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केदारनाथ, यमुनोत्री के कपाट शीतकाल के लिए बंद

गढ़वाल हिमालय में स्थित विश्व प्रसिद्घ धाम केदारनाथ और यमुनोत्री मंदिरों के कपाट आज भैया दूज के पावन पर्व पर शीतकाल के लिये श्रद्घालुओं के दर्शन हेतु बंद हो गए.

गढ़वाल हिमालय में स्थित विश्व प्रसिद्घ धाम केदारनाथ और यमुनोत्री मंदिरों के कपाट आज भैया दूज के पावन पर्व पर शीतकाल के लिये श्रद्घालुओं के दर्शन हेतु बंद हो गए. केदारनाथ और यमुनोत्री के कपाट बंद होने के साथ ही अब तक चार धामों के नाम से मशहूर तीन धामों के कपाट बंद हो चुके हैं. गंगोत्री मंदिर के कपाट कल अन्नकूट पर्व पर बंद हुए थे जबकि बदरीनाथ मंदिर के कपाट 17 नवंबर को बंद होंगे.

केदारनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी रावल भीमशंकर लिंग शिवाचार्य स्वामीजी ने बताया, ‘मंदिर के कपाट शुक्रवार सुबह आठ बजे पारंपरिक पूजा अर्चना और विधि विधान के साथ वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच शीतकाल के लिये बंद कर दिये गये. इस दौरान भीषण ठंड के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्घालु, मंदिर समिति के अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे.’ उन्होंने बताया, ‘कपाट बंद होने के बाद भगवान शिव की मूर्ति को एक डोली में बैठाकर निकटवर्ती उखीमठ के ओंमकारेशवर मंदिर की ओर रवाना कर दिया गया. भगवान शिव की डोली रामपुर और गुप्तकाशी होते हुए परसों ओमकारेश्वर मंदिर में पहुंचेगी जहां शीतकाल के दौरान उनके दर्शन किये जा सकेंगे.’

रावल ने बताया, ‘इस वर्ष के यात्रा सीजन में कुल 1.52 लाख श्रद्घालु केदारनाथ धाम के दर्शन के लिए पहुंचे और यह संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 50 हजार ज्यादा है.’ उन्होंने कहा कि श्रद्घालुओं की बढती संख्या इस बात का संकेत है कि यात्रा रूट पर यात्रियों के लिये सुविधायें पहले से बेहतर हुई हैं और यात्रा के दौरान सुरक्षा को लेकर भी उनमें विश्वास बढ़ रहा है.

उधर, उत्तरकाशी जिले में स्थित मां यमुना को समर्पित यमुनोत्री मंदिर के कपाट भी आज अनुराधा नक्षत्र में दोपहर 1.15 बजे श्रद्घालुओं के लिये बंद कर दिये गये. पुरोला के उपजिलाधिकारी के के सिंह ने बताया कि विधि विधान और पारंपरिक पूजा अर्चना के साथ मंदिर के कपाट बंद होने के साथ ही मां यमुना की डोली उनके शीतकालीन प्रवास खरसाली के लिये रवाना कर दी गयी.

केदारनाथ और उसके आसपास के क्षेत्रों में वर्ष 2013 के मध्य में भीषण प्राकृतिक आपदा से भयंकर तबाही हुई थी. हालांकि, उसके बाद से केदारनाथ में युद्घस्तर पर पुनर्निर्माण कार्य चल रहा है. चार धामों में सबसे प्रतिष्ठित माने जाने वाले चमोली जिले में स्थित बदरीनाथ धाम के कपाट इस वर्ष 17 नवंबर को बंद होंगे.

हिमालय की उंची पहाड़ियों पर स्थित ये चारों धाम शीतकाल में भीषण ठंड और भारी बर्फवारी की चपेट में रहते हैं और इसलिए इस दौरान उन्हें श्रद्घालुओं के लिये बंद कर दिया जाता है. हर साल अक्तूबर-नवंबर में शीतकाल के लिये बंद होने वाले ये कपाट अगले साल अप्रैल-मई में दोबारा खोल दिये जाते हैं. छह माह के यात्रा सीजन के दौरान देश विदेश से लाखों श्रद्घालु और पर्यटक उत्तराखंड आते हैं. चारधाम यात्रा को गढवाल हिमालय की अर्थव्यवस्था की रीढ माना जाता है.
 
इपनुट: भाषा

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