Trigrahi Yog: वैदिक ज्योतिष में ग्रहों का गोचर किसी बड़ी खगोलीय घटना से कम नहीं होता. 22 जून 2026 को ग्रहों का राजकुमार बुध अपनी राशि परिवर्तित कर कर्क राशि में प्रवेश करने जा रहा है. यह गोचर इसलिए भी विशेष है क्योंकि कर्क राशि में पहले से ही देवगुरु बृहस्पति और शुक्र ग्रह विराजमान हैं. बुध के आते ही कर्क राशि में बृहस्पति, शुक्र और बुध की युति से एक शक्तिशाली त्रिग्रही योग का निर्माण होगा. ज्योतिष शास्त्र में तीन ग्रहों का एक साथ आना बहुत प्रभावशाली माना जाता है, लेकिन क्या यह योग सभी राशियों के लिए लाभकारी होगा?
क्यों हर किसी के लिए शुभ नहीं है यह त्रिग्रही योग?
कर्क एक जल तत्व की राशि है, और यहां इन तीन ग्रहों का मिलन भावनाओं और तार्किक क्षमता के बीच असंतुलन पैदा कर सकता है.
बुध और बृहस्पति का प्रभाव: जहां बुध बुद्धि का कारक है, वहीं बृहस्पति ज्ञान का. कर्क राशि में इनकी युति कई बार व्यक्ति को अति-विचारक' (Overthinker) बना देती है, जिससे निर्णय लेने में देरी होती है.
शुक्र और बुध की स्थिति: शुक्र प्रेम और सुख का प्रतीक है. बुध के साथ इसकी युति रिश्तों में उलझनें पैदा कर सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी कुंडली में पहले से ही जल तत्व की प्रधानता है.
भावनात्मक उतार-चढ़ाव: कर्क राशि चंद्रमा की राशि है, जो मन का कारक है. इन तीन ग्रहों के दबाव से मन में बेचैनी, अनिर्णय की स्थिति और पारिवारिक विवाद बढ़ने की प्रबल संभावना है.
मेष राशि: इस गोचर के दौरान मेष राशि के जातकों को अपनी वाणी में संयम रखने की आवश्यकता है. परिवार में किसी बात को लेकर मतभेद हो सकते हैं. कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ तालमेल बिठाने में दिक्कत आ सकती है.
सिंह राशि: बुध, शुक्र और गुरु की यह युति सिंह राशि वालों के लिए खर्चों में वृद्धि ला सकती है. अचानक से धन हानि के योग बन सकते हैं, इसलिए बजट बनाकर चलना ही समझदारी होगी.
धनु राशि: धनु राशि के जातकों को इस अवधि में मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है. कार्यक्षेत्र में काम का दबाव बढ़ेगा .
मीन राशि: मीन राशि वालों के लिए यह त्रिग्रही योग मिला-जुला फल देगा. हालांकि आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, लेकिन प्रेम संबंधों में गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं.
नकारात्मक प्रभाव को कम करने के सरल उपाय
यदि आप इस गोचर के दौरान किसी भी प्रकार की नकारात्मकता महसूस कर रहे हैं, तो ये उपाय आपकी मदद कर सकते हैं.
गणेश उपासना: बुध के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए प्रतिदिन भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करें. ॐ गं गणपतये नमः का जाप करें
शिवलिंग पर जल अर्पण: कर्क राशि चंद्रमा की है, इसलिए भगवान शिव की पूजा इस अवधि में सबसे अधिक फलदायी सिद्ध होगी.
सफेद वस्तुओं का दान: मानसिक शांति के लिए सोमवार के दिन चावल या दूध का दान करें.
तुलसी की सेवा: नियमित रूप से तुलसी के पौधे में जल दें, इससे घर की ऊर्जा शुद्ध रहती है.