मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम की पिच पर इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज जोस बट्लर जब भी उतरते हैं, तो मैच का मिजाज बदलने में उन्हें ज्यादा वक्त नहीं लगता. इस टी20 वर्ल्ड कप में अब तक उनका बल्ला भले शांत रहा हो, लेकिन बटलर जैसे मैच-विनर को ज्यादा देर तक रोक पाना आसान नहीं होता- खासकर ऐसे मैदान पर, जो बल्लेबाजा को खुलकर खेलने का न्योता देता है. तो भारत और इंग्लैंड के बीच हाई वोल्टेज सेमीफाइनल में बटलर को रोकने के लिए टीम इंडिया आज (गुरुवार) क्या करे?
मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम बटलर के लिए अनजान नहीं है. यहां खेले 31 टी20 मैचों में उन्होंने 909 रन बनाए हैं. उनका एवरेज 32.46 और स्ट्राइक रेट 143.82 रहा है. इस दौरान उनके बल्ले से एक शतक और तीन अर्धशतक भी निकले हैं. यानी अगर बटलर को शुरुआत में लय मिल गई, तो वह इस मैदान पर तेजी से मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं.
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— BCCI (@BCCI) March 5, 2026
बटलर की ताकत क्या है?
बटलर की बल्लेबाजी की सबसे बड़ी खासियत उनका लो सेंटर ऑफ ग्रैविटी है. वह क्रीज पर हल्का झुककर बल्लेबाजी करते हैं, जिससे उनका बैलेंस मजबूत रहता है और सामने की दिशा में शॉट बेहद ताकत से निकलते हैं. यही वजह है कि अगर गेंद सीधी लाइन में या पैड्स के आसपास पड़ जाए, तो बटलर उसे डाउन द ग्राउंड या स्ट्रेट बाउंड्री की ओर आसानी से भेज देते हैं.
ऑफ स्टंप के बाहर फंसाने की रणनीति
बटलर के खिलाफ सबसे असरदार तरीका यही माना जा रहा है कि उन्हें ऑफ स्टंप के बाहर चौथे-पांचवें स्टंप की लाइन पर लगातार गेंदबाजी की जाए. इस लाइन पर बल्लेबाज को ड्राइव या कट खेलने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जहां गलती की संभावना बढ़ जाती है. हाल के मैचों में बटलर को इसी एरिया में स्लाइस शॉट खेलते या आउट होते देखा गया है.
स्पिन से भी बन सकता है दबाव
भारतीय टीम चाहे तो मिडिल ओवरों से पहले ही स्पिन का दांव चला सकती है. वरुण चक्रवर्ती की मिस्ट्री स्पिन और अक्षर पटेल की लेफ्ट-आर्म स्पिन बटलर को लाइन पढ़ने में परेशान कर सकती है. अगर इन गेंदबाजों को सही समय पर लगाया गया तो बटलर को बड़े शॉट खेलने में जोखिम लेना पड़ेगा.
शुरुआत में रोकना क्यों जरूरी?
टी20 क्रिकेट में बटलर उन बल्लेबाजों में हैं जो हर फेज में रन बना सकते हैं- पावरप्ले से लेकर डेथ ओवर तक. इसलिए भारत की कोशिश यही होगी कि उन्हें शुरुआती ओवरों में ही बांधकर रखा जाए. अगर शुरुआत में रन नहीं मिले, तो जोखिम लेने की कोशिश में गलती की संभावना बढ़ जाती है.
मैच का टर्निंग पॉइंट
अगर बटलर को शुरुआत में ही रोक लिया गया, तो भारत मैच पर दबाव बना सकता है. लेकिन अगर उन्हें लय मिल गई, तो वह अकेले दम पर मैच का रुख पलटने की क्षमता रखते हैं. यही वजह है कि वानखेड़े में भारत की गेंदबाज़ी का सबसे बड़ा इम्तिहान होगा- जोस बटलर को कितनी देर तक खामोश रखा जा सकता है.