आज सबसे पहले हम आपको बताएंगे कि जब दुनिया के तमाम मुस्लिम देश घुसपैठियों को खदेड़ सकते हैं, तो भारत में इस पर तुष्टिकरण और सियासत क्यों होती है? पाकिस्तान ने इसी साल डेढ़ लाख अफगानी मुसलमानों को घुसपैठिया बताकर खदेड़ दिया. ईरान ने 15 लाख लोगों को सीमा पार भगा दियाा. सबने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपने मजहब के लोगों को ही बाहर का रास्ता दिखा दिया। वहां किसी ने इसे 'सरकार का एजेंडा' नहीं कहा.
पिछले कई दिनों से देश में एक ऐसा Narrative खड़ा किया जा रहा था कि सड़कों पर नमाज़ और खुले में कुर्बानी रोकने के सरकारी दिशा-निर्देश मुस्लिम विरोधी हैं. लेकिन आज उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल और दिल्ली तक की तस्वीरों ने इस प्रोपेगैंडा की हवा निकाल दी. आज देश में एक नया मॉडल दिखा. जहां बिना किसी विवाद के, मस्जिदों और मैदानों में बेहद शांति से नमाज़ भी अदा की गई और कानून का राज भी कायम रहा.
आज सबसे पहले आपको ये बताएंगे कि देश में अवैध रूप से घुसे ये घुसपैठिये कैसे देश के संसाधन और आपका हक निगल रहे हैं? ये सीधे आपकी थाली, आपके बच्चे के स्कूल की सीट और अस्पताल में बेड तक छीन रहे हैं. आपके खून-पसीने की कमाई से खड़े किए गए संसाधनों पर ये डाका डाल रहे हैं. ये सरहद पार से आते हैं, फर्जी दस्तावेज़ बनाते हैं और दीमक की तरह आपके और आपके परिवार के हक को चाटने लगते हैं.
आखिर बकरीद पर हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की कुर्बानी क्यों दी जा रही है? महाराष्ट्र के ठाणे की एक हाउसिंग सोसायटी में कुर्बानी के बकरों को लेकर ऐसा विवाद हुआ कि समाज 'सड़क' पर आ गया. विरोध में कोई सूअर ले आया, तो कहीं हनुमान चालीसा का पाठ होने लगा. बात सिर्फ बकरों की नहीं है. बात उस सोच की है जो 2026 में भी हमें कानून के चश्मे से नहीं, बल्कि सिर्फ धर्म के चश्मे से देखना सिखाती है.
आज सबसे पहले बात करेंगे सऊदी अरब के पवित्र मक्का शहर की, जहां आज से हज यात्रा की शुरुआत हो चुकी है. लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि जिस काबा की तरफ मुंह करके दुनिया के करोड़ों मुसलमान नमाज़ पढ़ते हैं, आज उसकी सुरक्षा के लिए सऊदी अरब को 9 हजार 500 करोड़ रुपये का अमेरिकी 'पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम' तैनात करना पड़ा है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ताइवान के लिए मंज़ूर किए 14 बिलियन डॉलर के पैकेज पर रोक लगा दी है. ये वही पैकेज है, जिसके तहत अमेरिका ताइवान को नए और आधुनिक हथियार देने वाला था. ये रोक तब लगाई गई, जब पिछले हफ्ते चीन ने बीजिंग दौरे पर आए राष्ट्रपति ट्रंप से ये कहा था कि वो ताइवान के मामले में दखल ना दें. सवाल है क्या अमेरिका, चीन के सामने झुक गया? देखें ब्लैक एंड व्हाइट.
आज सबसे पहले आपको ये बताएंगे कि मजहब, मस्जिद और अवैध कब्जे का गठजोड़ देश के कानून से सुरक्षा की गारंटी कैसे बन चुका है? सरकारी जमीन पर कब्जा करो, वहां मस्जिद या मजार बना दो. और जब जमीन खाली कराई जाए तो मजहब पर हमला बता दो. मुंबई के गरीब नगर में रेलवे की 600 करोड़ की ज़मीन से अतिक्रमण हटाने पहुंचे प्रशासन पर हिंसक भीड़ ने पथराव कर दिया. दावा किया गया कि बुलडोज़र मुसलमानों के हक पर चल रहा है.
आज सबसे पहले हम आपको बताएंगे कि जो Melody टॉफी 'इतनी चॉकलेटी' थी. विपक्ष के लिए वो Melody इतनी 'तीखी' कैसे हो गई? आज सोशल मीडिया पर हर तरफ 'Melody' की चर्चा है. कई जगह इसका स्टॉक खत्म हो गया है. इससे जुड़े वीडियो के व्यूज कुछ ही घंटों में 100 मिलियन को पार कर गए. और इसकी पेरेंट कंपनी के नाम से मिलती-जुलती कंपनी के शेयर का अपर सर्किट लग गया. और इसकी वजह थी PM मोदी का इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी को दिया गया गिफ्ट.
आज सबसे पहले आपको नॉर्वे में प्रधानमंत्री मोदी से पूछे गए सवाल की नीयत पर उठ रहे गंभीर सवालों के बारे में बताएंगे. नॉर्वे में प्रधानमंत्री मोदी की एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान एक विदेशी महिला पत्रकार ने सवाल ना लेने पर हंगामा खड़ा कर दिया. देखते ही देखते भारत में तमाम नेताओं ने उन्हें सोशल मीडिया पर हीरो बना दिया और उनके फॉलोअर्स रातों-रात 800 से 32 हज़ार पार कर गए.
समाज की नसों में बहता जहर एक के बाद एक बेटियों को अपना शिकार बना रहा है. ये जहर है दहेज का. जिसे बदलते वक्त और कथित आधुनिक समाज ने बेशर्मी से गिफ्ट कहना शुरू कर दिया है. आज लड़कों का बकायदा एक रेट कार्ड तय होता है. पढ़ाई पर हुए खर्च को 'इन्वेस्टमेंट रिकवरी मॉडल' मानकर लड़की वालों से वसूली की जाती है. लड़का जो कमाता है उसके हिसाब से सौदेबाजी होती है. और आए दिन कोई लड़की इसका शिकार बन जाती है.
पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने सड़क पर नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी तो कुछ लोग इसके विरोध में उतर आए. जबकि अदालतें बार-बार कह चुकी हैं कि सड़क पर नमाज़ कोई मौलिक अधिकार नहीं है, लेकिन तुष्टिकरण की राजनीति ने लोगों के दिमाग में ये बिठा दिया है कि उनकी परंपराएं देश के कानून से ऊपर हैं.
जो अमेरिका चीन को एशिया का बीमार आदमी कहता था... आज वही सुपरपावर अमेरिका ड्रैगन के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है. 8 साल बाद ट्रंप जब बीजिंग पहुंचे हैं तो हाथ में 'ट्रंप का इक्का' नहीं बल्कि अर्जी है. और जिनपिंग ने उन्हें समझा भी दिया है कि अब पासा पलट चुका है. इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में ट्रंप अपने 'हैंडशेक' के लिए मशहूर हैं, वो हाथ ऐसे खींचते हैं मानो सामने वाले का कंधा उखाड़ देंगे. लेकिन बीजिंग में उल्टा हो गया... ट्रंप 11 हजार किलोमीटर दूर से उड़कर आ गए... लेकिन जिनपिंग एक कदम भी टस से मस नहीं हुए.
आज सबसे पहले इस सवाल का जवाब खोजेंगे कि मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी के बेटे और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक यादव की मौत कैसे हुई. चश्मदीदों और करीबियों के दावे और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. प्रतीक यादव की मौत की वजह कोई बीमारी थी या इसके पीछे कोई कुछ और वजहे हैं. इसे लेकर एक सस्पेंस बना हुआ है.
आज सबसे पहले हम आपको कहेंगे कि चैन से 'सोना' है तो तेल बचाओ. और तेल बचेगा तभी सोने पर 'सुहागा' होगा! दो दिन से पूरे देश में प्रधानमंत्री मोदी की अपील की ही चर्चा है, जिसमें उन्होंने 1 साल तक सोना ना खरीदने और तेल की बचत करने के लिए कहा है. प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर विपक्ष पूछ रहा है कि सरकार हमारी जेब और पसंद पर पहरा कैसे लगा सकती है?
सबसे पहले आपको प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस बयान के बारे में बताएंगे जिसने पूरे देश को चौंका दिया है. और लोग पूछ रहे हैं कि क्या ईरान युद्ध की वजह से कोई गंभीर संकट आने वाला है? उन्होंने लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए कहा. जिससे लोग सहमे हुए हैं कि क्या पेट्रोल-डीजल पर खरीद को लेकर कोई लिमिट लगने वाली है?
आज हम आपको बताएंगे कि कैसे बीजेपी ने बंगाल में कमाल कर दिया. जहां कि राजनीति में दीदी का दबदबा था लेकिन वहां आज भगवा लहर चल रही है. जिस बीजेपी को बंगाल में अपना खाता खोलने के लिए 36 साल लग गए. वो खाता खोलने के बाद अगले 10 सालों में 200 के पार पहुंच गई.
बंगाल की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी ने इतिहास रच दिया... जिस धरती ने भारत को राष्ट्रगान दिया, राष्ट्रगीत दिया और आज उसने अपना भाग्य खुद ही बदल दिया. जिस बंगाल में कभी बीजेपी का नाम लेने वाला खोजना मुश्किल था. आज वहां बीजेपी ने अपने विधायक दल ने अपने नेता पर मुहर लगाते हुए. अपने पहले मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर दिया. ये नाम है.. शुभेंदु अधिकारी. वो नाम जिसने भवानीपुर में ममता बनर्जी को शिकस्त दी, अब वो बंगाल के नए कप्तान होंगे.
पश्चिम बंगाल में सत्ता बदल गई है, लेकिन चुनाव के मायने नहीं बदले. आज भी वहां चुनावी दौर का मतलब हमले, हत्या और और हिंसा ही है. और अब इसका शिकार बने हैं 41 साल के चंद्रनाथ रथ. उनका कसूर सिर्फ ये था कि वो शुभेंदु अधिकारी के पीए थे. चंद्रनाथ रथ ने भवानीपुर के स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर ममता बनर्जी की मौजूदगी में भी डटकर मोर्चा संभाला था. लेकिन बीती रात, कोलकाता से महज 21 किलोमीटर दूर मध्यग्राम में, बाइक सवार हमलावरों ने उनकी कार को घेरकर उन्हें गोलियों से भून दिया. हैरानी की बात ये है कि इस हत्या में जिस Glock पिस्टल का इस्तेमाल हुआ है वो एक ऐसी ऑस्ट्रिया मेड पिस्टल है जो भारत में बैन है और ये भारत के पंजाब में पाकिस्तान से ड्रोन के जरिये तस्करी से आती है. सवाल ये है कि बंगाल तक ये प्रतिबंधित हथियार कैसे पहुंचा? क्या बंगाल की राजनीतिक रंजिश में अब सीमा पार की साजिश भी शामिल हो चुकी है? आज आपको उस कड़वाहट की कहानी भी बताएंगे, जिसने ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी को 'दोस्त' से 'कट्टर दुश्मन' बना दिया. एक दौर था जब नंदीग्राम की ज़मीन पर ममता के लिए शुभेंदु ने अपना खून-पसीना बहाया था. लेकिन वक्त ऐसा बदला कि शुभेंदु ने ममता को उखाड़ फेंकने की कसम खा ली. और पाला बदलकर बीजेपी का दामन थाम लिया. जिस ज़मीन पर कभी उन्होंने ममता का साम्राज्य खड़ा किया था, उसी ज़मीन पर आज वो टीएमसी के लिए सबसे बड़ा रोड़ा बन गए.
अगर DMK और AIADMK के बीच गठबंधन होता है तो ये तमिलनाडु की राजनीति के लिए अभूतपूर्व घटना होगी. साल 1967 के बाद से ही तमिल नाडु की सत्ता DMK और AIADMK में से किसी एक के पास रही है. और ये दोनों पार्टियां एक दूसरे की दुश्मन रही हैं. डीएमके के 1967 से सत्ता में आने के बाद से कोई राष्ट्रीय पार्टी तमिलनाडु में जगह नहीं बना सकी. उस ज़माने में करुणानिधि और जयललिता की दुश्मनी का स्तर बहुत अलग था. करुणानिधि डीएमके से थे और जयललिता AIADMK से थीं. ये दोनों विधानसभा में कभी ज़्यादा मुस्कुराए नहीं और अपने रिश्तों में कटुता को हमेशा कायम रखा. कहीं किसी कार्यक्रम में मंच साझा करना हो या किसी राज्य और राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में शामिल होना हो, तब भी डीएमके और AIADMK ने दूरी बनाकर रखी. नटशेल में कहें तो डीएमके और AIADMK के नेता सिर्फ एक-दूसरे को नापसंद नहीं करते थे बल्कि दोनों एक-दूसरे से पूरी तरह नफ़रत करते थे. इसी नफरत में मार्च 1989 में जयललिता की विधानसभा में करुणानिधि की मौजूदगी में साड़ी खींची गई थी. इसके अलावा करुणानिधि ने जयललिता को भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल भी भेजा था और फिर जब जयललिता सत्ता में आईं तो उन्होंने भी करुणानिधि को उनके घर से आधी रात को गिरफ़्तार करवा लिया था, जिससे आप ये समझ पाएंगे कि अगर ये दो दुश्मन पार्टियां गठबंधन कर रही हैं तो इनके मकसद है इनके वर्चस्व को तोड़ने वाले थलपति विजय को सरकार बनाने से रोकना.
पश्चिम बंगाल की जनता ने बीजेपी के पक्ष में जनादेश दे दिया और आज शाम एक ही सवाल पूछा जा रहा था. नई सरकार का शपथ ग्रहण कब होगा और इसका मुख्यमंत्री कौन होगा? लेकिन शाम 4 बजे ममता बनर्जी ने हार स्वीकार करने और इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि वो हारी नहीं हैं... उन्हें हराया गया है... अगर वो हारी हैं तो इसका सबूत दें...उन्होंने कहा कि नैतिक रूप से उनकी जीत हुई है... इसलिए वो इस्तीफा देने लोकभवन नहीं जाएंगी. देखें ब्लैक एंड व्हाइट.
बंगाल में आज कमल ने कमाल कर दिखाया. पश्चिम बंगाल ने बीजेपी की झोली उम्मीद से कहीं ज्यादा भर दी. सिर्फ बहुमत ही नहीं, बंगाल में बीजेपी को बहुमत से भी बहुत ज्यादा मत मिला है. दो तिहाई से ज्यादा सीटों पर बीजेपी का कमल खिला है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीजेपी की इस महाजीत पर बीजेपी मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच आए. उन्होंने इस जीत को श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विश्वास की जीत कहा. बंगाल की जीत को उन्होंने मां गंगा का आशीर्वाद कहा. बंगाल में सिर्फ 10 वर्षों के अंदर 3 सीटों के आंकड़े से डबल सेंचुरी के पार जाना ही बीजेपी की अभूतपूर्व सफलता है. बंगाल ने 34 साल लेफ्ट का लाल रंग देखा. फिर 15 साल ममता बनर्जी की फूल पत्ती का रंग देखा. और अब केसरिया बंगाल का नया रंग है. बीजेपी का ये वो बंगाल है जिसमें जय मां काली और जय श्री राम का उद्घोष है.