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Chandrashila: 'उत्तराखंड की ये जगह घूमने की नहीं', तुंगनाथ मंदिर के पंडित ने लोगों को क्या बताया

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है. इस वीडियो में तुंगनाथ मंदिर के एक पुजारी लोगों से कह रहे हैं कि तुंगनाथ मंदिर के ऊपर स्थिति चंद्रशिला घूमने की जगह नहीं है. चंद्रशिला पितरों का स्थान है. वहां पितरों का तर्पण होता है और पुजारी भी सिर्फ पूजा करने के उद्देश्य से वहां नंगे पांव जाते हैं.

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पूरे पंच केदार में तुंगनाथ इकलौता ऐसा धाम है जहां पितरों का तर्पण होता है. (Photo: ITG)
पूरे पंच केदार में तुंगनाथ इकलौता ऐसा धाम है जहां पितरों का तर्पण होता है. (Photo: ITG)

उत्तराखंड की चार धाम यात्रा जारी है. रोजाना हजारों श्रद्धालु बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम के दर्शन करने पहुंच रहे हैं. लेकिन तपोभूमि के ऐसे कई पवित्र और रहस्यमय स्थल हैं जो पर्यटकों-श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं. इन्हीं में से एक है-चंद्रशिला. यह दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिर तुंगनाथ के ठीक ऊपर स्थित एक प्रसिद्ध शिखर है. उत्तराखंड आने वाले कई यात्रियों की टॉप लिस्ट में यह जगह शामिल रहती है. लोगों का मानना है कि इस जगह का नजारा अलौकिक है. हालांकि तुंगनाथ मंदिर के पंडित इस जगह को टूरिस्ट स्पॉट न समझने की हिदायत दे रहे हैं.

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है. इस वीडियो में तुंगनाथ मंदिर के एक पुजारी लोगों से कह रहे हैं कि तुंगनाथ मंदिर के ऊपर स्थिति चंद्रशिला घूमने की जगह नहीं है. चंद्रशिला पितरों का स्थान है. वहां हम लोग (पुजारी) जब जाते हैं तो नंगे पैर जाते हैं और सिर्फ पूजा के लिए ही जाते हैं. पुजारी ने लोगों से कहां कि वो कोई घूमने की जगह नहीं है. वो इस धाम का शिखर है. इसलिए उसे टूरिस्ट स्पॉट न बनाएं. 

पुजारी ने आगे बताया कि गंगा किनारे पूरे पंच केदार में तुंगनाथ इकलौता ऐसा धाम है जहां पितरों का तर्पण होता है. तुंग का मतलब होता है सबसे ऊंचा और नाथ का मतलब स्वामी. इसलिए इस जगह के प्रति लोगों की बड़ी आस्था है.

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चंद्रशिला में चंद्रमा ने की थी तपस्या
तुंगनाथ मंदिर के पुजारी ने लोगों को बताया कि जब चंद्रमा को क्षय रोग का श्राप मिला था, तब उन्होंने चंद्रशिला आकर ही तपस्या कर इस रोग से मुक्ति पाई थी. अब सवाल उठता है कि चंद्रमा ने चंद्रशिला में ही तपस्या क्यों की. इस पर पुजारी ने बताया कि यह धाम सतयुग में महादेव का घर था. महादेव के शिखर पर मां गंगा और स्वयं चंद्र देव विराजते हैं.

स्कंद पुराण के केदार खंड में इसका वर्णन है कि तुंगनाथ धाम के शिखर पर मां गंगा की आकाश कामिनी धारा का उद्गम स्थान है. चंद्रशिला के सामने ही रावण शिला भी है. यहां रावण ने तपस्या कर दिव्य शस्त्र प्राप्त किए थे. रावण सहिंता के अनुसार, जब भगवान राम ने रावण का वध किया तो उन्हें ब्रह्म हत्या को दोष लगा था. इसलिए भगवान राम ने पहले देवप्रयाग में तप किया. जब उन्हें पूरी तरह मुक्ति नहीं मिली तो राम ने नारायण रूप में ही इस धाम में मोक्ष प्राप्त किया था.

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