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बर्थडे से पहले कृष्ण काली की शरण में अनंत अंबानी! मंत्रों के बीच राधिका से कराया दान

अनंत अंबानी ने पत्नी राधिका के साथ नवी मुंबई स्थित नेरुल स्थित कृष्ण काली मंदिर के दर्शन किए. दोनों अपने प्राइवेट जेट से मंदिर पहुंचे थे. अनंत-राधिका ने यहां पूजा-पाठ के बाद दिल खोलकर गरीबों में दान किया.

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अनंत अंबानी ने पत्नी राधिका के साथ नवी मुंबई स्थित नेरुल स्थित कृष्ण काली मंदिर के दर्शन किए. (Photo: Screengrab/Instagram)
अनंत अंबानी ने पत्नी राधिका के साथ नवी मुंबई स्थित नेरुल स्थित कृष्ण काली मंदिर के दर्शन किए. (Photo: Screengrab/Instagram)

अंबानी परिवार की सनातन धर्म और परंपरा में गहरी आस्था है. सोशल मीडिया पर इसका एक नया प्रमाण सामने आया है. 5 अप्रैल को अनंत अंबानी ने पत्नी राधिका के साथ नवी मुंबई के नेरुल स्थित कृष्ण काली मंदिर के दर्शन किए. अनंत-राधिका अपने प्राइवेट जेट से मंदिर पहुंचे. सोशल मीडिया पर इसका वीडियो खूब वायरल हो रहा है. अनंत-राधिका ने यहां पूरे विधि-विधान के साथ मंदिर के दर्शन किए और दान-पुण्य किया.

बता दें कि 10 अप्रैल को अनंत अंबानी का जन्मदिन है. अपना बर्थडे सेलिब्रेट करने से पहले वो पत्नी राधिका संग कृष्ण काली मंदिर में आशीर्वाद लेने पहुंचे थे. यह मंदिर महाकाली के उस दुर्लभ स्वरूप को समर्पित है, जहां वो भगवान श्रीकृष्ण के साथ एक ही दिव्य विग्रह में विराजित हैं. देश-दुनिया में इस मंदिर को लेकर लोगों में बड़ी आस्था है.

पूजा-पाठ के बाद किया दान
कृष्ण काली मंदिर में विधिवत पूजा के बाद अनंत और राधिका ने दिल खोलकर दान-पुण्य भी किया. दोनों ने अपने हाथ से गरीब और जरूरतमंद लोगों को चीजें बांटी. सोशल मीडिया पर वायरल वीडिया के मुताबिक, अनंत-राधिका ने यहां गरीबों को छाता, कम्बल और खाने की चीजें दान कीं. दान-धर्म के इस कार्य को मंदिर के पुजारियों ने मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया.

पिछले जन्मदिन पर की थी 140 किलोमीटर की पदयात्रा
अनंत अंबानी 10 अप्रैल को 31 साल के होने वाले हैं. इसलिए वो कृष्ण काली का आशीर्वाद लेने मंदिर पहुंचे थे. पिछले साल 2025 में भी अपने जन्मदिन से ठीक पहले अनंत अंबानी ने पदयात्रा की थी. अनंत की यह पदयात्रा 29 मार्च 2025 से लेकर 6 अप्रैल 2025 तक चली थी. इस दौरान उन्होंने जामनगर से द्वारकाधीश मंदिर की 140 किलोमीटर की दूरी पैदल चलकर तय की थी.

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उन्होंने बताया था कि वो रोजाना रोजाना 10 से 12 किलोमीटर की दूरी तय करते थे. इस यात्रा में उनके साथ मौजूद लोग भजन और नामजप के साथ उनका उत्साह बढ़ाते थे. आखिर में अनंत ने भगवान द्वारकाधीश के चरणों में इस पदयात्रा को विराम दिया था.

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