ठीक 20 दिन बाद एक बार फिर ट्विशा की मौत हुई. इस बार ये एक 'डमी' मौत थी. वही घर, वही छत, वैसा ही फंदा और वही दो लोग, जिन्होंने ट्विशा को फांसी के फंदे पर लटकते देखने का दावा किया था. यानी ट्विशा की सास और ट्विशा का पति. ट्विशा की कदकाठी का और ठीक उसी के वजन का एक पुतला तैयार किया गया. और उसके गले में फंदा डाला गया.