गोवा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) के नए जहाज ICGS समुद्र प्रताप को कमीशन किया. यह भारत का पहला पूरी तरह स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण जहाज (Pollution Control Vessel - PCV) है. समारोह में गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, तटरक्षक महानिदेशक परमेश सिवमणि और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.
जहाज का नाम और महत्व
'समुद्र प्रताप' का मतलब है 'समुद्र की महिमा'. यह जहाज समुद्र को सुरक्षित, स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त रखेगा. यह गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) द्वारा बनाए गए दो PCV जहाजों में से पहला है. पूरी डिजाइन, निर्माण और तकनीक भारत में हुई है, जिसमें 60% से ज्यादा हिस्से स्वदेशी हैं.
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जहाज की खासियतें
मुख्य काम: समुद्र का प्रदूषण नियंत्रण
यह जहाज खास तौर पर समुद्र में तेल रिसाव (ऑयल स्पिल) या अन्य प्रदूषण से निपटने के लिए बनाया गया है. इसमें हैं...
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आधार और कमांड
जहाज का आधार कोच्चि होगा. यह पश्चिमी क्षेत्र के कमांडर के अधीन काम करेगा. कमांडिंग ऑफिसर हैं डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल अशोक कुमार भामा. जहाज पर कुल 14 अधिकारी और 115 जवान हैं.
खास बात: पहली बार इस जहाज पर दो महिला अधिकारी नियुक्त की गई हैं. वे पुरुष साथियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सभी ड्यूटी निभाएंगी. यह तटरक्षक बल में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का प्रतीक है.
क्यों महत्वपूर्ण है यह जहाज?
भारत के पास लंबी समुद्री सीमा है. समुद्र में तेल रिसाव, जहाज दुर्घटनाएं या अन्य प्रदूषण से पर्यावरण को बड़ा नुकसान होता है. 'समुद्र प्रताप' जैसे जहाज प्रदूषण रोकने, आग बुझाने, निगरानी और सर्च-रेस्क्यू में मदद करेंगे. यह भारत की जहाज निर्माण क्षमता का प्रमाण है. भविष्य में स्वच्छ व सुरक्षित समुद्र की गारंटी देता है.