scorecardresearch
 

झगड़ा-झंझट, गुस्सा और लापरवाही... जरा सी हुई चूक तो ये 15 दिन पड़ जाएंगे भारी

शिवरात्रि के बाद अमावस्या की तिथि पर सूर्यग्रहण लगा और 15 दिन बाद होलिका दहन के दिन चंद्रग्रहण होगा. फरवरी से शुरू हुए अग्नि पंचक के दौरान ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दुर्घटना, आग, और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं.

Advertisement
X
पंचक और होलाष्टक के साथ चंद्रग्रहण बना रहे हैं अशुभ काल
पंचक और होलाष्टक के साथ चंद्रग्रहण बना रहे हैं अशुभ काल

शिवरात्रि बीतने के साथ ही अमावस्या की तिथि पर सूर्यग्रहण लगा और अब इसके ठीक 15 दिन बाद होलिका दहन के मौके पर चंद्रग्रहण लगेगा. यानी एक ही महीने के भीतर दो-दो ग्रहण हो रहे हैं. इसके अलावा 17 फरवरी से अग्नि पंचक की शुरुआत हो चुकी है, जिसे अच्छा नहीं माना जाता है. जैसे ही अग्नि पंचक खत्म होंगे तुरंत ही होलाष्टक लग जाएं. होली के पहले के ये आठ दिन मंगल कार्यों के लिए शुभ नहीं माने जाते हैं. 

15 दिन का समय नहीं है शुभ?
इस तरह शिवरात्रि के बाद से अगले 15 दिन तक का समय शुभ नहीं है और इस दौरान बहुत बचाव करके रहने की जरूरत है. ऐसे में बहुत अधिक नहीं तो कम से कम चार बातों को लेकर खास ध्यान रखें तो भी बहुत बचाव हो सकता है. 

क्या है अग्नि पंचक?
बता दें कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र में गोचर करता है, तो उस समय को पंचक कहा जाता है. पंचक पांच दिनों का होता है. अग्नि पंचक खतरनाक और अशुभ इसलिए होता है, क्योंकि इस दौरान आग की घटनाएं, मृत्यु का भय, दुर्घटनाओं के बुरे योग बनते हैं.

इससे भी बड़ी बात ये है कि इन पांच दिनों में ये घटनाएं पांच बार हो सकती हैं. जिन लोगों की कुंडली पर राहु-केतु की दशा चल रही हो या फिर जिनकी कुंडली में सूर्य या चंद्रमा कमजोर हों. उनके लिए सूर्य और चंद्र ग्रहण के अलावा ये अग्नि पंचक भी निगेटिव असर डाल सकता है. 

Advertisement

Surya Grahan

झगड़ों से बचें, पैनिक न हों
तो सबसे पहले जरूरी है कि पंचक के दौरान और आने वाले 15 दिनों तक जरूरी है कि बेवजह के झगड़े से बचें, क्योंकि सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण सबसे पहले आपके मन-बुद्धि और सामाजिक प्रतिष्ठा पर असर डालते हैं. केतु छाया ग्रह है और भ्रम की स्थिति बनाता है. 

गुस्सा न करें, गलत फैसलों से बचें
इसके साथ ही गुस्से में फैसले न लें, क्योंकि राहु सोचने-समझने की ताकत को कमजोर कर देता है. गुस्से में फैसला तो खैर कभी भी नहीं लेना चाहिए. वहीं अगर किसी मामले में डिलिमा वाली सिचुएशन बन रही है तो उसे रोक दें, स्थिति खुद-ब-खुद क्लियर हो जाएगी. 

सेहत का ध्यान रखें
तीसरा सबसे जरूरी है कि सेहत का ध्यान रखें. अग्नि पंचक आपकी हेल्थ पर भी असर डालता है. इसे अंधविश्वास की तरह न लें. बल्कि इसे साइंटिफिकली सोचें और देखें कि इस दौरान वैसे भी मौसम बदल रहा है. दिन में अधिक गर्मी और शाम होते है ठंड का असर और इन दोनों के कारण तबीयत खराब हो सकती है. बेवजह की यात्राओं से बचें. जरूरी हो तभी निकलें. चंद्रमा और सूर्य की बदल रही गति के कारण मन भी अस्थिर होता है. 

पैसों का सही इस्तेमाल
सबसे आखिरी बात कि पैसों का सोच-समझकर इस्तेमाल करें. क्योंकि पंचक और होलाष्टक के दुष्प्रभाव में धन की हानि भी होती है.

Advertisement

अग्नि पंचक खत्म होते ही होलाष्टक शुरू हो जाएंगे. होली के पहले का ये आठ दिन का समय भी अशुभ माना जाता है. इस दौरान भी खुद का बचाव करना ही चाहिए. होलाष्टक खत्म होने के बाद पूर्णिमा का दिन आएगा और इसी दिन चंद्रग्रहण है. होलिका दहन का दिन भी चिता सूचक होता है. इसलिए इसे भी शुभ नहीं माना जाता है. 

डिस्क्लेमर- यह लेख ज्योतिषीय मान्यताओं, शास्त्रीय व्याख्याओं और परंपरागत विश्वासों पर आधारित है. इसे किसी भी प्रकार की निश्चित भविष्यवाणी, वैज्ञानिक अनुमान या तथ्यात्मक दावा नहीं माना जाना चाहिए.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement