scorecardresearch
 

कॉक्रोच या इंसान: प्रलय, न्यूक्लियर विस्फोट... अंत में कौन बचेगा?

कॉक्रोच अपनी असाधारण शारीरिक बनावट और मौसम के हिसाब से ढलने की क्षमता के कारण इंसानों से बेहतर सर्वाइवर हैं. न्यूक्लियर रेडिएशन से लेकर बिना सिर के जीने तक, इनकी शारीरिक क्षमताएं इन्हें तब भी जिंदा रखेंगी जब इंसानों इस धरती से खत्म हो जाएंगे.

Advertisement
X
जब किसी देश में इंसान नहीं रहेंगे तब भी कॉक्रोच जिंदा रहेंगे. (Photo: ITG)
जब किसी देश में इंसान नहीं रहेंगे तब भी कॉक्रोच जिंदा रहेंगे. (Photo: ITG)

मानव जाति हमेशा से खुद को इस धरती का सबसे बुद्धिमान, सर्वश्रेष्ठ विकसित और सबसे मजबूत जीव मानती आई है. हमारी बड़ी सोच, विज्ञान, तकनीक और सभ्यताओं के निर्माण ने हमें पृथ्वी के इकोसिस्टम के टॉप पोजिशन पर ला खड़ा किया है. लेकिन जब बात प्योर सर्वाइवल और रीजिलिएंस की आती है, तो एक छोट सा दिखने वाला जीव- इंसानों को बहुत पीछे छोड़ देता है. वो जीव है कॉक्रोच यानी तिलचट्टा. साइंटिफिकली देखें तो इंसान तो अभी इस धरती पर नए खिलाड़ी हैं, जबकि कॉक्रोच करोड़ों वर्षों से हर महाविनाश को झेलकर भी शान से जिंदा हैं.

दो अलग-अलग दुनिया के जीवों में क्या है एक जैसा?

भले ही इंसान एक रीढ़ की हड्डी वाला स्तनधारी जीव है और कॉक्रोच एक बिना रीढ़ का कीड़ा, लेकिन बायोलॉजिकली पर दोनों में कुछ बुनियादी समानताएं हैं. दोनों ही जीव 'ओम्निवोरस' यानी सर्वाहारी हैं; वे कुछ भी खा सकते हैं- पेड़-पौधों से लेकर मांस तक. 

यह भी पढ़ें: मुंबई का मॉनसून: 2000 के बाद सबसे 'गीला' शुरूआती दौर, IMD का रेड अलर्ट

इसके अलावा, दोनों का एक सेंट्रल नर्वस सिस्टम होता है जो शरीर को नियंत्रित करता है. दोनों ही जीवों में प्रजनन की तीव्र इच्छा होती है ताकि वे अपनी प्रजाति को आगे बढ़ा सकें. इंसानों और कॉक्रोच, दोनों में ही परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की अद्भुत क्षमता होती है, यही कारण है कि ये दोनों ही अंटार्कटिका से लेकर तपते रेगिस्तानों तक, दुनिया के लगभग हर कोने में पाए जाते हैं.

Advertisement

Cockroach vs human

अंतर: शारीरिक संरचना और अनुकूलन का खेल

वास्तव में कॉक्रोच को सर्वाइव करने की क्षमता उसे 'सुपरहीरो' बनाती है. जहां इंसानों के पास एक आंतरिक कंकाल होता है, वहीं कॉक्रोच के पास 'एक्सोस्केलेटन' यानी बाहरी कंकाल होता है जो काइटिन नाम के एक मजबूत पदार्थ से बना होता है. यह बाहरी कवच उन्हें भारी दबाव और चोटों से बचाता है. 

इंसान अपने फेफड़ों और नाक के जरिए सांस लेता है और यदि उसका सिर धड़ से अलग हो जाए, तो अत्यधिक खून बहने और ऑक्सीजन की कमी से उसकी तुरंत मौत हो जाती है. जबकि, कॉक्रोच के शरीर पर छोटे-छोटे छिद्र होते हैं जिन्हें 'स्पिरैकल्स' कहा जाता है, जिनसे वे सांस लेते हैं. 

यह भी पढ़ें: चीन ने प्रशांत महासागर में किया परमाणु मिसाइल का परीक्षण, कई देश चिंता में

उनका ब्लडप्रेशर इंसानों की तरह हाई नहीं होता, इसलिए सिर कटने पर भी उनका खून नहीं बहता. वे बिना सिर के भी हफ्तों तक जीवित रह सकते हैं; उनकी मौत केवल भूख और प्यास की वजह से होती है.

Cockroach vs human

कॉक्रोच इंसानों से बेहतर क्यों हैं?

वैज्ञानिक अनुसंधानों और जीवाश्मों के अध्ययन से पता चलता है कि कॉक्रोच लगभग 32 करोड़ साल से इस धरती पर मौजूद हैं. इसका मतलब है कि उन्होंने डायनासोरों का आना और जाना दोनों देखा है. वे दुनिया की तीन-चौथाई प्रजातियों का विनाश भी झेल गए जिसने डायनासोरों का नामोनिशान मिटा दिया था. 

Advertisement

कॉक्रोच के जीन बेहद जटिल और लचीले होते हैं. हाल ही में नेचर कम्यूनिकेशन में छपे एक रिसर्च के अनुसार, 'अमेरिकन कॉक्रोच' के पास किसी भी अन्य कीट की तुलना में सबसे बड़ा जीन समूह होता है. 

यह भी पढ़ें: Tarang Shakti: 30 देशों की एयरफोर्स बॉर्डर के पास के पास करेंगी युद्धाभ्यास, दहल जाएगा पाकिस्तान

इनके डीएनए में जहरीले पदार्थों को बेअसर करने वाले जीन, बीमारियों से लड़ने वाले इम्यून जीन और अंगों को दोबारा उगाने या ठीक करने वाले जीन कोडेड होते हैं. यही कारण है कि उन पर रासायनिक कीटनाशकों का असर भी बहुत जल्दी खत्म हो जाता है और वे उनके खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं.

Cockroach vs human

एटम बम भी फटे तो भी झेल लेते हैं 

इंसानों और कॉक्रोच के बीच सबसे बड़ा वैज्ञानिक न्यूक्लियर रेडिएशन को झेलने की क्षमता में देखा गया है. जब 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए गए थे, तब इंसानों की तो तुरंत मौत हो गई थी, लेकिन मलबे में कॉक्रोच जीवित पाए गए थे. 

डिस्कवरी चैनल के प्रसिद्ध शो MythBusters के एक प्रयोग में यह पाया गया कि जहां इंसान केवल 5 से 10 Gy (Gray) के रेडिएशन में दम तोड़ देता है. वहीं कॉक्रोच 10,000 से लेकर 100,000 Gy तक के घातक परमाणु रेडिएशन को आसानी से सहन कर सकते हैं. 

Advertisement

वैज्ञानिकों का मानना है कि कॉक्रोच की कोशिकाएं इंसानों की तुलना में बहुत धीमी गति से बंटती हैं, जिससे रेडिएशन उनके डीएनए को आसानी से नष्ट नहीं कर पाता.

यह भी पढ़ें: रूस ने यूक्रेन पर 68 मिसाइलों से किया बड़ा अटैक... तबाही की भयानक तस्वीरें

Cockroach vs human

क्या इंसानों के खत्म होने के बाद भी कॉक्रोच जीवित रहेंगे?

इस प्रश्न का सीधा और वैज्ञानिक उत्तर है- हां, बिल्कुल. यदि कल को कोई परमाणु युद्ध होता है, घातक वैश्विक महामारी आती है या गंभीर जलवायु परिवर्तन के कारण मानव जाति इस धरती से विलुप्त हो जाती है, तब भी कॉक्रोच बड़ी आसानी से फलते-फूलते रहेंगे. 

वे बिना भोजन के एक महीने और बिना पानी के दो सप्ताह तक जीवित रह सकते हैं. वे गोंद, कागज, चमड़ा और यहां तक कि अपने मृत साथियों को भी खाकर पेट भर सकते हैं. जब तक इस पृथ्वी पर थोड़ी बहुत भी नमी और जैविक पदार्थ मौजूद रहेंगे, कॉक्रोच का अस्तित्व कभी खत्म नहीं होगा. वे इंसानों की बनाई कंक्रीट की इमारतों और बंकरों को अपना नया आशियाना बना लेंगे और पृथ्वी पर राज करते रहेंगे.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement