समाज की नसों में बहता जहर एक के बाद एक बेटियों को अपना शिकार बना रहा है. ये जहर है दहेज का. जिसे बदलते वक्त और कथित आधुनिक समाज ने बेशर्मी से गिफ्ट कहना शुरू कर दिया है. आज लड़कों का बकायदा एक रेट कार्ड तय होता है. पढ़ाई पर हुए खर्च को 'इन्वेस्टमेंट रिकवरी मॉडल' मानकर लड़की वालों से वसूली की जाती है. लड़का जो कमाता है उसके हिसाब से सौदेबाजी होती है. और आए दिन कोई लड़की इसका शिकार बन जाती है.