इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट यानी ICIMOD ने 2026 की हिमालय बर्फ रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि हिंदूकुश हिमालय क्षेत्र में इस साल नवंबर 2025 से मार्च 2026 तक बर्फ की मात्रा औसत से 27.8 प्रतिशत कम रह गई. यह पिछले 20 सालों में सबसे कम बर्फ है. (Photo: Getty)
रिपोर्ट कहती है कि बर्फ की यह कमी रिकॉर्ड स्तर पर है. इससे पूरे एशिया में पानी की भारी कमी का खतरा पैदा हो गया है. लगभग दो अरब लोगों की पानी, खेती और बिजली की जरूरत इस हिमालयी बर्फ पर निर्भर करती है. यह चौथा लगातार साल है जब हिंदू कुश हिमालय में बर्फ औसत से कम पड़ी है. (Photo: Getty)
2003 से अब तक 14 सर्दियों में बर्फ कम रही है. वैज्ञानिकों का कहना है कि बर्फ की कमी अब एक लंबी अवधि की समस्या बनती जा रही है. हिंदूकुश हिमालय के ग्लेशियर 2000 के बाद से दोगुनी तेजी से पिघल रहे हैं. बर्फ और ग्लेशियर दोनों का तेजी से घटना क्षेत्र के लिए बहुत चिंताजनक है. (Photo: Getty)
हिमालय की मौसमी बर्फ 12 प्रमुख नदी घाटियों में सालाना पानी का करीब एक चौथाई हिस्सा देती है. यह पानी खेती, बिजली बनाने और पीने के लिए बहुत जरूरी है. अगर बर्फ कम होगी तो गर्मियों में नदियों में पानी कम बहने लगेगा. इससे सूखा पड़ सकता है. भूजल ज्यादा निकालना पड़ेगा और पहले से तनाव में चल रहे पानी के सिस्टम पर और दबाव बढ़ेगा. (Photo: Getty)
कुछ नदी घाटियों में बर्फ की कमी बहुत तेज बताई गई है. मेकांग नदी घाटी में बर्फ 59.5% कम रही. तिब्बती पठार पर 47.4% की कमी दर्ज की गई. येलो रिवर और अमू दरिया घाटियों में भी भारी कमी आई है. इन इलाकों में पानी की कमी सबसे ज्यादा महसूस की जाएगी. (Photo: Getty)
सभी जगह बुरा हाल नहीं है. गंगा नदी घाटी में इस बार बर्फ औसत से 16.3% ज्यादा रही. इससे दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों में पानी की उपलब्धता में थोड़ी राहत मिल सकती है. लेकिन कुल मिलाकर पूरे क्षेत्र में बर्फ कम होने का रुझान जारी है. वैज्ञानिक कह रहे हैं कि सरकारों को तुरंत पानी प्रबंधन की नई रणनीति बनानी चाहिए. (Photo: Unsplash)
इसमें पानी की कमी का पहले से अलर्ट सिस्टम, खेती और बिजली विभागों के बीच बेहतर समन्वय, मौसमी पानी स्टोरेज और सूखे से निपटने की तैयारियां शामिल होनी चाहिए. आने वाले वसंत और गर्मी के मौसम का मौसम कैसा रहेगा. इस पर बहुत कुछ निर्भर करेगा. अगर सूखा पड़ा या तापमान बढ़ा तो पानी की समस्या गंभीर हो जाएगी. (Photo: Getty)
हिंदू कुश हिमालय की बर्फ एशिया के लगभग दो अरब लोगों की जिंदगी से जुड़ी हुई है. खेती, बिजली और पीने का पानी सब इसी बर्फ पर टिका है. हिमालयी बर्फ अब रिकॉर्ड निचले स्तर पर है. चार साल से लगातार गिरावट आ रही है. पानी की कमी का खतरा बढ़ रहा है. वैज्ञानिक तुरंत पानी की योजना बनाने की सलाह दे रहे हैं. (Photo: Pixabay)
ICIMOD की यह रिपोर्ट सरकारों और लोगों को साफ चेतावनी दे रही है कि हिमालय की बर्फ बचाना और पानी का सही प्रबंधन करना अब बहुत जरूरी हो गया है. अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो पूरे क्षेत्र में खाने, पानी और बिजली की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा सकता है. क्षेत्रीय सहयोग और स्मार्ट प्लानिंग से ही इस संकट से निपटा जा सकता है. (Photo: Unsplash)