भारत में '2 जून की रोटी' एक मुहावरे के रूप में खूब प्रचलित है. इस मुहावरे का सार यह है कि वो लोग बहुत भाग्यशाली होते हैं जिन्हें 2 जून की रोटी नसीब होती है. आप इसे घर में पेट भरने लायक भोजन की व्यवस्था या बुनियादी जरूरतों के लिए न्यूनतम आमदनी से भी जोड़ सकते हैं. वहीं, शास्त्रों में भोजन या रोटी को देवी अन्नपूर्णा से जोड़कर देखा जाता है. वास्तु शास्त्र में भी रोटी और अन्न को लेकर महत्वपूर्ण बातें कही गई हैं. वास्तु के अनुसार, रोटी से जुड़ी जाने-अनजाने में हुई कुछ गलतियां घर में भयंकर वास्तु दोष पैदा करती हैं. आइए इनके बारे में जानते हैं.
1. रोटी का बार-बार जलना
रसोई घर को अग्नि तत्व का स्थान माना गया है. कहते हैं कि रसोई में रोटियों का लगातार जलना एक अशुभ संकेत होता है. जली हुई रोटी घर में वास्तु दोष पैदा करती है. ऐसे घरों में अक्सर लोगों के बीच तनाव, धन हानि और नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव देखा जाता है. अगर आपके घर में भी लगातार ऐसा हो रहा है तो इसे इग्नोर करने की बजाए हल खोजने पर ध्यान दें.
2. रोटियां गिनकर बनाना
अक्सर आपने घर के बड़े-बुजुर्गों को रोटियां बनाते वक्त उन्हें गिनने से मना करते जरूर देखा होगा. वास्तु में इसकी वजह बताई गई है. कहते हैं कि रोटी बनाते वक्त उन्हें गिनने से घर की सारी बरकत खत्म हो जाती है. रोटी बनाते वक्त हमेशा यह बात ध्यान रखनी चाहिए. ऐसा कहा जाता है कि कई बार अतिथि बिना बुलाए घर आ जाता हैं और अतिथि भगवान का ही एक स्वरूप होता है. इसलिए उसके लिए आपकी रसोई में कुछ न कुछ जरूर होना चाहिए.
3. रोटी का अपमान
कई घरों में लोग जरूरत से ज्यादा रोटियां बना लेते हैं और बाद में उन्हें कचरे में फेंक देते हैं. वास्तु के अनुसार, अन्न के इस अपमान से मां अन्नपूर्णा और देवी लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं. इसलिए जितनी जरूरत हो, उतना ही भोजन बनाएं तो बेहतर होगा. यदि फिर भी रोटी बच गई हैं तो उन्हें कचरें में फेंकने के बजाए पशु-पक्षियों को डाल दें.
4. गलत दिशा में रसोई होना
वास्तु में रसोई की दिशा का विशेष महत्व बताया गया है. आग्नेय कोण यानी दक्षिण-पूर्व दिशा को रसोई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. यदि रसोई घर ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या घर के मध्य भाग में हो तो वास्तु दोष पैदा होता है. ऐसी स्थिति में घर के खर्च बढ़ सकते हैं और आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ता है. मोटी कमाई के बावजूद घर में कई बार फाके पड़ जाते हैं.