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ब्रेन, दिल, किडनी... इंसान मरता है तो कौन सा अंग सबसे पहले काम बंद करता है?

मौत के बाद इंसान के अंग धीरे-धीरे काम बंद करते हैं. कुछ अंग तो मिनटों में खत्म होते हैं तो कुछ कई दिनों में. कॉर्निया तो मरने के बाद 14 दिन सही सलामत रहती है. त्वचा-हड्डियां कई दिनों तक जीवित रह सकती हैं. यानी शरीर का हर अंग सही समय पर निकाल कर किसी को दान देकर जिंदगियां बचाई जा सकती हैं.

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मरने के बाद शरीर के अलग-अलग अंग अलग-अलग समय में काम करना बंद करते हैं. (Photo: Getty)
मरने के बाद शरीर के अलग-अलग अंग अलग-अलग समय में काम करना बंद करते हैं. (Photo: Getty)

मौत एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इंसान की मौत होने के बाद उसके शरीर के सभी अंग एक साथ काम करना बंद नहीं करते? 

मेडिकल साइंस के मुताबिक मौत का मतलब है दिल की धड़कन, सांस लेना या दिमाग का काम करना हमेशा के लिए रुक जाना. लेकिन उसके बाद भी, शरीर के अन्य अंग कुछ समय तक जीवित रह सकते हैं. अगर उन्हें सही तरीके से सुरक्षित  किया जाए. 

यह जानकारी खासतौर पर अंग दान (ऑर्गन डोनेशन) के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि मौत के बाद कुछ घंटों या दिनों में अंगों को निकालकर किसी और की जान बचाई जा सकती है. आइए जानते हैं मौत के बाद पहले कौन-सा अंग काम करना बंद करता है. फिर कौन-सा. कितने समय में ये अंग पूरी तरह से बेकार हो जाते हैं. यह पूरी जानकारी मेडिकल स्टडी और ऑर्गन डोनेशन प्रोटोकॉल पर आधारित है.

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मौत क्या होती है और अंग क्यों बंद होते हैं?

सबसे पहले समझते हैं कि मौत होती कैसे है. डॉक्टर मौत की घोषणा तब करते हैं जब दिल रुक जाता है यानी सर्कुलेटरी डेथ. दिमाग पूरी तरह से काम करना बंद कर देता है यानी ब्रेन डेथ. मौत के बाद शरीर में ऑक्सीजन और खून का बहाव रुक जाता है, जिससे अंगों को ऊर्जा नहीं मिलती.

नतीजा यह होता है कि अंग धीरे-धीरे खराब होने लगते हैं. लेकिन सभी अंग एक समान गति से नहीं मरते. कुछ अंग बहुत जल्दी खराब होते हैं. कुछ लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं. यह समय शरीर के तापमान, मौत का कारण और चिकित्सा सुविधाओं पर निर्भर करता है. अगर शरीर को ठंडा रखा जाए, तो अंग ज्यादा समय तक बच सकते हैं.

चिकित्सा में अंगों के बंद होने का मतलब है कि वे इतने खराब हो जाते हैं कि उन्हें ट्रांसप्लांट (प्रत्यारोपण) नहीं किया जा सकता. नीचे हम सीरीज में बता रहे हैं कि मौत के बाद पहले कौन-सा अंग प्रभावित होता है और कितने समय में. 

death human organs

मौत के बाद अंगों का क्रम और समय

मौत के बाद अंग इस हिसाब से काम करना बंद करते हैं. पहले वे अंग जो ऑक्सीजन पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं, वे जल्दी खराब होते हैं...

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दिमाग (ब्रेन): मौत के बाद सबसे पहले दिमाग की कोशिकाएं मरती हैं. ऑक्सीजन न मिलने से सिर्फ 4-6 मिनट में दिमाग पूरी तरह से काम करना बंद कर देता है. यही वजह है कि ब्रेन डेथ को मौत का मुख्य संकेत माना जाता है. दिमाग ट्रांसप्लांट नहीं किया जाता, लेकिन यह शरीर के बाकी अंगों को नियंत्रित करता है.

दिल (हार्ट): दिल भी ऑक्सीजन पर बहुत निर्भर है. मौत के बाद 4-6 घंटों में यह ट्रांसप्लांट के लिए बेकार हो जाता है. लेकिन अगर मशीनों से सपोर्ट दिया जाए (जैसे ब्रेन डेथ के मामले में), तो इसे ज्यादा समय तक बचाया जा सकता है.

फेफड़े (लंग्स): दिल की तरह ही, फेफड़े भी 4-6 घंटों में खराब हो जाते हैं. ये सांस लेने के लिए जरूरी हैं, इसलिए मौत के साथ ही इनकी काम करने की क्षमता तेजी से गिरती है.

लीवर: यह शरीर का सबसे बड़ा अंग है. जहर निकालने का काम करता है. मौत के 8-12 घंटों में यह बेकार हो जाता है. लीवर में एंजाइम ज्यादा होते हैं, इसलिए यह जल्दी सड़ने लगता है.

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आंतें और अग्न्याशय: ये पाचन से जुड़े अंग हैं. आंतें 8-16 घंटों में और अग्न्याशय 12-18 घंटों में खराब हो जाते हैं. इनमें बैक्टीरिया और एंजाइम की वजह से सड़न जल्दी शुरू होती है.

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किडनी: किडनी सबसे मजबूत अंगों में से एक हैं. मौत के 24-36 घंटों तक इन्हें ट्रांसप्लांट किया जा सकता है. ठंडे वातावरण में इन्हें और ज्यादा समय तक बचाया जा सकता है.

आंखें (कॉर्निया): आंखों की कॉर्निया (पारदर्शी परत) बहुत देर से खराब होती है. मौत के 14 दिनों तक इसे दान किया जा सकता है, क्योंकि यह ऑक्सीजन पर कम निर्भर है.

त्वचा, हड्डियां और अन्य टिश्यू: ये सबसे अंत में खराब होते हैं. त्वचा और हड्डियां कई दिनों या सालों तक ग्राफ्टिंग (त्वचा प्रत्यारोपण) के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं. इन्हें फ्रीज करके रखा जाता है.

सड़ने का प्रोसेस: क्या होता है आगे?

ट्रांसप्लांट के लिए अंगों की समय सीमा के बाद, शरीर में सड़न (डीकंपोजिशन) शुरू होती है. पहले 24-72 घंटों में पैंक्रियास, आंतें और लीवर जैसे एंजाइम से भरपूर अंग सड़ने लगते हैं. फिर धीरे-धीरे पूरा शरीर प्रभावित होता है, जो घंटों से हफ्तों तक चल सकता है. बैक्टीरिया और कीड़े इस प्रक्रिया को तेज करते हैं.

अंग दान का महत्व

मौत के बाद भी अंग दान से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं. भारत में हर साल लाखों लोग अंगों की कमी से मरते हैं. अगर मौत के तुरंत बाद अंग निकाले जाएं, तो दिल, फेफड़े जैसे अंग 4-6 घंटों में किसी और को दिए जा सकते हैं. ब्रेन डेथ के मामलों में मशीनों से अंगों को सपोर्ट करके समय बढ़ाया जा सकता है.

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