जिस उद्देश्य के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया गया था... वो पूरी तरह असफल रहा... और महिला आरक्षण बिल संसद में गिर गया. महिला आरक्षण से जुड़े इस 'संविधान संशोधन बिल' को पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की आवश्यता थी. यानि मौजूद सांसदों में 66% सांसदों का समर्थन मिलना जरूरी था... जो प्रधानमंत्री मोदी की अपील, गारंटी, वादे और सरकार के लिखित आश्वासन के बाद भी संभव नहीं हो पाया.. विपक्ष ने बिल की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे स्वीकार नहीं किया.