Ram-Sita Vivah, Ramayana: फिल्म रामायण के टीजर और गाने ‘मंगल रंग’ को लेकर इन दिनों चर्चा हो रही है. खासतौर पर राम-सीता के विवाह से जुड़े दृश्यों और रस्मों को लेकर लोग अपनी राय रख रहे हैं. ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि आखिर वाल्मीकि रामायण में भगवान राम और माता सीता के विवाह का वर्णन किस तरह किया गया है. विवाह के दौरान कौन-कौन सी रस्में निभाई गई थीं और उस समय विवाह की परंपराएं कैसी थीं? आइए, वाल्मीकि रामायण के बालकांड में दिए गए प्रसंगों के आधार पर जानते हैं राम-सीता विवाह की पूरी कथा.
वाल्मीकि रामायण में राम-सीता विवाह का वर्णन
वाल्मीकि रामायण के बालकांड में भगवान राम और माता सीता की शादी की पूरी कथा मिलती है. मिथिला के राजा जनक ने सीता के स्वयंवर में शर्त रखी थी कि जो भगवान शिव के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी से सीता का विवाह होगा. जब भगवान राम ने धनुष उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाने की कोशिश की, तो धनुष टूट गया. इसके बाद राजा जनक ने सीता का विवाह राम से करने का फैसला किया. फिर राजा दशरथ अपने परिवार और ऋषियों के साथ मिथिला पहुंचे. इसके बाद भगवान राम और उनके भाइयों के विवाह की तैयारियां की गईं. वाल्मीकि रामायण के बालकांड के सर्ग 73 में इन विवाहों की रस्मों का वर्णन मिलता है.
विवाह से पहले हुईं ये तैयारियां
वाल्मीकि रामायण के बालकांड के सर्ग 73 में राम-सीता विवाह से पहले की तैयारियों का जिक्र मिलता है. विवाह का शुभ मुहूर्त तय किया गया. भगवान राम और उनके भाइयों को आभूषणों से सजाया गया. इसके बाद विवाह से जुड़ी मंगल रस्में पूरी की गईं. इस प्रसंग में ‘कौतुक मंगल’ का भी उल्लेख मिलता है.
साथ ही, वाल्मीकि रामायण के बालकांड के सर्ग 73 में बताया गया है कि विवाह के समय ऋषि वशिष्ठ ने वेदी तैयार कराई. इसके बाद वैदिक मंत्रों के साथ अग्नि जलाई गई और उसमें आहुतियां दी गईं. इस तरह भगवान राम और माता सीता के विवाह में अग्नि को विशेष महत्व दिया गया.
राजा जनक ने कैसे सौंपा माता सीता का हाथ?
वाल्मीकि रामायण के बालकांड के सर्ग 73 में बताया गया है कि माता सीता को सजाकर भगवान राम के सामने लाया गया. इसके बाद राजा जनक ने राम से कहा कि सीता उनकी पुत्री हैं और धर्म के कामों में उनका साथ देंगी. फिर उन्होंने सीता का हाथ भगवान राम के हाथ में सौंप दिया. इस प्रसंग में पिता द्वारा अपनी पुत्री का हाथ वर को सौंपने का वर्णन मिलता है. इसे आज की कन्यादान और पाणिग्रहण की परंपराओं से जोड़कर देखा जाता है.
विवाह के समय पवित्र जल का प्रयोग
वाल्मीकि रामायण के बालकांड के सर्ग 73 में बताया गया है कि माता सीता का हाथ भगवान राम को सौंपते समय राजा जनक ने मंत्रों के साथ जल अर्पित किया. इसके बाद देवताओं और ऋषियों के प्रसन्न होने, नगाड़े बजने और आकाश से फूलों की वर्षा होने का वर्णन मिलता है.
अग्नि की परिक्रमा के साथ संपन्न हुआ विवाह
वाल्मीकि रामायण के बालकांड के सर्ग 73 में भगवान राम के साथ उनके भाइयों के विवाह का भी वर्णन मिलता है. राजा जनक ने लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के विवाह की व्यवस्था भी की थी. ऋषि वशिष्ठ ने वैदिक रीति से विवाह की रस्में पूरी कराईं. श्लोक 35-36 के अनुसार, चारों भाइयों ने अपनी पत्नियों के साथ अग्नि, वेदी, राजा जनक और ऋषियों की परिक्रमा की. इसके बाद विवाह की रस्में पूरी हुईं.
क्या वाल्मीकि रामायण में हल्दी और मेहंदी का जिक्र है?
राम-सीता के विवाह की बात आती है, तो यह सवाल भी उठता है कि क्या उस समय हल्दी और मेहंदी की रस्में होती थीं. वाल्मीकि रामायण के बालकांड के सर्ग 73 में विवाह से पहले की मंगल रस्मों, अग्नि की स्थापना, पवित्र जल के प्रयोग और अग्नि की परिक्रमा का वर्णन मिलता है. हालांकि, इस प्रसंग में आज की तरह हल्दी और मेहंदी लगाने की रस्मों का साफ तौर पर जिक्र नहीं है.