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अकेले वैभव सूर्यवंशी का डेब्यू न होना ही थोड़े न जिम्मेदार है, आयरलैंड में भारत की हार के पीछे छिपे हैं ये 6 बड़े सच

वैभव सूर्यवंशी का डेब्यू चर्चा का विषय हो सकता है, लेकिन भारत की हार की असली वजह नहीं. आयरलैंड के खिलाफ मिली हार ने साफ कर दिया कि भारतीय टी20 टीम की परेशानियां एक खिलाड़ी से कहीं बड़ी हैं. चयन से लेकर बल्लेबाजी, गेंदबाजी और रणनीति तक, जानिए वे 6 सवाल जिनका जवाब भारत को जल्द खोजना होगा.

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आयरलैंड ने नहीं, भारत की अपनी कमियों ने हराया... (Photo: ITG)
आयरलैंड ने नहीं, भारत की अपनी कमियों ने हराया... (Photo: ITG)

15 साल के वैभव सूर्यवंशी का डेब्यू नहीं हुआ. सोशल मीडिया पर यही सबसे बड़ा मुद्दा बन गया. सवाल भी जायज है. जिस खिलाड़ी ने घरेलू और जूनियर क्रिकेट में रिकॉर्डों की बारिश कर दी हो, उसके लिए इंतजार क्यों? लेकिन क्या सचमुच भारत सिर्फ इसलिए आयरलैंड से हार गया क्योंकि वैभव को मौका नहीं मिला? जवाब है- नहीं.

अगर पूरी हार का दोष सिर्फ एक चयन पर डाल दिया जाए, तो हम उस बड़ी तस्वीर को देखने से चूक जाएंगे, जिसे आयरलैंड ने दो मैचों में पूरी दुनिया के सामने रख दिया. यह हार कोई दुर्घटना नहीं है. यह उन कमजोरियों का विस्तार है, जो टी20 विश्व कप में अमेरिका, नामीबिया और नीदरलैंड्स जैसी टीमों के खिलाफ भी कई बार दिखी थीं. तब भारत बच गया, इस बार नहीं बच सका.

भारत की हार के पीछे सिर्फ एक नहीं, कई वजहें हैं.

1. टीम का कॉम्बिनेशन तय ही नहीं, तो जीत कैसे तय होगी?

सीरीज शुरू होने से पहले ही सबसे बड़ी चर्चा प्लेइंग-11 को लेकर थी. कौन खेलेगा? कौन बाहर बैठेगा? कप्तान सूर्यकुमार यादव की भूमिका क्या होगी? वैभव को मौका मिलेगा या नहीं?

जब टीम खुद अपनी सर्वश्रेष्ठ एकादश तय नहीं कर पा रही हो, तो मैदान पर उसका असर दिखना तय है. लगातार प्रयोग भविष्य के लिए अच्छे हो सकते हैं, लेकिन हर सीरीज को प्रयोगशाला बना देना भी जोखिम है.

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2. शुरुआत फिर बिगड़ी, पूरी पारी बिखर गई

टी20 क्रिकेट में पहले छह ओवर मैच की दिशा तय करते हैं. लेकिन भारत के सलामी बल्लेबाज लगातार वह शुरुआत नहीं दे सके, जिसकी जरूरत थी.

नतीजा यह हुआ कि मिडिल ऑर्डर दबाव में उतरा और आक्रामक क्रिकेट की जगह विकेट बचाने की लड़ाई लड़ता रहा. आधुनिक टी20 में यह फार्मूला शायद ही कभी काम करता है.

3. बुमराह का वर्कलोड संभाल रहे... लेकिन विकल्प कहां?

भारतीय टीम बुमराह का वर्कलोड मैनेज कर रही है, यह बिल्कुल सही रणनीति है. लेकिन इसी दौरान ऐसा विकल्प भी तो तैयार होना चाहिए, जो उनकी गैरमौजूदगी में जिम्मेदारी उठा सके.

मोहम्मद सिराज को भी टी20 की योजनाओं से लगभग बाहर कर दिया गया. नतीजा यह हुआ कि आयरलैंड के खिलाफ भारत के पास न नई गेंद से विकेट लेने वाला गेंदबाज दिखा, न डेथ ओवरों का विशेषज्ञ. इससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या भारतीय टीम ने बुमराह के विकल्प तैयार करने के बजाय सिर्फ बुमराह पर निर्भर रहना सीख लिया है?

4. मिडिल ऑर्डर सिर्फ फ्लैट पिचों का बादशाह?

भारतीय बल्लेबाजी की सबसे बड़ी ताकत मानी जाने वाली मिडिल ऑर्डर इकाई दबाव आते ही बिखर गई.जैसे ही पिच में थोड़ी दो गति मिली, गेंद रुककर आने लगी या सीम मूवमेंट मिला, बड़े-बड़े हिटर साधारण बल्लेबाज नजर आने लगे. यही पैटर्न विश्व कप में भी दिखा था. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार विपक्ष ने कोई गलती नहीं की.

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5. IPL का स्ट्राइक रेट... अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का समाधान नहीं

आईपीएल दुनिया की सबसे बड़ी टी20 लीग है. लेकिन हर आईपीएल स्टार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उसी अंदाज में सफल होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं.

फ्लैट पिचों पर 200 के स्ट्राइक रेट से रन बनाना अलग बात है. लेकिन जब गेंद रुककर आए, स्विंग हो या विकेट थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो, तब बल्लेबाज की असली परीक्षा होती है.

भारत के कई बल्लेबाज अभी भी इस बदलाव के लिए तैयार नहीं दिख रहे. जरूरत सिर्फ बड़े शॉट्स की नहीं, बल्कि मैच की मांग के हिसाब से बल्लेबाजी की है.

6. विशेषज्ञ स्पिनर कहां है?

भारतीय टीम में स्पिन ऑलराउंडरों की कमी नहीं है, लेकिन ऐसा विशेषज्ञ स्पिनर कौन है जो बीच के ओवरों में मैच पलट दे?

जब तेज गेंदबाज विकेट नहीं निकाल पा रहे थे, तब स्पिन विभाग भी विपक्ष को बांध नहीं सका. टी20 में बीच के ओवरों में विकेट लेने वाला स्पिनर सबसे बड़ा हथियार होता है और फिलहाल भारत के पास यही हथियार सबसे कमजोर दिख रहा है.

वैभव बहस का हिस्सा हैं, पूरी कहानी नहीं

वैभव सूर्यवंशी को मौका मिलना चाहिए था या नहीं, इस पर बहस होती रहेगी. हो सकता है उनका डेब्यू मैच का रंग बदल देता. हो सकता है कुछ भी नहीं बदलता.

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लेकिन इतना तय है कि भारत की हार को सिर्फ वैभव के डेब्यू से जोड़ना वास्तविक समस्या से मुंह मोड़ना होगा. आयरलैंड ने भारत को सिर्फ हराया नहीं है. उसने आईना दिखाया है.

अगर भारतीय टीम को टी20 क्रिकेट में लंबे समय तक नंबर-1 बने रहना है, तो सिर्फ नए चेहरे नहीं, पुरानी सोच भी बदलनी होगी... क्योंकि अगली बार सामने आयरलैंड नहीं, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड या साउथ अफ्रीका होगा... और वहां गलतियों की कीमत कहीं ज्यादा भारी पड़ेगी.

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