Premanand Maharaj: अच्छी सीख या शिक्षा चाहे जहां से भी मिले, उसे हासिल करने में कभी देर नहीं करनी चाहिए. वृंदावन वाले प्रेमानंद महाराज ने इस कथन का अपने प्रवचन में स्पष्ट उदाहरण दिया है. प्रेमानंद महाराज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसमें उन्होंने बताया है कि कैसे एक शराबी उन्हें बड़ी सीख दे गया था. प्रेमानंद महाराज ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति इस सबक को अपने भीतर उतार ले तो बड़े से बड़ा दुख भी उसे तोड़ नहीं पाएगा.
प्रेमानंद महाराज ने कहा, 'एक बार हम गंगा किनारे बैठकर मंत्र जपते हुए गंगा की तरंगों का आनंद ले रहे थे. उम्र कोई 22-24 वर्ष रही होगी. तब वहां नशे की हालत में एक शराबी आया और हमें खड़े होने के लिए कहा. मैंने खड़े होकर उन्हें प्रणाम किया. इसके बाद वो मुझे अपने साथ कहीं ले गया. मैं भी पीछे-पीछे चलता रहा. वो मुझे ब्रह्मावर्त घाट के पास एक पवित्र स्थल "वैकुण्ठ धाम" ले गया.'
प्रेमानंद महाराज के अनुसार शराबी ने मुझसे कहा, 'देख रहा है इनको तू! कौन है ये? मैंने कहा- "भगवान". फिर उसने पूछा कि ये भगवान किसके बने हैं. मैंने कहा कि भगवान तो भगवान होते हैं. फिर शराबी ने पलटकर कहा कि ये भगवान संगमरमर के बने हैं. इसके बाद उसने कहा कि तुम्हारे पैरों तले दबा पत्थर भी संगमरमर है. अब समझ ले कि एक पैरों तले रौंदा जा रहा है और एक भगवान बनकर पूजा जा रहा है, क्यों?'
इसके बाद शराबी प्रेमानंद महाराज से बोला, 'मंदिर में रखी प्रतिमा को तिल-तिल काटा गया, लेकिन वो टूटी नहीं. यह पत्थर टूटा नहीं, इसलिए भगवान बनकर मंदिर में पूजा जा रहा है. फिर उसने कहा कि जीवन में कभी टूटना नहीं. उसकी यह बात सुनकर मैंने झुककर उसे प्रणाम किया. मुझे लगा भगवान शराबी के वेष में आकर आज मेरा उद्धार कर रहे हैं.'
इस कहानी से मिली सीख को लेकर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि अच्छा उपदेश या शिक्षा हमें कहीं से भी मिले, ले लेनी चाहिए. इसमें कभी संकोच नहीं करना चाहिए कि अच्छा ज्ञान देने वाले व्यक्ति की प्रवृत्ति कैसी है. अगर वो कोई अच्छी बात कह रहा है तो उसे ध्यानपूर्वक सुनें और अपने जीवन में उतारें. फिर चाहे वो कोई गरीब, सांसारिक या दुनिया की नजर में पागल व्यक्ति ही क्यों न हो.