पश्चिम बंगाल का दंगल अब अपने चरम पर है और अखाड़े में इस बार सिर्फ शब्दों से वार नहीं बल्कि नैरेटिव से हो रहा है. चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी ने आजादी वाला दांव चला है. प्रधानमंत्री ने कटमनी- भ्रष्टाचार, घुसपैठिए से आजादी का एलान करके ममता सरकार पर तगड़ा हमला किया. दूसरी तरफ ममता का किला मजबूत और अबतक अडिग है. लेकिन इस बार मुकाबला अलग है क्योंकि बीजेपी चुनावी मैदान में जबरदस्त जोर लगा रही है. इस बीच अमित शाह ने सीटों का गणित सामने रखकर बंगाल के चुनावी दंगल को रोमांचक बना दिया है. दावे बड़े हैं, दांव ऊंचे हैं और हर रैली एक नया राउंड बन चुकी है. मतुआ कार्ड, मंदिर कनेक्शन, जमीनी समीकरण, बीजेपी हर दांव आजमा रही है तो टीएमसी भी अपने गढ़ को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है. अब आखिरी राउंड 29 अप्रैल को है जहां जनता जज होगी, ईवीएम अखाड़ा होगा और फैसला ये होगा कि बंगाल में आजादी जीतती है या दीदी का दबदबा कायम रहता है. अब सवाल सीधा है, क्या आजादी का नारा ममता के 15 साल पुराने किले को गिरा देगा या फिर बंगाल एक बार फिर दीदी के साथ इतिहास दोहराएगा?