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Quote of the Day by Milkha Singh: भाग्य के भरोसे न रहें, संकल्प और अनुशासन से खुद लिखें अपनी तकदीर

मिल्खा सिंह ने गरीबी, अकेलापन और संसाधनों की कमी के बावजूद खुद को टूटने नहीं दिया. अपने लक्ष्य के प्रति हमेशा ईमानदार रहे और परिश्रम करने में कभी कसर नहीं छोड़ी. आखिरकार दुनिया के सामने खुद को एक सफल एथलीट के रूप में स्थापित किया.

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मिल्खा सिंह का जीवन एक स्पष्ट उदाहरण है कि इंसान की तकदीर परिस्थितियां नहीं, बल्कि फैसले तय करते हैं. (Photo: ITG)
मिल्खा सिंह का जीवन एक स्पष्ट उदाहरण है कि इंसान की तकदीर परिस्थितियां नहीं, बल्कि फैसले तय करते हैं. (Photo: ITG)

'द फ्लाइंग सिख' कहे जाने वाले मशहूर ट्रैक एंड फील्ड धावक मिल्खा सिंह का यह विचार आज भी कई लोगों को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है. यह केवल एक प्रेरणादायक पंक्ति नहीं, बल्कि उनके पूरे जीवन का सार है. बचपन से लेकर जवानी तक बेहद कठिन परिस्थितियों में जीने वाले मिल्खा सिंह ने अपने संघर्ष, मेहनत और मजबूत इरादों के दम पर अपनी पहचान बनाई थी. मिल्खा जीवन में कभी भाग्य के भरोसे नहीं बैठे. उन्होंने कड़ी मेहनत और अनुशासन से अपनी तकदीर खुद संवारी थी.

मिल्खा सिंह का जीवन एक स्पष्ट उदाहरण है कि इंसान की तकदीर परिस्थितियां नहीं, बल्कि फैसले तय करते हैं. भारत-पाकिस्तान विभाजन के दर्द से गुजरने के बाद उन्होंने कभी हार नहीं मानी. गरीबी, अकेलापन और संसाधनों की कमी के बावजूद खुद को टूटने नहीं दिया. अपने लक्ष्य के प्रति हमेशा ईमानदार रहे और परिश्रम करने में कभी कसर नहीं छोड़ी. आखिरकार दुनिया के सामने खुद को एक सफल एथलीट के रूप में स्थापित किया.

मिल्खा सिंह का मानना था कि केवल सपने देखने से सफलता नहीं मिलती है. सपनों को सच करने के लिए अनुशासन और निरंतर अभ्यास बहुत जरूरी होता है. यह छूटा तो आप दुनिया की रेस में पिछड़ जाएंगे. यही वजह थी कि मिल्खा सिंह घंटों मैदान पर पसीना बहाते थे. अपने सीने में जल रही आग को उन्होंने कभी ठंडा नहीं होने दिया, बल्कि खुद को उसमें तपाकर और मजबूत बना लिया.

फ्लाइंग सिंख मिल्खा सिंह ने 1958 में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीता था. उन्होंने 1958 में टोक्यो में आयोजित एशियन गेम्स में दो गोल्ड (200 मीटर और 400 मीटर) जीते थे. इसके अलावा,  1962 में जकार्ता में आयोजित एशियन गेम्स में भी उनके खाते में दो गोल्ड आए थे. 1958 में कटक में आयोजित नेशनल गेम्स ऑफ इंडिया में भी उन्होंने दो गोल्ड जीते थे.

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युवाओं के लिए प्रेरणा
आज के दौर में जो युवा छोटी-छोटी असफलताओं से निराश हो जाते हैं, उनके लिए मिल्खा सिंह का यह संदेश बहुत महत्वपूर्ण माना जा सकता है. उनका यह विचार हमें जीवन में सफलता पाने के लिए भाग्य से ज्यादा मेहनत पर भरोसा करने के लिए प्रेरित करता है. यह हमें बताता है कि हाथ की लकीरें कभी इंसान का भाग्य तय नहीं करती हैं, बल्कि हमारा संकल्प, कर्म, अनुशासन और मेहनत ही हमें सफल बना सकता है.

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