अपना घर बनाना एक इंसान का सबसे बड़ा सपना होता है. इसके लिए व्यक्ति सारी जिंदगी खूब मेहनत करता है. हालांकि एक सुंदर घर में यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि उसमें रहने वालों की जिंदगी कितना खुशहाल है. वास्तु शास्त्र के जानकार शैलेंद्र पांडेय कहते हैं कि नया घर बनवाते समय यह पता होना भी बहुत जरूरी है कि आप कैसी जमीन पर घर बनवा रहे हैं. जमीन की प्रकृति और आकार कैसा है. कहीं उस जमीन पर बना घर भविष्य में किसी बड़े वास्तु दोष की वजह तो नहीं बनेगा? इन सब बातों का आकलन कर लेने के बाद ही उस जमीन पर नए घर का निर्माण करना चाहिए.
अधम भूमि पर नहीं बनवाना चाहिए घर
वास्तु शास्त्र के अनुसार, अधम भूमि पर कभी घर नहीं बनवाना चाहिए. भूमि अधम है या नहीं इसे जांचने का एक तरीका होता है. इसके लिए जमीन के उत्तर दिशा वाले हिस्से में लगभग एक से डेढ़ फुट गहरा गड्ढा खोदा जाता है. फिर निकाली गई मिट्टी को दोबारा उसी गड्ढे में भरा जाता है. यदि गड्ढा भरने के बाद कुछ मिट्टी बच जाए तो भूमि अत्यंत शुभ मानी जाती है. यदि गड्ढा ठीक-ठीक भर जाए तो भूमि सामान्य या मध्यम श्रेणी की मानी जाती है. और अगर गड्ढा भरने में मिट्टी कम पड़ जाए तो ऐसी भूमि अशुभ मानी जाती है.
सिंहमुखी जमीन
वास्तु में जमीन के आकार को भी विशेष महत्व दिया गया है. वास्तु विशेषज्ञ का कहना है कि जो भूखंड आगे से चौड़ा और पीछे से संकरा होता है, उसे सिंहमुखी भूमि कहा जाता है. मान्यता है कि ऐसी जमीन पर घर बनाने से अस्थिरता और मानसिक अशांति बढ़ती है. इसलिए सिंहमुखी भूखंड को रहने के लिए ज्यादा अच्छा नहीं माना जाता है.
श्मशान के आस-पास
वास्तु के अनुसार श्मशान घाट, वीरान जगह या खंडहर हो चुकी किसी पुरानी इमारत के पास भी घर बनाना अच्छा नहीं माना जाता है. ऐसी जगहों पर नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ने की संभावना अधिक रहती है. इस तरह के घरों में रहने वालों को अक्सर तनाव, चिंता, आर्थिक समस्याओं और रोगों से दो चार होना पड़ता है.
मकान के लिए कैसी जमीन होती है शुभ?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, जो जमीन आगे से संकरी और पीछे से चौड़ी होती है, उसे मकान बनाने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है. ऐसी जमीन को गौमुखी भूमि कहा जाता है. ऐसी जमीन को घर बनाने के लिए अपेक्षाकृत अधिक शुभ माना गया है. मान्यता है कि इस प्रकार के भूखंड पर बने घर में रहने वालों को सुख, शांति और स्थिरता प्राप्त होती है.