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गणेश चतुर्थी व्रत कथा (Ganesh Chaturthi Vrat Katha)

गणेश चतुर्थी व्रत कथा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश चतुर्थी पर व्रत रखने और भगवान गणेश की कथा सुनने या पढ़ने का विशेष महत्व है. माना जाता है कि इससे जीवन की बाधाएं और संकट दूर होते हैं. भगवान गणेश की कृपा से सुख, समृद्धि, सौभाग्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है तथा दैहिक, दैविक और भौतिक कष्ट कम होते हैं.

गणेश चतुर्थी व्रत कथा
गणेश चतुर्थी व्रत कथा

पुराणों के अनुसार एक बार सभी देवता संकट में घिर गए और परेशान होकर भगवान शिव के पास पहुंचे. उस समय भगवान शिव और माता पार्वती अपने दोनों पुत्र कार्तिकेय और गणेश जी के साथ मौजूद थे. देवताओं की समस्या सुनकर भगवान शिव ने अपने पुत्रों से कहा कि तुम दोनों में से इनकी समस्याओं का निवारण कौन कर सकता है. ऐसे में दोनों ने एक ही स्वर में खुद को योग्य बताया.

 

भगवान शिव असमंजस में पड़ गए कि किसे ये कार्य सौंपा जाए. तो ऐसे में भगवान शिव ने एक तरकीब निकाली और अपने पुत्रों से कहा तुम दोनों में से जो सबसे पहले इस पूरी पृथ्वी का चक्कर लगा कर आएगा, वही देवताओं की मदद करने जाएगा. शिव जी की बात सुनते ही कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठ कर निकल गए. लेकिन गणेश सोचने लगे कि मूषक पर बैठकर वह कैसे इतनी जल्दी पृथ्वी की परिक्रमा कर पाएंगे. बहुत सोच-विचार के बाद वे अपने स्थान से उठे और अपने माता-पिता की सात बार परिक्रमा करके अपने स्थान पर वापस बैठ गए और कार्तिकेय के आने का इंतजार करने लगे.

 

भगवान शिव ने गणेश जी से परिक्रमा न करने का कारण पूछा, तो उन्होंने कहा कि माता-पिता के चरणों में ही समस्त लोक है. उनके इस जवाब से भगवान शिव भी प्रसन्न हो गए और उन्हें देवता की मदद करने का कार्य सौंपा. साथ ही ये भी कहा कि हर चतुर्थी के दिन जो तुम्हारी पूजा और उपासना करेगा उसके सभी कष्टों का निवारण हो जाएगा. कहते हैं कि गणेश चतुर्थी के दिन व्रत कथा पढ़ने और सुनने से सभी कष्टों का नाश हो जाता है.

 

गणेश जी की आरती

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

 

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥

 

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

 

पान चढ़े फल चढ़े और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे,संत करें सेवा ॥

 

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

 

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥

 

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

 

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥

 

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

 

-----समाप्त-----

समाप्त

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