राहुल गांधी भाषण देते हुए क्या बोल जाते हैं शायद वो खुद उसे समझ नहीं पाते होंगे. कांग्रेस बाद में उसे ऊपर नीचे करके भले सफाई दे दे पर पार्टी को नुकसान तो उठाना ही पड़ जाता है. जिन लोगों ने रविवार को भारत जोड़ो न्याय यात्रा के समापन पर राहुल गांधी का भाषण सुना होगा वो जरूर कन्फ्यूज हुआ होगा कि राहुल गांधी कहना क्या चाहते हैं. राहुल एक सभ्य नेता हैं और जानबूझकर उनसे किसी भी धर्म को चैलेंज वाली बोलने की उम्मीद नहीं की जाती है. जाहिर है कि उनके साथ के लोग उन्हें जिस तरह फीड कर रहे हैं वही सबके सामने उनके मुंह से निकल रहा है. बीजेपी तो ऐसे मौके के ही तलाश में रहती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल के भाषण के 24 घंटे के अंदर ही उन्हें घेर लिया है. फिर कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा सफाई देते रहें, किसी को क्या फर्क पड़ता है. खेड़ा कह रहे हैं कि 'हम तो आसुरी शक्ति से लड़ रहे हैं.' आइये देखते हैं कि राहुल गांधी ने कल ऐसा क्या बोल दिया कि पीएम नरेंद्र मोदी ने उसे निशाने पर ले लिया है.
1-राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं लड़ रहे राहुल!
राहुल गांधी बोलते बोलते दार्शनिक हो जाते हैं. उसके बाद उनकी बात को समझना मुश्किल हो जाता है. भारत जोड़ो न्याय यात्रा के समापन पर उन्होंने कहा कि, हम बीजेपी से लड़ रहे हैं. लोग सोचते हैं कि हम सब एक राजनीतिक दल के खिलाफ लड़ रहे हैं. ये सच नहीं गलत है. हम राजनीतिक पार्टी से नहीं लड़ रहे हं. ये बात हिंदुस्तान और इसके युवाओं को समझनी होगी. हम एक व्यक्ति, बीजेपी या मोदी के खिलाफ भी नहीं लड़ रहे हैं. उनके कहने का आशय होता है कि वह न बीजेपी के खिलाफ लड़ रहे हैं और न ही नरेंद्र मोदी के खिलाफ लड़ रहे हैं. इसके बाद उसमें हिंदू धर्म की शक्ति की बात घुसा देते हैं. राहुल कहते हैं कि हिंदू धर्म में शक्ति शब्द होता है. हम एक शक्ति से लड़ रहे हैं. सवाल है कि वह शक्ति क्या है? अभी शक्ति को समझा ही रहे होते हैं कि उसके पहले ईवीएम आ जाता है. फिर वे कहते हैं कि कि राजा की आत्मा ईवीएम में है. सही है. राज की आत्मा हर संस्था में है. ईडी, सीबीआई, आईटी में है. इस तरह राजा की आत्मा, हिंदू धर्म की शक्ति को बिना तार्किक रूप से जोड़े ईडी, सीबीआई और आईटी पर आ जाते हैं. श्रोता कन्फ्यूज.
2-नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी नहीं लड़ रहे हैं!
राहुल गांधी अपनी स्पीच में कह रहे हैं कि वो बीजेपी के खिलाफ लड़ रहे हैं और न ही नरेंद्र मोदी के खिलाफ लड़ रहे हैं. पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहते हैं कि, मोदी सिर्फ मास्क है, मुखौटा है. जैसे बॉलीवुड के एक्टर हैं, उन्हें रोल मिला है. उनसे जो कहा जाता है, वह करते हैं. उनसे कहा कि, सुबह उठकर समंदर में जाओ. वह जाते हैं. मैं बता दूं कि उनकी 56 इंच की छाती नहीं वह खोखले हैं. श्रोता समझ ही नहीं पा रहा है कि राहुल गांधी चाहते क्या हैं? क्योंकि राहुल न तो बीजेपी का विरोध कर रहे हैं और न ही नरेंद्र मोदी का विरोध कर रहे हैं. इतना दर्शन भारत का आम आदमी कैसे समझ पाएगा?
3-हिंदू धर्म की शक्ति से लड़ रहे हैं!
राहुल गांधी कहते हैं कि हम लोग यहां उपस्थित सभी राजनीतिक दल न एक दल के खिलाफ लड़ रहे हैं या न किसी एक व्यक्ति के खिलाफ लड़ रहे हैं. हिंदू धर्म में शक्ति शब्द होता है हम एक शक्ति से लड़ रहे हैं. सवाल उठता है कि वह शक्ति क्या है. जैसे यहां किसी ने कहां राजा की आत्मा ईवीएम में है, हिंदुस्तान की हर संस्था में . ईडी मे हैं, सीबीआई में हैं, हर संस्थान में हैं.
राहुल गांधी ने कहा कि, 'एक वरिष्ठ नेता (नाम नहीं लेना चाहता) कांग्रेस को छोड़ते हैं और मेरी मां से रो के कहते हैं कि सोनिया जी मुझे शर्म आ रही है. मेरे में इन लोगों से इस शक्ति से लड़ने की हिम्मत नहीं है. ये एक नहीं हैं, ऐसे हजारों लोग डराए गए हैं. जिस शक्ति की मैं बात कर रहा हूं, उन्होंने इनका गला पकड़कर बीजेपी की ओर किया है.
राहुल गांधी अगर इतना कहते हैं कि राजा की शक्ति इनका गला पकड़कर जबरदस्ती बीजेपी में मिला रही है तो भी सब ठीक था. पर हिंदू धर्म की शक्ति की बात कहने की यहां जरूरत ही क्या थी? बिना हिंदू धर्म का ना्म लिए भी उनका भाषण प्रभावी रहता. निश्चित है कि उनके सलाहकार और स्पीच राइटर सही लोग नहीं हैं. क्योंकि इस तरह कि गलती चुनाव के मौके पर कतई नहीं होनी चाहिए. हालांकि यह सही है कि राहुल गांधी का आशय कोई गलत नहीं रहा होगा. राहुल गांधी को पता ही नहीं होगा कि हिंदू धर्म में शक्ति की व्याख्या क्या है. पत्रकार विनोद शर्मा कहते हैं कि राहुल ने अपनी नामसझी में ये बात कही होगी. राहुल का आशय शक्ति स्वरूपा की आलोचना की नहीं रही होगी. राहुल को बोलते हुए देखने पर यह समझ में आता है कि जैसे वो अनिच्छा से जबरदस्ती बोल रहे हों. पर उनके ये अनिच्छा वाले स्पीच पीएम मोदी और बीजेपी के लिए रामबाण बन जाते हैं.
4- लालू यादव के बाद राहुल के बयान मोदी के लिए मौका
अभी कुछ दिनों पहले ही लालू यादव ने पीएम मोदी के परिवार पर अटैक करके जिस तरह बीजेपी और पीएम मोदी को एक मौका दे दिया था उसी तरह राहुल गांधी ने अपने दार्शनिक बयान से एक और मौका दे दिया. मोदी इसे लगातार कई रैलियों में भुना सकते हैं. बीजेपी इसे उनके हिंदू धर्म के विरोधी होने के रूप में स्थापित करने की कोशिश करेगी.
पीएम मोदी ने कांग्रेस की सरकार वाले तेलंगाना में राहुल के शक्ति वाले बयान पर पलटवार किया है. उन्होंने तेलंगाना के जगतयाल में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने कहा कि उनके घोषणा पत्र का ऐलान है कि मेरी (इंडिया ब्लॉक) लड़ाई शक्ति के खिलाफ है. पीएम मोदी ने कहा कि एक ओर शक्ति के विनाश की बात करने वाले लोग हैं और दूसरी तरफ शक्ति की पूजा करने वाले लोग हैं. उन्होंने कहा कि मुकाबला 4 जून को हो जाएगा कि कौन शक्ति का विनाश कर सकता है और कौन शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है.
पीएम मोदी ने आगे कहा कि मेरे लिए हर मां शक्ति का रूप है, हर बेटी शक्ति का रूप है. उन्होंने कहा कि मैं इनको शक्ति के रूप में पूजता हूं और मैं इन शक्ति स्वरूपा माताओं-बहनों की रक्षा के लिए जान की बाजी लगा दूंगा. पीएम मोदी ने सवालिया अंदाज में कहा कि बताओ आप शक्ति को समाप्त करने वालों को मौका देंगी क्या?
5-सीएए और इलोक्टरल बॉन्ड छोड़कर ईवीएम पर ठीकरा फोड़ना, यानी मुद्दों का भटकाव!
मुंबई में रविवार को सजे विपक्ष के इस मंच की खासियत रही कि, जितने भी नेता यहां अपना संबोधन रखने पहुंचे, सभी ने ईवीएम का मुद्दा उठाया और सबने अपने भाषण में ये जरूर कहा कि, अगर उनकी सरकार आएगी तो वे ईवीएम को हटा देंगे. राहुल गांधी, एमके स्टालिन, फारूक अब्दुल्ला सभी ने इस पर बात की.इस दौरान राहुल गांधी ने EVM का मुद्दा उठाया साथ ही ईडी और सीबीआई की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए. ईवीएम पर राहुल का तंज बता रहा था कि उन्हें अब यकीन हो चला है कि दूसरे मुद्दे अब काम नहीं करने वाले हैं. क्योंकि सीएए और इलोक्टरल बॉन्ड के मुद्दे पर जिस तरह सरकार घिर रही है उस तरह मुंबई में जुटा विपक्ष इन मुद्दों पर हमलावर नहीं दिखा. यह भी राहुल के सलाहकार मंडली की अयोग्यता की ओर ही इशारा कर रहा है.