दुनिया का सबसे बूढ़ा और बड़ा नर पांडा (Panda) अब नहीं रहा. एन एन(An An) नाम के इस पांडा को गुरुवार सुबह हांगकांग के ओशन पार्क (Hong Kong’s Ocean Park) में इच्छामृत्यु (Euthanasia) दी गई.
इस पांडा की उम्र 35 साल थी जो इंसानों की 105 साल की उम्र के बराबर है. एन एन ने ठोस भोजन खाना बंद कर दिया था. ये पिछले काफी समय सिर्फ पानी या इलेक्ट्रोलाइट्स वाले तरल पदार्थ ही ले रहा था. इस पांडा की देखभाल कर रहे पार्क का कहना है कि पांडा अपनी मौत से पहले बहुत निष्क्रिय हो चुका था. कर्मचारियों ने उसकी परेशानी को कम करने के लिए उसे मेडिकल केयर भी दी थी.

ओशन पार्क ने अपने बयान में कहा कि ये दुखद है, लेकिन एन एन की स्थिति 21 जुलाई 2022 को काफी खराब हो गई थी. चीन संरक्षण और अनुसंधान केंद्र (China Conservation and Research Centre) से सलाह लेने के बाद, ओशन पार्क और कृषि, मत्स्य पालन और संरक्षण विभाग के पशु चिकित्सकों ने इस विशालकाय पांडा को इच्छामृत्यु देने का कठिन फैसला लिया. गुरुवार सुबह 8.40 बजे पांडा के बाड़े में ही इच्छामृत्यु की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया.

ओशन पार्क कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष पाउलो पोंग (Paulo Pong) का कहना है कि एन एन हमारे परिवार का एक अहम सदस्य था और वह पार्क के साथ-साथ ही बड़ा हुआ. उसने स्थानीय लोगों और पर्यटकों के साथ दोस्ताना रिश्ता बना लिया था. एन एन ने हमें कई दिल को छू लेने वाले यादगार पल दिए हैं. उसे भुलाया नहीं जा सकता.
दोपहर को एन एन के बाड़े में शोक सभा भी रखी गई, जहां कर्मचारियों ने पांडा की एक तस्वीर के साथ सफेद फूल भी रखे थे. तस्वीर पर लिखा था 'Thank you An An 1986-2022'.

पिछले गुरुवार को पार्क ने जानकारी दी थी कि पांडा ने खाना बंद कर दिया है और वह बहुत सुस्त हो गया है. पिछले कुछ दिनों से एनएन को उसकी तबियत की वजह से पार्क में आने वाले लोगों से दूर रखा गया था. पांडा की मौत के बारे में सुनकर लोग खासे दुखी नजर आए. उसे चाहने वाले लोगों ने पार्क में आकर श्रद्धांजलि दी.
Hong Kong’s beloved giant panda An An euthanised at Ocean Park
— South China Morning Post (@SCMPNews)
एन एन का जन्म दक्षिण-पश्चिमी चीन के सिचुआन प्रांत (Sichuan province) में हुआ था. 1999 में बीजिंग ने शहर को उपहार तौर पर एन एन और एक मादा विशाल पांडा जिया जिया को एकसाथ हांगकांग भेजा था. जिया-जिया की मौत 38 साल की उम्र में 2016 में हो गई थी. पार्क में फिलहाल दो और विशाल पांडा हैं. जिन्हें केंद्र सरकार ने 2007 में हांगकांग को दिया था.