुआ मान रहा है.

पीएसएल 2026 अब सिर्फ एक क्रिकेट टूर्नामेंट नहीं रह गया है, बल्कि सुरक्षा, राजनीति और क्षेत्रीय तनाव के बीच घिरा एक बड़ा इवेंट बन चुका है. भले ही आधिकारिक तौर पर तेल संकट को वजह बताया जा रहा हो, लेकिन सूत्रों के दावों ने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है. अब देखना होगा कि इन हालात के बीच पीएसएल सुरक्षित तरीके से पूरा हो पाता है या नहीं.

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