Chaitra Navratri 2026: 19 मार्च यानी कल से चैत्र नवरात्र शुरू हो रहे हैं. इस वर्ष चैत्र नवरात्र 19 मार्च से लेकर 27 मार्च तक रहेंगे. नवरात्र में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों को पूजने का विधान है. इसकी शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना के साथ होती है. इस दिन कलश स्थापना के बाद ही लोग उपवास और देवी की विधिवत पूजा आरंभ करते हैं. घर में पूरे नौ दिन सात्विकता और शुद्धि का ख्याल रखा जाता है. फिर अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन के बाद पारण किया जाता है. नवरात्र के शुभ अवसर पर घटस्थापना और व्रत से जुड़ी तमाम जानकारी के लिए जुड़े रहिए Aajtak.in के साथ...
07.37 PM: नवरात्र में किन चीजों का दान करें?
नवरात्र के पावन दिनों में दान-धर्म के कार्य करने का पुण्य कई गुना अधिक होता है. नवरात्र में आप वस्त्र, फल, फूल, सुहाग सामग्री या चावल, आटा, गेहूं, चीनी जैसी किसी भी खाद्य सामग्री का दान कर सकते हैं. सामर्थ्य के अनुसार धन का दान भी किया जा सकता है. इसके अलावा आप वार के हिसाब से भी दान कर सकते हैं. जैसे- नवरात्र गुरुवार से शुरू हो रहे हैं तो पहले दिन आप बृहस्पति से जुड़ी चीजों का दान कर सकते हैं. इस दिन आप चने की दाल, हल्दी, पीले वस्त्र, केला, पीली मिठाई या केसर का दान करें तो उत्तम होगा.
07.11 PM: घटस्थापना का शुभ मुहू्र्त क्या है?
19 मार्च को शुरू हो रहे चैत्र नवरात्र में घटस्थापना के दो शुभ मुहूर्त रहने वाले हैं. पहला शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 02 मिनट से सुबह 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगा. इसके बाद, आप अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक घटस्थापना कर सकेंगे.
06.49 PM: नवरात्र के 9 दिन 9 देवियों की पूजा
गुरुवार, 19 मार्च 2026- मां शैलपुत्री
शुक्रवार, 20 मार्च 2026- मां ब्रह्मचारिणी
शनिवार, 21 मार्च 2026- मां चंद्रघंटा
रविवार, 22 मार्च 2026- मां कूष्मांडा
सोमवार, 23 मार्च 2026- मां स्कंदमाता
मंगलवार, 24 मार्च 026- मां कात्यायनी
बुधवार, 25 मार्च 2026- मां कालरात्रि
गुरुवार, 26 मार्च 2026- मां महागौरी
शुक्रवार, 27 मार्च 2026- मां सिद्धिदात्री
06.32 PM: कलश को रखने का सही तरीका क्या है?
घटस्थापना का कलश हमेशा माता के बाईं तरफ और आपके दाईं तरफ होना चाहिए. कलश कभी भी खाली जमीन पर नहीं रखना चाहिए. कलश के नीचे चावल, गेहूं या किसी धान को जरूर रखना चाहिए. आप चाहें तो चावल और फूल की पत्तियों के ऊपर भी कलश स्थापित कर सकते हैं. यदि आप अखंड ज्योति जलाने वाले हैं तो उसे कलश के पास ही स्थापित करना चाहिए.
06.24 PM: घटस्थापना से पहले क्यों साफ-सफाई जरूरी है?
ज्योतिषाचार्य आचार्य राज मिश्रा ने बताया कि श्रीरामचरितमानस की एक प्रसिद्ध चौपाई है- 'निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा.' यानी पूजा के समय स्थान और हृदय की निर्मलता महत्वपूर्ण है. परमात्मा शुद्धता और स्वच्छता को ही पसंद करते हैं. इसलिए कलश स्थापना से पहले तन-मन और स्थल को जरूर स्वच्छ करना चाहिए. घटस्थापना से पहले स्थल की गंगाजल से शुद्धता जरूर करें.
06.11 PM: नवरात्र में पहले दिन किस देवी की पूजा होगी?
नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है. शास्त्रों में इन्हें हिमालय पुत्री बताया गया है. मां शैलपुत्री को पीले या सफेद फूल अर्पित किए जाते हैं. देवी की सफेद या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाया जाता है. पूजा के बाद मां शैलपुत्री के मंत्रों का जाप करना चाहिए. उनकी कथा सुननी चाहिए.
05.55 PM: कलश स्थापना के समय इन मंत्रों का करें जाप
1. ॐ आ जिघ्र कलशं मह्या त्वा विशन्त्विन्दव:। पुनरूर्जा नि वर्तस्व सा नः सहस्रं धुक्ष्वोरुधारा पयस्वती पुनर्मा विशतादयिः।।
2. ॐ दुं दुर्गायै नमः
3. ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे'
05.37 PM: घटस्थापना में किन बातों का रखें ध्यान?
सुबह जल्दी उठकर स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र पहनें. शारीरिक और मानसिक शुद्धि के बाद ही कलश को स्पर्श करें. कलश स्थापना के समय ध्यान रखें कि वहां बैठने के लिए थोड़ा खाली स्थान जरूर होना चाहिए. ताकि वहां बैठकर ध्यान, जप या पाठ आसानी से किया जा सके. आस-पास गंदगी नहीं होनी चाहिए. जिस स्थान पर कलश स्थापित किया गया है, उसे कभी सूना नहीं छोड़ना चाहिए. वहां हर वक्त कोई न कोई मौजूद होना चाहिए. शौचालय, स्नानघर या रसोई के पास कभी घटस्थापना न करें.
05.20 PM: किस दिशा में करें घटस्थापना?
नवरात्र में घटस्थापना के लिए ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को सबसे उत्तम माना गया है. इसलिए इसी दिशा में मां दुर्गा की प्रतिमा और कलश स्थापित करना अच्छा माना जाता है. वहीं पूजा करते समय व्यक्ति का मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए. ध्यान रहे कि कलश हमेशा चंदन की लकड़ी या एक साफ पाटे पर करना अच्छा माना जाता है. इसके पास किसी तरह की गंदगी भी नहीं होनी चाहिए.
05.08 PM: घटस्थापना की विधि क्या है?
नवरात्र के पहले दिन होने वाली घटस्थापना की विधि बेहद सरल है. घटस्थापना का मतलब कलश स्थापित करना है. सबसे पहले एक मिट्टी, ताम्बे या पीतल का कलश लें. कलश के ऊपर एक कलावा या मौली बांधें और उस पर स्वस्तिक बनाएं. इसके बाद इसमें गंगाजल डालें. ऊपर से अक्षत (चावल), सिक्का, सुपारी, हल्दी की गांठ, कमलगट्टा और एक चांदी का सिक्का डाल दें. यदि आपके पास चांदी का सिक्का नहीं है तो एक रुपए का सिक्का भी डाल सकते हैं. कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते बांध दें. फिर एक नारियल पर चुनरी लपेटकर कलश के ऊपर रख दें. इसके बाद उस कलश को देवी की चौकी या प्रतिमा के पास स्थापित कर दें. इस विधि को ही घटस्थापना कहा जाता है.