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धोनी ने युवराज सिंह को टीम इंडिया से निकलवाया? पूर्व सेलेक्टर ने बता दी सच्चाई

पूर्व सेलेक्टर संदीप पाटिल ने साफ कहा है कि महेंद्र सिंह धोनी ने कभी युवराज सिंह को टीम से बाहर करने की बात नहीं कही. उनके मुताबिक टीम चयन का फैसला चयन समिति लेती थी. वहीं योगराज सिंह आज भी मानते हैं कि उनके बेटे के करियर को नुकसान पहुंचा.

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एमएस धोनी के साथ पूुर्व क्रिकेटर युवराज सिंह और अन्य खिलाड़ी (Photo: ITG)
एमएस धोनी के साथ पूुर्व क्रिकेटर युवराज सिंह और अन्य खिलाड़ी (Photo: ITG)

पूर्व भारतीय क्रिकेटर योगराज सिंह कई बार यह आरोप लगा चुके हैं कि महेंद्र सिंह धोनी की वजह से उनके बेटे युवराज सिंह का अंतरराष्ट्रीय करियर जल्दी खत्म हो गया. योगराज सिंह कई बार कह चुके हैं कि उनके बेटे के साथ जो हुआ, उसके लिए वह धोनी को कभी माफ नहीं करेंगे.

लेकिन अब इस विवाद पर पूर्व मुख्य चयनकर्ता संदीप पाटिल ने अलग ही सच बताया है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि टीम चयन के दौरान धोनी ने कभी भी युवराज सिंह को टीम से बाहर करने की बात नहीं कही.

क्या बोले संदीप पाटिल

एक यूट्यूब शो में बातचीत के दौरान संदीप पाटिल ने कहा कि वह रिकॉर्ड पर यह बात कह रहे हैं कि चयन बैठक हो, विदेश दौरा हो या मैच के दौरान चर्चा. धोनी ने कभी नहीं कहा कि युवराज सिंह को टीम से हटा दिया जाए. पाटिल के मुताबिक धोनी को चयन समिति पर पूरा भरोसा था और उन्होंने कभी चयन प्रक्रिया में दखल नहीं दिया. उन्होंने कहा कि टीम में किसे रखना है और किसे नहीं, यह फैसला हमेशा चयन समिति ही करती थी.

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संदीप पाटिल ने यह भी माना कि एक पिता के तौर पर योगराज सिंह का अपने बेटे के लिए भावुक होना गलत नहीं है. लेकिन उन्होंने साफ कहा कि युवराज सिंह के टीम से बाहर होने के लिए धोनी को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है.

योगराज सिंह ने क्या आरोप लगाए हैं

योगराज सिंह कई सालों से सार्वजनिक तौर पर धोनी पर नाराजगी जताते रहे हैं. हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वह धोनी को कभी माफ नहीं करेंगे. उनका कहना है कि युवराज सिंह अभी चार-पांच साल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल सकते थे. योगराज सिंह का दावा है कि उनके बेटे के साथ अन्याय हुआ.

युवराज सिंह का शानदार करियर

युवराज सिंह भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े मैच विजेताओं में गिने जाते हैं. उन्होंने भारत को 2007 के टी20 विश्व कप और 2011 के वनडे विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाई थी. 2011 के विश्व कप में युवराज सिंह को प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया था. उस समय वह फेफड़ों में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, लेकिन इलाज के बाद उन्होंने मैदान पर वापसी भी की.

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क्या कहते हैं संदीप पाटिल

संदीप पाटिल का कहना है कि टीम से जुड़ा हर बड़ा फैसला चयन समिति लेती थी. उनके मुताबिक धोनी ने कभी किसी खिलाड़ी को बाहर करने का दबाव नहीं बनाया. यानी चयन समिति की राय में युवराज सिंह को बाहर करने के फैसले में धोनी की भूमिका नहीं थी.
 

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