राजस्थान के कोटा में रेलवे अंडरपास निर्माण कार्य के दौरान हुए दर्दनाक हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं. मिट्टी धंसने से जान गंवाने वाले जूनियर इंजीनियर प्रभात सिंह सोलंकी की रेलवे में नौकरी लगे महज तीन महीने ही हुए थे. हादसे के बाद परिवार और रिश्तेदारों में शोक की लहर है. परिजनों ने रेलवे प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.
शुक्रवार सुबह प्रभात सिंह सोलंकी के शव का पोस्टमार्टम कराया गया. पोस्टमार्टम के दौरान मौजूद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था. प्रभात भोपाल के रहने वाले थे और परिवार में दो बहनों के इकलौते भाई थे. इतना ही नहीं, पिता और तीन चाचाओं के परिवार में भी वे अकेले बेटे थे. परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों का बड़ा हिस्सा भी उन्हीं के कंधों पर था. ऐसे में उनकी असमय मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है.
परिजनों ने रेलवे पर लगाया बड़ा आरोप
परिजनों का आरोप है कि रेलवे में नई नियुक्ति होने के बावजूद प्रभात को एक बड़े और जोखिम भरे निर्माण प्रोजेक्ट की निगरानी की जिम्मेदारी सौंप दी गई थी. उनका कहना है कि प्रभात अभी प्रशिक्षण के दौर में थे और उन्हें ऐसे कार्य में नहीं लगाया जाना चाहिए था, जहां जान का खतरा हो. परिवार ने इस हादसे को लापरवाही का परिणाम बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह हादसा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस कॉरिडोर परियोजना के तहत चल रहे निर्माण कार्य के दौरान हुआ. रेलवे के सीनियर डीसीएम सौरभ जैन ने बताया कि दरा टनल और रेलवे अंडर ब्रिज का निर्माण कार्य प्रगति पर था. रेलवे प्रशासन मृतकों के परिजनों को नियमानुसार हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगा. उन्होंने कहा कि हादसे की परिस्थितियों की भी जांच की जा रही है.
हादसे में जान गंवाने वाले दूसरे इंजीनियर की पहचान बिहार निवासी पंकज कुमार झा के रूप में हुई है. उनके परिजनों के कोटा पहुंचने के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा. दोनों इंजीनियरों की मौत से रेलवे और निर्माण एजेंसी के कर्मचारियों में भी शोक का माहौल है.
गुरुवार रात 8 बजे हुआ था हादसा
गौरतलब है कि गुरुवार रात करीब 8 बजे कोटा के दरा घाटी क्षेत्र में नेशनल हाईवे-52 के पास रेलवे अंडर ब्रिज पर बॉक्स पुशिंग का कार्य चल रहा था. इसी दौरान निर्माण कार्य का निरीक्षण करने पहुंचे जूनियर इंजीनियर प्रभात सिंह सोलंकी और पंकज कुमार झा अचानक मिट्टी धंसने से उसके नीचे दब गए. सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचा और दोनों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई.
इस हादसे ने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों और कार्यस्थल पर इंजीनियरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे हादसे की वास्तविक वजह सामने आ सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.