भारतीय विमानन नियामक DGCA (Directorate General of Civil Aviation) ने एअर इंडिया के बोइंग 787 विमान के फ्यूल कंट्रोल स्विच पैनल की जांच के दौरान अपने प्रतिनिधि को मौजूद रखने का फैसला किया है. यह परीक्षण अमेरिका के सिएटल में किया जाएगा. फरवरी 2026 में लंदन-बेंगलुरु उड़ान के दौरान हुई घटना के बाद सुरक्षा को लेकर यह अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है.
फरवरी 2026 में एअर इंडिया की लंदन से बेंगलुरु जा रही एक बोइंग 787 उड़ान के दौरान फ्यूल कंट्रोल स्विच पैनल में तकनीकी समस्या आई थी. इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं. DGCA ने मामले की गहन जांच शुरू की और अब मूल उपकरण निर्माता (OEM) के साथ मिलकर विस्तृत परीक्षण कराने का फैसला किया है.
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DGCA का सख्त रुख
DGCA के सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि फ्यूल कंट्रोल स्विच पैनल का परीक्षण DGCA अधिकारियों की मौजूदगी में ही किया जाएगा. DGCA का कहना है कि यात्री सुरक्षा सबसे ऊपर है, इसलिए किसी भी संदेह की स्थिति में अतिरिक्त जांच जरूरी है. सिएटल में नियंत्रित लैबोरेटरी वातावरण में यह परीक्षण होगा, ताकि पार्ट की परफॉर्मेंस और विश्वसनीयता को अंतिम रूप से पुष्टि की जा सके.

एअर इंडिया ने कहा कि फ्यूल कंट्रोल स्विच मॉड्यूल को पहले ही OEM (Boeing) और DGCA दोनों द्वारा पूरी तरह काम करने लायक पाया जा चुका है. फिर भी पूरी तरह निश्चित होने के लिए अतिरिक्त जांच की जा रही है. एअर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि यह अतिरिक्त कदम भरपूर सावधानी के रूप में उठाया गया है.
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क्यों हो रही है दोबारा जांच?
विमानन क्षेत्र में फ्यूल कंट्रोल स्विच पैनल बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. यह इंजन को ईंधन सप्लाई नियंत्रित करता है. अगर इसमें कोई गड़बड़ी हो तो उड़ान के दौरान गंभीर समस्या पैदा हो सकती है. फरवरी की घटना के बाद DGCA और एअर इंडिया दोनों ही इस बात को लेकर सतर्क हैं कि ऐसी समस्या दोबारा न हो.
यह परीक्षण एक लैबोरेटरी में किया जाएगा, जहां वैज्ञानिक तरीके से सभी स्थितियों का परीक्षण होगा. यह मामला भारतीय विमानन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एअर इंडिया वर्तमान में अपने बेड़े का विस्तार कर रही है. बोइंग 787 इसका अहम हिस्सा है.