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Shadashtak Yog 2026:17 अगस्त तक षडाष्टक योग का साया, 4 राशियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

Shadashtak Yog 2026: 16 जुलाई से शुरू हुआ षडाष्टक योग! जानिए किन 4 राशियों पर मंडरा रहा है खतरा और क्या करें उपाय ताकि करियर व सेहत पर न पड़े बुरा असर.

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ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब दो ग्रह एक-दूसरे से छठे और आठवें भाव में स्थित होते हैं, तो षडाष्टक योग बनता है.
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब दो ग्रह एक-दूसरे से छठे और आठवें भाव में स्थित होते हैं, तो षडाष्टक योग बनता है.

Shadashtak Yog 2026: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की चाल और उनकी आपसी युति का मानव जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है. 16 जुलाई 2026 से आकाश मंडल में एक विशेष स्थिति बनी है, जिसे षडाष्टक योग कहा जा रहा है.  सूर्य और राहु के बीच बने इस अशुभ योग का प्रभाव अगले 30 दिनों तक, यानी 17 अगस्त 2026 तक रहेगा. 

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब दो ग्रह एक-दूसरे से छठे और आठवें भाव में स्थित होते हैं, तो षडाष्टक योग बनता है.  यह स्थिति अक्सर आपसी मतभेद, तनाव और अनपेक्षित चुनौतियों का संकेत देती है.  इस बार सूर्य और राहु की यह युति चार विशिष्ट राशियों के लिए सतर्क रहने का समय लेकर आई है.  इन राशियों के जातकों को विशेष रूप से अपने करियर और स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है. 

इन 4 राशियों को रहना होगा विशेष सावधान:

वृषभ राशि: कार्यस्थल पर बॉस या उच्च अधिकारियों के साथ वैचारिक मतभेद हो सकते हैं.  वाणी में कठोरता से बचें . अपने काम पर ध्यान केंद्रित करें. आर्थिक मामलों में जल्दबाजी में कोई भी निवेश न करें. 

मिथुन राशि: करियर में स्थिरता बनाए रखने के लिए धैर्य का सहारा लें.  नया कार्य शुरू करने के लिए यह समय उपयुक्त नहीं है.  किसी भी बड़े निर्णय को लेने से पहले पूरी जांच-पड़ताल कर लें, अन्यथा हानि हो सकती है. 

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तुला राशि: परिवार और निजी जीवन में तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है. साथी के साथ संबंधों में कटुता आने की संभावना है. अचानक काम का बोझ बढ़ने से मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है, इसलिए विवादों से दूरी बनाए रखें. 

कुंभ राशि: यह 30 दिन कुंभ राशि वालों के लिए परीक्षा की घड़ी की तरह हैं.  स्वास्थ्य में गिरावट और चोट लगने की आशंका है.  वाहन सावधानी से चलाएं. मानसिक शांति के लिए योग व ध्यान का सहारा लें. 

बचाव के उपाय:
ज्योतिष विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस कठिन अवधि में संयम और विवेक का पालन करें.  किसी भी प्रकार के वाद-विवाद में न पड़ें. स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या को नजरअंदाज न करें.  रोजाना ध्यान करना और सकारात्मक सोच बनाए रखना इन नकारात्मक प्रभावों को कम करने में सहायक सिद्ध हो सकता है.

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