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ब्लैक एंड व्हाइट: तमिलनाडु में सरकार गठन पर हलचल तेज, किसकी बनेगी सरकार?

ब्लैक एंड व्हाइट: तमिलनाडु में सरकार गठन पर हलचल तेज, किसकी बनेगी सरकार?

अगर DMK और AIADMK के बीच गठबंधन होता है तो ये तमिलनाडु की राजनीति के लिए अभूतपूर्व घटना होगी. साल 1967 के बाद से ही तमिल नाडु की सत्ता DMK और AIADMK में से किसी एक के पास रही है. और ये दोनों पार्टियां एक दूसरे की दुश्मन रही हैं. डीएमके के 1967 से सत्ता में आने के बाद से कोई राष्ट्रीय पार्टी तमिलनाडु में जगह नहीं बना सकी. उस ज़माने में करुणानिधि और जयललिता की दुश्मनी का स्तर बहुत अलग था. करुणानिधि डीएमके से थे और जयललिता AIADMK से थीं. ये दोनों विधानसभा में कभी ज़्यादा मुस्कुराए नहीं और अपने रिश्तों में कटुता को हमेशा कायम रखा. कहीं किसी कार्यक्रम में मंच साझा करना हो या किसी राज्य और राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में शामिल होना हो, तब भी डीएमके और AIADMK ने दूरी बनाकर रखी. नटशेल में कहें तो डीएमके और AIADMK के नेता सिर्फ एक-दूसरे को नापसंद नहीं करते थे बल्कि दोनों एक-दूसरे से पूरी तरह नफ़रत करते थे. इसी नफरत में मार्च 1989 में जयललिता की विधानसभा में करुणानिधि की मौजूदगी में साड़ी खींची गई थी. इसके अलावा करुणानिधि ने जयललिता को भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल भी भेजा था और फिर जब जयललिता सत्ता में आईं तो उन्होंने भी करुणानिधि को उनके घर से आधी रात को गिरफ़्तार करवा लिया था, जिससे आप ये समझ पाएंगे कि अगर ये दो दुश्मन पार्टियां गठबंधन कर रही हैं तो इनके मकसद है इनके वर्चस्व को तोड़ने वाले थलपति विजय को सरकार बनाने से रोकना.

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