scorecardresearch
 

Premanand Maharaj: भूत सच में होते हैं या नहीं? प्रेमानंद महाराज ने दिया चौंकाने वाला जवाब

Premanand Maharaj: वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज ने अपने प्रवचन में बताया कि भूत कैसे बनते हैं और क्या सच में लोग उन्हें देख सकते हैं. उन्होंने यह भी समझाया कि भगवान के नाम की शक्ति से नकारात्मक शक्तियों से कैसे बचा जा सकता है.

Advertisement
X
प्रेमानंद महाराज ने बताया भूतों से जुड़ा ये सच (Photo: Instagram screengrab)
प्रेमानंद महाराज ने बताया भूतों से जुड़ा ये सच (Photo: Instagram screengrab)

Premanand Maharaj: भूतों के बारे में लोगों की अलग-अलग मान्यताएं हैं. आमतौर पर लोग भूत को किसी ऐसे व्यक्ति की आत्मा मानते हैं, जिसकी मृत्यु के बाद इच्छाएं अधूरी रह गई हों. लोग यह भी मानते हैं कि भूत पुराने घरों, जंगलों या सुनसान जगहों पर रहते हैं और कभी-कभी लोगों को दिखाई भी दे सकते हैं, ऐसी आत्मा को ही भूत कहा जाता है. हालांकि विज्ञान के अनुसार, भूत होने का कोई पक्का प्रमाण नहीं मिला है. इसलिए, कई लोग इसे केवल डर, कल्पना या लोक-कथाओं से जुड़ी बात मानते हैं. इसी विषय से जुड़े एक प्रश्न का उत्तर वृंदावन मथुरा के जाने माने बाबा प्रेमानंद महाराज ने दिया. 

भूत कौन होते हैं?

प्रेमानंद महाराज के प्रिय शिष्य नवल नागरी बाबा ने उनसे प्रश्न पूछा कि भूत कैसे दिखते हैं और भूत बनता कौन है? 

तो महाराज जी ने उत्तर देते हुए कहा कि 'जैसे किसी ने आत्महत्या कर ली या किसी का अचानक एक्सीडेंट हो गया या किसी ने बहुत बड़ा पाप किया है तो ऐसे हमें कई भूतों के दर्शन वृंदावन में हुए हैं. दरअसल, यह स्थान भूतेश्वर भगवान के अधीन माना जाता है. मथुरा में स्थित भूतेश्वर भगवान का ही शासन वृंदावन में भी माना जाता है.'

भूत दिखते कैसे हैं?

आगे नवल नागरी प्रश्न पूछते हैं कि भूत देखने में कैसे होते हैं? तो इस प्रश्न का उत्तर देते हुए महाराज जी कहते हैं कि, 'उनकी एक एक क्षण में आकृति बदलती रहती है. वो ऐसे नहीं हैं कि अगर स्त्री रूप में प्रकट हुए तो उनका वहीं रूप रहेगा. एक मिनट में देखते देखते उनका भयावह रूप हो जाएगा या एक मिनट में एकदम घृणित रूप हो जाएगा या अचानक बड़ा ही सुंदर रूप हो जाएगा.'

Advertisement

क्या कोई भी भूतों को देख सकता है?

आगे प्रेमानंद महाराज हंसते हुए कहते हैं कि, 'अगर वो समझेंगे कि आपके द्वारा उनका कल्याण हो जाएगा, तो ही मिलेंगे. लेकिन अगर उन्हें लगे कि देखने से ही वह प्राण त्याग देगा और भूत बन जाएगा, तो फिर क्यों मिलेंगे? अगर वो समझेंगे कि हम देखें और इसका हार्ट फेल हो जाएगा, तो काहे को आएंगे? वो नहीं आएंगे. वो तो वहीं जाते हैं, जहां अपना कल्याण कराना हो.'

कष्टों का सामना करती है आत्मा

आगे महाराज जी कहते हैं कि, 'इतना कष्ट होता है भूत योनि में कि देखो, नदियां बह रही हैं लेकिन वे एक बूंद पानी भी नहीं पी सकते, न एक कौर भोजन पा सकते हैं. संतों के सामने तो वे अपना कल्याण कराने के लिए जाते हैं. तमोगुण से युक्त प्राणियों पर ही उनका ज्यादा असर रहता है. जो लोग गलत आचरण करते हैं और अपवित्र कर्मों में लगे रहते हैं, उनके ऊपर भूतों का आवेश होता है.'

'लेकिन ऐसे भूत किसी को छू नहीं सकते. ऐसा थोड़ी है कि जो व्यक्ति नाम और मंत्र का स्मरण कर रहा है, उसे भूत स्पर्श कर ले. इतनी ताकत उनमें नहीं होती, वे तो भस्म हो जाएंगे. इसलिए कहा भी गया है- भूत पिशाच निकट नहीं आवे. इसलिए डरना नहीं चाहिए. भगवान का नाम और भगवान के भक्तों का नाम लेने से कोई भी नकारात्मक शक्ति पास नहीं आ सकती. भगवान के नाम और उनके भक्तों में बहुत बड़ा सामर्थ्य होता है.'

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement