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जो चाहोगे वो मिलेगा... बस मूलांक-भाग्यांक से तय इन 2 दिशाओं में न फैलने दें वास्तु दोष

इंसान को अपने मूलांक और भाग्यांक से जुड़ी दिशाओं को वास्तु दोष से मुक्त रखना चाहिए. यदि मूलांक और भाग्यांक से जुड़ी दिशाओं में वास्तु दोष है तो आदमी चाहे जितनी भी मेहनत कर ले, उसे कभी मनचाहा रिजल्ट नहीं मिलेगा. ऐसे लोग सफलता से हमेशा दूर ही रहते हैं.

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भाग्यांक और मूलांक की दिशाओं को ठीक रखने से आप वो सब प्राप्त कर सकते हैं, जो आप चाहते हैं. (Photo: ITG)
भाग्यांक और मूलांक की दिशाओं को ठीक रखने से आप वो सब प्राप्त कर सकते हैं, जो आप चाहते हैं. (Photo: ITG)

आपके मूलांक या भाग्यांक से जुड़ी दिशाओं को वास्तु रहित होना बहुत जरूरी होता है. आपका मूलांक यानी जिस तिथि को आप पैदा हुए हैं और भाग्यांक (आपकी सम्पूर्ण जन्म तिथि का जोड़) जो भी है. आपने अक्सर देखा होगा कि कई बार कड़ी मेहनत और प्रयास के बाद भी सफलता न मिलने से आदमी हताश हो जाता है. आपके मूलांक या भाग्यांक से जुड़ी दिशा का वास्तु दोष इसके पीछे जिम्मेदार हो सकता है. अपने घर और कार्यस्थल की इन दो दिशाओं को वास्तु दोष रहित रखिए. आपको जल्द ही अच्छे परिणाम मिलने लगेंगे.

भाग्यांक और मूलांक की दिशाओं को ठीक रखने से आप वो सब प्राप्त कर सकते हैं, जिसके लिए आप प्रयास और मेहनत करते हैं या जो भाग्य आपको देना चाहता है. अन्यथा व्यक्ति भाग्य में होते हुए भी उन चीजों को प्राप्त नहीं कर पाता जो ईश्वर उसे देना चाहता है. विशेषकर उस समयकाल में जब इन ग्रहों की दशा चल रही हो.

कुछ लोगों का भाग्यांक और मूलांक एक होने से उनके लिए शुभ अंक भी एक हो सकता है. जिससे शुभ दिशा भी एक ही होगी. अपने भाग्यांक और मूलांक वाली दिशा में बैठकर काम करना या कुछ समय इस दिशा में बिताना भी आपको अच्छे परिणाम देता है.

किस तिथि के लिए कौन सी दिशा

1- नंबर एक सूर्य का अंक है और इसकी दिशा पूर्व है. जिन लोगों का भाग्यांक या मूलांक 1 हो उन्हें अपने घर व कार्यस्थल की पूर्व दिशा को वास्तु रहित रखना चाहिए. इस दिशा में तांबें के सूर्य का लगाना अच्छा है.

2- नंबर दो चंद्रमा का अंक है. चंद्रमा की दिशा नार्थ-वेस्ट (उत्तर-पश्चिम) है. दो मूलांक या भाग्यांक वाले लोगों के लिए नॉर्थ-वेस्ट में जल स्त्रोत का होना शुभफलदायक होगा. जबकि इस दिशा में टॉयलेट या रसोई का होना आपको परेशानियां दे सकती है. 

3- नंबर तीन गुरु बृहस्पति का अंक है, जिनकी दिशा (नार्थ-ईस्ट) यानि ईशान कोण है. देव गुरु बृहस्पति के स्थान पर मंदिर का होना, विशेषकर शिवजी का मंदिर शुभफलदायक होता है.  

4- नंबर चार राहु का है, जिसकी दिशा साउथ-वेस्ट (दक्षिण-पश्चिम) दिशा है. इसे पितरों का स्थान भी कहा जाता है. यहां मुख्य द्वार और किसी गड्ढे का होना शुभ नहीं होता है. पितरों की तस्वीर इस दिशा में लगाना अच्छा है. 

5- नंबर पांच बुध का अंक है, जिन्हें ग्रहों का राजकुमार भी कहते हैं. इनकी दिशा उत्तर दिशा है. इस स्थान पर तुलसी का पौधा, मनी प्लांट, हरियाली और छोटे पेड़ पौधों के साथ जल का स्थान होना अच्छा है. 

6- नंबर छह शुक्र का अंक है, जिसकी दिशा साउथ-ईस्ट (दक्षिण-पूर्व) है. इस दिशा में डिफ्यूजर से प्रतिदिन कपूर जलाना अच्छा है. 

7- नंबर सात केतु का है, जिसका स्थान ब्रह्म स्थान से उत्तर की दिशा में माना जाता है. ब्रह्म स्थान में कोई दोष नहीं होना चाहिए. हालांकि ब्रह्म स्थान का दोष होना हर व्यक्ति के लिए प्रतिकूल प्रभाव ही देता है. 

8- नंबर आठ शनि का अंक है और इसकी दिशा पश्चिम है. पश्चिम दिशा को वास्तु रहित रखना आठ अंक वालों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है. यहां लोहे की अलमारी आदि रखना शुभ है. इच्छा प्राप्ति के लिए पश्चिम दिशा का विशेष महत्व है. 

9- नंबर नौ मंगल का अंक है. इसकी दिशा दक्षिण है. नौ अंक वालों को यदि नाम और प्रसिद्धि हासिल करनी है तो उन्हें अपने घर की दक्षिण दिशा को अच्छा रखना चाहिए. अपने घर की छत पर इस दिशा में हनुमान जी का लाल झंडा लगाएं.

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