इंडोनेशिया का प्रसिद्ध पर्यटन द्वीप बाली इन दिनों गंभीर कचरा संकट से जूझ रहा है. जहां एक तरफ यह जगह अपनी प्राकृतिक सुंदरता, समुद्र तटों और हरे-भरे वातावरण के लिए दुनिया भर में मशहूर है, वहीं अब सड़कों पर कचरे का ढेर हो रहा है. बदबू फैल रही है और पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है. (Photo: AFP)
अप्रैल 2026 की शुरुआत से बाली के सबसे बड़े लैंडफिल सुवुंग (Suwung) को जैविक कचरा (ऑर्गेनिक वेस्ट) लेने से रोक दिया गया है. सरकार पुराने कानून को लागू करने की कोशिश कर रही है, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण पूरा द्वीप कचरे में डूबता जा रहा है. (Photo: AFP)
सरकार पिछले साल से जागरूकता अभियान चला रही है और कंपोस्ट बनाने के डिब्बे बांट रही है. साथ ही वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट्स शुरू करने की योजना है, जिसमें बाली का एक प्रोजेक्ट रोज 1,200 टन कचरा प्रोसेस कर सकेगा. लेकिन ये प्रोजेक्ट्स शुरू होने में कई साल लग सकते हैं. (Photo: AFP)
सुवुंग लैंडफिल बाली का सबसे बड़ा कचरा डंपिंग स्थल था, जो रोजाना करीब 1,000 टन कचरा लेता था. अब यहां सिर्फ नॉन-ऑर्गेनिक कचरा ही सीमित मात्रा में लिया जा रहा है. पूरा बंद 1 अगस्त 2026 से होने वाला है. इस फैसले के बाद सड़कों पर कचरा इकट्ठा होने लगा है. (Photo: AFP)
लोग परेशान होकर कचरा जलाने लगे हैं, जिससे काली धुंआ और तेज बदबू फैल रही है. कई जगहों पर चूहे भी बढ़ गए हैं. पर्यटक और स्थानीय दोनों ही इस समस्या से परेशान हैं. एक फूलों की दुकान चलाने वाली युविता अंग्गी प्रिनांडा ने बताया कि उनके फूलों की खुशबू भी कचरे की बदबू को छिपा नहीं पा रही है. (Photo: AFP)
उन्होंने कहा कि व्यापारी के तौर पर यह बहुत परेशानी का विषय है. कुछ ग्राहक बदबू से परेशान होकर खरीदारी किए बिना ही चले जाते हैं. अपनी दुकान से रोज चार बड़े काले बैग भरकर कचरा निकलता है, जो ज्यादातर पत्तियां और फूलों के कटे हुए हिस्से होते हैं. बाली में रोजाना कुल 3,400 टन कचरा निकलता है, जिसमें पर्यटकों का बड़ा योगदान है. (Photo: AFP)
कचरा न उठाने की स्थिति में कई लोग इसे घर के पास या खाली जगह पर जला रहे हैं. इससे जहरीला धुआं फैल रहा है. स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं. कुछ लोग कचरा नदियों में फेंक रहे हैं. कुता बीच जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल पर कचरे के बैग कमर तक के ढेर लग गए हैं. ऑस्ट्रेलियाई पर्यटक जस्टिन बूचर ने कहा कि रात में यहां बहुत सारे चूहे दिखते हैं. बदबू बहुत खराब है. यह अच्छा नजारा नहीं है. (Photo: AFP)
पिछले साल करीब 70 लाख पर्यटक बाली आए थे, जबकि द्वीप की स्थानीय आबादी सिर्फ 44 लाख के आसपास है. इतने ज्यादा पर्यटकों के कारण कचरे की मात्रा बहुत बढ़ गई है. 70 प्रतिशत से ज्यादा कचरा जैविक होता है, जो समय के साथ मीथेन गैस पैदा करता है. यह गैस खतरनाक है क्योंकि इससे विस्फोट या भूस्खलन हो सकता है. (Photo: AFP)
16 अप्रैल को सैकड़ों सफाई कर्मचारी कचरा भरे ट्रकों के साथ गवर्नर के कार्यालय पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया. एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि अगर हम क्लाइंट का कचरा नहीं उठाते तो हम गलत हैं. अगर उठाते हैं तो उसे फेंकेंगे कहां? सरकार ने तुरंत कुछ राहत देते हुए जुलाई के अंत तक सुवुंग में सीमित मात्रा में कचरा डालने की अनुमति दे दी है. लेकिन अगस्त से पूरे देश में सभी ओपन लैंडफिल बंद करने का फैसला है. (Photo: AFP)
बाली के सुवुंग लैंडफिल कई सालों से अपनी क्षमता से ज्यादा कचरा ले रहा था. विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक सही प्रबंधन न करने के कारण यह संकट पैदा हुआ है. इंडोनेशिया में 2013 से ही ओपन लैंडफिल पर रोक है, लेकिन इसे सख्ती से लागू नहीं किया गया. पूरे देश में 40 करोड़ टन से ज्यादा कचरा हर साल निकलता है, जिसमें 40 प्रतिशत खाने का कचरा और 20 प्रतिशत प्लास्टिक होता है. सिर्फ एक तिहाई कचरा ही रिसाइकल या प्रोसेस होता है, बाकी प्रकृति में फैल जाता है. (Photo: AFP)
बाली के सार्वजनिक व्यवस्था प्रमुख आई देवा न्योमन राय धर्मादी ने कहा कि कचरा फेंकने या जलाने पर तीन महीने तक की जेल और 50 मिलियन रुपिया (लगभग 3,000 डॉलर) तक का जुर्माना हो सकता है. लेकिन कई लोग मजबूरी में ऐसा कर रहे हैं क्योंकि उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है. (Photo: AFP)