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Garuda Purana: ये 5 पाप बनते हैं अकाल मृत्यु की वजह, गरुड़ पुराण में है इसका जिक्र

Garuda Purana:गरुड़ पुराण का विशेष महत्व मृत्यु के बाद की यात्रा को समझाने में है. इसमें बताया गया है कि मृत्यु के बाद आत्मा किन-किन मार्गों से गुजरती है और अपने किए हुए कर्मों के अनुसार उसे सुख या दुख भोगना पड़ता है. यही कारण है कि हिंदू परंपरा में किसी व्यक्ति के निधन के बाद गरुड़ पुराण का पाठ किया जाता है.

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कर्म और पुनर्जन्म
कर्म और पुनर्जन्म

Garuda Purana:  हिंदू धर्म में गरुड़ पुराण का विशेष स्थान है. यह केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के रहस्यों का ज्ञान भी है. गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु ने गरुड़ को यह बताया कि जीवन में किए गए कर्म और पाप केवल वर्तमान जन्म में ही नहीं, बल्कि आत्मा की यात्रा और जन्म-मरण चक्र पर भी गहरा असर डालते हैं. गरुड़ पुराण में कुछ ऐसे विशेष पापों का जिक्र है, जो न केवल मनुष्य की उम्र को घटा सकते हैं बल्कि अकाल मृत्यु की वजह भी बन सकते हैं. ये पाप आत्मा को नरक के मार्ग पर ले जाते हैं और जीवन में गंभीर परेशानियां पैदा करते हैं.

ब्राह्मणों का अपमान
इन पापों में प्रमुख हैं – ब्राह्मणों का अपमान करना और हिंसा करना. धर्मग्रंथों में बताया गया है कि ज्ञान और संस्कार का आदर करना बेहद जरूरी है. ब्राह्मण या विद्वानों का अपमान करना केवल सामाजिक अनुशासन को ही नहीं तोड़ता, बल्कि व्यक्ति की आत्मा पर भी विपरीत प्रभाव डालता है. 

माता-पिता का तिरस्कार करना

दूसरा बड़ा पाप है माता-पिता, गुरु और देवताओं का तिरस्कार करना. जीवन में जितना सम्मान और कृतज्ञता हम अपने माता-पिता, शिक्षकों और भगवान के प्रति दिखाते हैं, उतना ही हमारा जीवन अच्छा और सुख से भरपूर होता है. इनके बातों का ना मानना बेहद नुकसानदायक होता है.

पराई स्त्री के साथ व्यभिचार

इसके अलावा, पराई स्त्री के साथ व्यभिचार, झूठ बोलना, चोरी करना, जीवों की हत्या और मांसाहार करना भी ऐसे पाप हैं जो मनुष्य को आत्मिक अंधकार में डाल सकते हैं. ये कर्म केवल समाज और दूसरों को ही नहीं, बल्कि स्वयं की आत्मा को भी नुकसान पहुंचाते हैं.

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लेकिन गरुड़ पुराण सिर्फ पापों की चेतावनी नहीं देता, बल्कि इनसे बचने के उपाय भी बताता है. यह हमें बताता है कि अगर हम नियमित रूप से भगवान विष्णु की पूजा करें, गंगा में स्नान करें, दान करें और माता-पिता का आदर और आज्ञा का पालन करें, तो पापों के प्रभाव को कम किया जा सकता है. इसके साथ ही सत्य बोलना, अहिंसा का पालन करना और शुद्ध आहार अपनाना आत्मा को पवित्र बनाए रखता है. 

गरुड़ पुराण के अनुसार, हमारा जीवन हमारे किए हुए कर्मों का नतीजा है. अच्छे कर्म और पुण्य हमें स्वर्ग की ओर ले जाते हैं, जबकि बुरे कर्म और पाप हमारी आत्मा को नरक की ओर खींचते हैं.

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