बिहार की वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए. विपक्ष ने आरोप लगाया कि 25-30 दिनों में 8 करोड़ मतदाताओं को सूची में शामिल करने की प्रक्रिया की पारदर्शिता पर संदेह है. यह भी कहा गया कि गरीबों के पास आवश्यक 11 दस्तावेज नहीं हैं. देखें एक और एक ग्यारह.