Sakat Chauth 2026 Katha: हिंदू धर्म में सकट चौथ का व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण और विशेष माना जाता है. कहते हैं कि यह व्रत रखने से संकटहर्ता गणेश जी जीवन के हर संकट को हर लेते हैं. यह व्रत माताएं अपने पुत्रों की लंबी उम्र की कामना के लिए करती हैं. सकट चौथ के दिन शाम को भगवान गणेश का पूजन किया जाता है और उसके बाद पूरे विधि विधान से सकट चौथ की कथा पढ़ी जाती है. तो चलिए पढ़ते हैं सकट चौथ की वह कथा जिसके बिना अधूरा है ये विशेष व्रत.
सकट चौथ की कथा
एक कथा के अनुसार, एक बुज़ुर्ग महिला थी जो रोज मिट्टी के गणेश जी बनाकर पूरे मन से पूजा किया करती थी. लेकिन उसकी परेशानी यह थी कि मिट्टी के गणेश हर दिन गल जाते थे, इसलिए उसे बार-बार नए गणेश बनाने पड़ते थे. उसी बूढ़ी माई के घर के पास एक सेठ जी का मकान बन रहा था, जहां कुछ मिस्त्री काम कर रहे थे. वह बूढ़ी माई मिस्त्रियों के पास गई और बोली, 'मेरे लिए पत्थर के गणेश जी बना दो, ताकि रोज-रोज बनाने की परेशानी खत्म हो जाए.' मिस्त्रियों ने कहा, 'जितने समय और पैसे में हम तुम्हारे लिए पत्थर के गणेश बनाएंगे, उतने में तो अपनी दीवार भी नहीं खड़ी कर पाएंगे.' यह सुनकर बूढ़ी माई को बहुत गुस्सा आया. उसने कहा, 'भगवान करे कि तुम्हारी दीवार कभी सीधी न बने.' उसके इतना कहते ही दीवार सच में टेढ़ी बनने लगी. मिस्त्री दीवार बनाते, फिर तोड़ते और दोबारा बनाते. लेकिन, हर बार दीवार टेढ़ी ही बनती. दिन भर यही चलता रहा और शाम हो गई.
शाम को सेठ जी आए तो उन्होंने देखा कि दिन भर काम होने के बाद भी दीवार खड़ी नहीं हुई है. उन्होंने कारण पूछा. मिस्त्रियों ने पूरी बात बता दी कि एक बूढ़ी माई के श्राप के बाद दीवार सीधी नहीं बन पा रही है. यह सुनकर सेठ जी ने तुरंत बूढ़ी माई को बुलाया और विनम्रता से कहा, 'मां, हमसे गलती हो गई. तुम चाहो तो हम सोने के गणेश जी भी बनवा देंगे, बस हमारी दीवार सीधी करा दो.' सेठ जी ने बूढ़ी माई की श्रद्धा का सम्मान किया और उनके लिए सोने के गणेश जी बनवा दिए. इसके बाद चमत्कार हुआ और सेठ की दीवार अपने आप सीधी बन गई. अंत में सभी ने गणेश जी से प्रार्थना की, 'हे भगवान गणेश, जैसे आपने सेठ की दीवार सीधी की, वैसे ही सबके बिगड़े काम ठीक कर दो और सबपर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखो.'
सकट चौथ की पूजन विधि (Sakat Chauth Pujan Vidhi)
सकट चौथ के दिन सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें. फिर, पूरे दिन फलाहार या निर्जल व्रत रखें और शाम के समय पूजा स्थल को साफ कर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. दीपक जलाकर गणेश जी को रोली, अक्षत, फूल, दूर्वा और तिल-गुड़ का भोग अर्पित करें. इसके बाद सकट चौथ की कथा सुनें या पढ़ें और 'ऊं गं गणपतये नमः' मंत्र का जप करें. रात में चंद्रमा के दर्शन कर जल अर्पित करें और फिर व्रत का पारण करें. माना जाता है कि इस विधि से पूजा करने से संतान की रक्षा होती है और सभी संकट दूर होते हैं.