अलास्का के प्रसिद्ध पर्यटक स्थल ट्रेसी आर्म फोर्ड में पिछले साल 10 अगस्त को सुबह 5:30 बजे एक भयानक मेगा सुनामी आई. यह लहर 1578 फीट (481 मीटर) ऊंची थी, जो न्यूयॉर्क के एम्पायर स्टेट बिल्डिंग से भी ज्यादा ऊंची थी. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अब तक दर्ज की गई दूसरी सबसे ऊंची सुनामी लहर है. किस्मत से उस समय कोई क्रूज शिप या नाव उस इलाके में नहीं थी, इसलिए कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ. (Photo: USGS)
यह सुनामी किसी भूकंप से नहीं, बल्कि एक बड़े पत्थर के भूस्खलन से आई. जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर पिघल गया और पीछे हट गया. इससे पहाड़ की चट्टान का सहारा छिन गया और वह अचानक समुद्र में गिर गई. इस घटना को मेगा सुनामी कहा जाता है, जो सामान्य सुनामी से अलग होती है. इसे भूस्खलन, ज्वालामुखी विस्फोट या उल्कापिंड के कारण पैदा होने वाली बहुत बड़ी लहर कहते हैं. (Photo: USGS)
ट्रेसी आर्म फोर्ड टोंगास नेशनल फॉरेस्ट में स्थित है. यह फोर्ड लगभग 40 किलोमीटर लंबा और 804 मीटर से थोड़ा ज्यादा चौड़ा है. जब भारी मात्रा में चट्टान समुद्र में गिरी तो पानी को संकीर्ण जगह से गुजरना पड़ा, जिससे बहुत ऊंची लहर बन गई. इस मेगा सुनामी ने पहाड़ की दीवारों पर उगे सारे पेड़-पौधों को पूरी तरह उखाड़ दिया. (Photo: USGS)
वैज्ञानिकों ने बताया कि लहर के नीचे सिर्फ चट्टान और मिट्टी बची, जबकि ऊपर जंगल वैसा का वैसा ही रहा. यह देखकर ऐसा लगता है जैसे दो अलग दुनिया एक साथ खड़ी हों. लहर ने चट्टानों पर गहरे निशान भी छोड़ दिए. 8.3 करोड़ घन गज चट्टान मात्र एक मिनट में समुद्र में ढह गई. यह गीजा के पिरामिड से 24 गुना ज्यादा है. (Photo: USGS)
इस भारी ढहाव ने इतनी तेजी से पानी हटाया कि पूरी दुनिया में भूकंपीय तरंगें महसूस की गईं. कैलगरी यूनिवर्सिटी के भू-आकृति विज्ञानी डैन शुगर, जो इस स्टडी के मुख्य लेखक हैं ने कहा कि सुबह-सुबह यह घटना होना बहुत बड़ी किस्मत थी. उन्होंने चेतावनी दी कि अगली बार हम इतने भाग्यशाली नहीं हो सकते. (Photo: USGS)
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के भू-भौतिकी वैज्ञानिक स्टीफन हिक्स ने भी कहा कि यह घटना जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे को दिखाती है. ग्लेशियरों के पिघलने से ऐसे भूस्खलन भविष्य में और ज्यादा हो सकते हैं. इस सुनामी की कोई तस्वीर या वीडियो नहीं है क्योंकि यह सुबह जल्दी हुई थी. (Photo: USGS)
वैज्ञानिकों ने हवाई फोटो और अन्य डेटा के आधार पर पूरी घटना को फिर से बनाया. उन्होंने देखा कि पेड़ कहां तक उखड़े थे, उसी से लहर की ऊंचाई तय की गई. ट्रेसी आर्म फियोर्ड पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय है. (Photo: USGS)
वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर यह लहर दिन के समय आती तो सैकड़ों लोगों की जान जा सकती थी. अब विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर वाले इलाकों में ऐसे खतरों पर नजर रखने की सलाह दे रहे हैं. (Photo: USGS)
जलवायु परिवर्तन सिर्फ गर्मी बढ़ाने या बर्फ पिघलाने तक सीमित नहीं है. यह बहुत बड़े और अचानक प्राकृतिक हादसों को भी जन्म दे सकता है. अलास्का की मेगा सुनामी जलवायु संकट की नई और डरावनी मिसाल बन गई है. (Photo: USGS)