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अलवर के सरिस्का से आई खुशखबरी, बाघिन ST-22 ने दो शावकों को दिया जन्म, टाइगरों की संख्या बढ़कर हुई 54

अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघिन ST-22 ने दो शावकों को जन्म दिया है, जिससे यहां बाघों की संख्या बढ़कर 54 हो गई है. वन विभाग के अनुसार मां और दोनों शावक पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनकी 24 घंटे निगरानी की जा रही है. गर्मी को देखते हुए जल स्रोतों की व्यवस्था की गई है. यह उपलब्धि सरिस्का की टाइगर पुनर्वास योजना की सफलता मानी जा रही है. वन विभाग ने लोगों से सतर्कता और सहयोग की अपील की है.

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नए शावकों की 24 घंटे मॉनिटरिंग की जा रही है. (Photo: Representational)
नए शावकों की 24 घंटे मॉनिटरिंग की जा रही है. (Photo: Representational)

अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. सरिस्का की तालवृक्ष रेंज में बाघिन ST-22 ने दो शावकों को जन्म दिया है. नए शावकों के जन्म के साथ ही सरिस्का में बाघों की कुल संख्या बढ़कर 54 हो गई है. इसे सरिस्का में वन्यजीव संरक्षण और बेहतर प्रबंधन का बड़ा परिणाम माना जा रहा है. वन विभाग के अनुसार बाघिन और उसके दोनों शावक पूरी तरह सुरक्षित हैं.

नए शावकों की 24 घंटे हो रही मॉनिटरिंग
उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संबंधित क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है. नए शावकों की 24 घंटे मॉनिटरिंग की जा रही है. वनकर्मियों की विशेष टीमें लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं. ताकि किसी भी प्रकार की परेशानी या खतरे की स्थिति उत्पन्न न हो. गर्मी के मौसम को देखते हुए सरिस्का प्रशासन ने क्षेत्र के सभी जल स्रोतों और वाटर पॉइंट्स को भरवाया है, जिससे वन्यजीवों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध हो सके. 

विभाग का कहना है कि भीषण गर्मी में वन्यजीवों के लिए पानी की व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती होती है, जिसे ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए गए हैं. सरिस्का में लगातार बढ़ रही टाइगर आबादी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वर्षों पहले शुरू की गई टाइगर पुनर्वास योजना अब सफल होती दिखाई दे रही है. इससे पहले भी सरिस्का में कई बाघिनों ने शावकों को जन्म देकर टाइगर परिवार को बढ़ाया है.

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भीषण गर्मी में वन्यजीवों के लिए पानी की व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती होती है.

वन विभाग ने आमजन से की ये अपील
वन विभाग ने आमजन से अपील की है कि वे सरिस्का क्षेत्र में अनावश्यक आवाजाही और गतिविधियों से बचें तथा वन्यजीव संरक्षण में सहयोग करें. विभाग का कहना है कि बाघिन और शावकों की सुरक्षा के लिए शांत वातावरण बेहद जरूरी है. सरिस्का में लगातार बाघो का कुनबा बढ़ रहा है. इसलिए यहां आने वाले पर्यटकों को प्रतिदिन बाघो की साइटिंग होती है.

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