राजस्थान की सियासत में एक बार फिर बयानों के तीर चलने शुरू हो गए हैं. इस बार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर सीधा हमला बोला है. राठौड़ का आरोप है कि अशोक गहलोत, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट को राजनीतिक रूप से कमजोर करने और नुकसान पहुंचाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते हैं.
राठौड़ ने एक न्यूज एजेंसी से कहा, "वे (गहलोत) अभी भी सचिन पायलट को बच्चा समझते हैं. यह उनकी पार्टी और परिवार से जुड़ा मामला है, लेकिन सचिन पायलट को ही तय करना है कि वे क्या करना चाहते हैं और उनका भविष्य क्या होगा."
राठौड़ ने सुझाव दिया कि अगर पायलट को लगता है कि कांग्रेस पार्टी में उनका भविष्य सुरक्षित है, तो उन्हें वहीं रहना चाहिए. हालांकि, अगर उन्हें ऐसा नहीं लगता, तो उन्हें अपना फैसला खुद लेना होगा.
बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि गहलोत कभी भी पायलट को कांग्रेस में पूरी तरह से स्थापित नहीं होने देंगे और ऐसी टिप्पणियां करते रहेंगे जिनसे उनकी छवि खराब हो.
पायलट के बारे में गहलोत की पिछली टिप्पणियों का जिक्र करते हुए राठौड़ ने कहा कि ऐसे बयानों का मकसद कांग्रेस नेता की छवि को नुकसान पहुंचाना था.
दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के उस बयान से हुई, जो उन्होंने रविवार को दिया था. गहलोत ने सितंबर 2022 में राजस्थान कांग्रेस के भीतर हुए हाई-वोल्टेज ड्रामे और बगावत को लेकर सफाई दी थी.
गहलोत ने दावा किया कि सितंबर 2022 की घटनाएं पार्टी आलाकमान के खिलाफ कोई बगावत नहीं थीं, बल्कि पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना को लेकर पार्टी के भीतर का सिर्फ एक मतभेद था.
मानेसर कांड का किया जिक्र
गहलोत ने 2020 की बगावत की याद दिलाते हुए कहा कि जब पायलट और कुछ विधायक हरियाणा के मानेसर जाकर होटलों में रुक गए थे, तब सरकार बचाने के लिए करीब 100 विधायक हमारे साथ होटलों में रुके थे. उन 100 विधायकों ने आलाकमान के प्रति वफादारी तो जताई, लेकिन वे पायलट को सीएम के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं थे. वे चाहते थे कि उन 100 वफादारों में से ही किसी को भी मुख्यमंत्री बना दिया जाए.
तीन गुटों में बंटी राजस्थान कांग्रेस
बीजेपी अध्यक्ष मदन राठौड़ ने राजस्थान कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर एक नया समीकरण भी सामने रखा. उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में राज्य कांग्रेस प्रमुख गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व सीएम अशोक गहलोत एक तरफ (एक गुट में) हैं, जबकि सचिन पायलट दूसरी तरफ अकेले खड़े हैं. वहीं, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) टीकाराम जूली इन दोनों गुटों के बीच में फंसे हुए हैं.
इस सियासी बयानबाजी के बाद राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है कि क्या आगामी दिनों में कांग्रेस की यह अंदरूनी कलह कोई नया मोड़ लेगी?