scorecardresearch
 

10 करोड़ साल से बदले नहीं मच्छर, पहले डायनासोरों का खून पीते थे, अब इंसानों का

9.90 करोड़ साल पुराना मच्छर का लार्वा मिला है. म्यांमार से मिला यह मच्छर दुनिया का सबसे पुराना लार्वा है. इस मच्छर की प्रजाति नए मच्छरों से मिलती-जुलती है. इस खोज ने मच्छरों के विकास के बारे में नई जानकारी दी है कि उनका रूप पिछले 10 करोड़ साल से लगभग वैसा ही रहा है. ज्यादा बदलाव नहीं हुआ.

Advertisement
X
मच्छरों की प्रजातियां डायनासोरों के जमाने से हैं, ये तब उनका खून पीते थे अब हम इंसानों का. (Photo: ITG)
मच्छरों की प्रजातियां डायनासोरों के जमाने से हैं, ये तब उनका खून पीते थे अब हम इंसानों का. (Photo: ITG)

दुनिया का सबसे पुराना मच्छर मिला है. असल में ये मच्छर का लार्वा है जो एक एम्बर में फंसा हुआ मिला है. इसकी उम्र करीब 9.90 करोड़ साल है. इसे जर्मनी की LMU यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने म्यांमार के कछिन इलाके में खोजा है. यह जिस एम्बर में मिला है, वो बेहत सुरक्षित है. इसे नई प्रजाति और नया जीनस माना गया है.

इसे Cretosabethes primaevus नाम दिया गया है. यह न सिर्फ एम्बर में मिला पहला मच्छर लार्वा है बल्कि मेसोजोइक युग का पहला उम्र में छोटा यानी विकसित होता हुआ मच्छर है. इससे पहले इस युग के सिर्फ वयस्क मच्छरों के फॉसिल मिले थे.

यह भी पढ़ें: क्या वाकई में इंसान अंधा है, ब्रह्मांड का 95% हिस्सा न ही देख पाता है न सुना पाता है

यह फॉसिल इसलिए खास है क्योंकि इसका लार्वा आज के मच्छरों से बहुत मिलता-जुलता है. LMU के जीव वैज्ञानिक आंद्रे अमरल ने कहा कि यह लार्वा आधुनिक प्रजातियों जैसा है जबकि इस काल के बाकी सभी मच्छर फॉसिलों में बहुत अजीब लक्षण थे जो आज के मच्छरों में बिल्कुल नहीं पाए जाते.

9.90 crore Year Old Mosquito found

पहले के 9.90 करोड़ साल पुराने फॉसिल वयस्क मच्छरों के थे जो Burmaculicinae नामक विलुप्त समूह के थे. उनकी शक्ल आज के मच्छरों से बहुत अलग थी. लेकिन इस मच्छर की प्रजाति आज भी दुनिया में मौजूद है.

Advertisement

कब से दुनिया में हैं मच्छर 

मच्छरों की शुरुआत जुरासिक काल में हुई थी जो लगभग 20.1 से 14.5 करोड़ साल पहले का समय है. पहले मिले फॉसिलों के आधार पर यही अनुमान था. LMU शोधकर्ताओं की यह खोज नया संकेत देती है. आंद्रे अमरल ने बताया कि हमारे नतीजे बताते हैं कि मच्छर जुरासिक काल में ही अलग-अलग रूपों में बंट चुके थे. उनके लार्वा का आकार-प्रकार पिछले करीब 10 करोड़ साल से लगभग वैसा ही बना हुआ है. 

यह भी पढ़ें: रिलेशन बनाने के लिए 'बलिदान', जब मेटिंग के बाद नर को खा गई मादा, Video वायरल
 
आज के Sabethini समूह के लार्वा छोटे पानी के जमावट में रहते हैं जैसे पेड़ की डालियों के खोखले में बीच जमा पानी में. Cretosabethes primaevus का लार्वा भी ऐसा ही रहा होगा. एम्बर ज्यादातर जमीन या उड़ने वाले जीवों से बनता है जो रेजिन देने वाले पेड़ों के पास रहते थे.

9.90 crore Year Old Mosquito found

म्यांमार के एम्बर में सबसे ज्यादा मकड़ियां, बीटल, मधुमक्खियां, ततैया, चींटियां और मक्खियां मिलती हैं. लेकिन पानी में रहने वाला लार्वा एम्बर में बचना बहुत मुश्किल है क्योंकि छोटे पानी के तालाब में रेजिन की बूंद गिरना और उसे संरक्षित करना बहुत दुर्लभ है. इसलिए यह खोज बहुत बड़ी किस्मत वाली बात है.

Advertisement

यह फॉसिल मच्छरों के शुरुआती इवोल्यूशन समझने में बहुत मदद करेगा. अब यह नया लार्वा बताता है कि Sabethini जैसे समूह बहुत पुराने समय से ही मौजूद थे. उनका रूप आज तक लगभग वैसा ही है. LMU के शोधकर्ताओं की टीम ने इसे Gondwana Research जर्नल में प्रकाशित किया है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement