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Good Friday 2026: गुड फ्राइडे कल, जानें- जीसस को सूली पर चढ़ाए जाने के दिन को गुड क्यों कहते हैं

3 अप्रैल को गुड फ्राइडे है. ईसाई समुदाय के लोगों में इसे एक पवित्र दिन माना गया है. मान्यता है कि इसी दिन जीसस को सूली पर चढ़ाया गया था. लेकिन क्या आपने सोचा है कि जिस दिन जीसस को सूली पर चढ़ाया गया, उसे आखिर गुड क्यों कहते हैं.

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गुड फ्राइडे के दिन ही ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था. (Photo: ITG)
गुड फ्राइडे के दिन ही ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था. (Photo: ITG)

कल गुड फ्राइडे है. ईसाई धर्म के लोगों के लिए यह एक पवित्र और शोकभरा दिन माना जाता है. कहते हैं कि इसी दिन करीब 2 हजार लोगों के सामने ईसा मसीह यानी जीसस को सूली पर चढ़ाया गया था. इसलिए इस दिन लोग चर्चों में जाकर विशेष प्रार्थना करते हैं. बहुत से लोग व्रत रखते हैं या मौन धारण करते हैं. इस शोक को प्रकट करने का सबका अपना-अपना तरीका होता है. लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि जिस दिन जीसस को सूली पर चढ़ाया गया, आखिर उसे गुड क्यों कहते हैं. आइए आज आपको इस बारे में विस्तार से बताते हैं.

जीसस को सूली पर चढ़ाए जाने के दिन को गुड कहने के पीछे कई अलग-अलग तर्क दिए जाते हैं. इसमें पहला तर्क तो ईसाइयों के पवित्र ग्रंथ बाइबल में मिलता है. बाइबल की किताब के पहले पद सभोपदेशक 7:1 (Ecclesiastes 7:1) के अनुसार, मृत्यु का दिन जन्म के दिन से ज्यादा पवित्र होता है. इसलिए जीसस के सूली वाले दिन को गुड फ्राइडे कहा जाता है.

कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि लैटिन भाषा में गुड का एक मतलब होली (Holy) यानी पवित्र भी होता है. ग्रीक साहित्य और रोमन्स की भाषा में भी इसे पवित्र शुक्रवार ही कहते हैं. जीसस को शुक्रवार के दिन सूली पर चढ़ाया गया था. इसी वजह से इसे गुड फ्राइडे कहा जाता है. वैसे इसे होली डे, ब्लैक फ्राइडे और ग्रेट फ्राइडे जैसे नामों से भी जाना जाता है.

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ईसा मसीह को क्यों सूली पर चढ़ाया गया?
ऐसा कहा जाता है कि आज से करीब 2000 साल पहले ईसा मसीह यरुशलम के गैलिली प्रांत में लोगों को अहिंसा, एकता मानवता, परोपकार की शिक्षा देते थे. उनके इन्हीं उपदेशों, प्रवचनों से प्रभावित होकर लोगों ने उन्हें ईश्वर या ईश्वर का पुत्र कहना शुरू कर दिया. इससे वहां अंधविश्वास फैलाने वाले धर्म गुरुओं काम ठप पड़ गया. उन्हें ईसा मसीह से चिढ़ होने लगी. उधर ईसा मसीह की लोकप्रियता बढ़ती जा रही थी. इधर अंधविश्वास फैलाने वाले धर्मगुरुओं की ईर्ष्या भी चरम पर थी.

तब इन धर्मगुरुओं ने मिलकर एक साजिश रची और रोम के शासक पिलातुस से ईसा मसीह की शिकायत कर दी. उन्होंने पिलातुस से कहा कि ईसा मसीह खुद को ईश्वर का बेटा बताता है. उनकी बातों से लोग गुमराह हो रहे हैं. इसी वजह से ईसा मसीह पर राजद्रोह का आरोप लग गया और उन्हें हजारों लोगों के सामने सूली पर चढ़ाने का फरमान जारी हो गया. ईसा मसीह को कांटों का ताज पहनाकर कोड़े-चाबुक से मारते हुए क्रूज तक ले जाया गया. इसके उनके हाथों में कील ठोककर सूली पर लटका दिया गया.

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